क्या छत्तीसगढ़ के गांवों में भी आ गया शहर,जहां कभी चिट्ठी पहुंचती थी देर से, वहां अब वीडियो कॉल

Arun Tiwari | Nov 01, 2026, 12:26 IST
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<br>चिट्ठियों से वीडियो कॉल तक, छत्तीसगढ़ के गांवों में बदलती जिंदगी की नई तस्वीर।<br>
चिट्ठियों से वीडियो कॉल तक, छत्तीसगढ़ के गांवों में बदलती जिंदगी की नई तस्वीर।

जिस गांव में कभी खबर के लिए अखबार या रेडियो का इंतजार करना पड़ता था, वहां आज मोबाइल पर दुनिया भर की जानकारी मिल सकती है। यह छत्तीसगढ़ के गांवों में बदलाव की तस्वीर का एक हिस्सा है। लेकिन सवाल है कि क्या सुविधाओं के विस्तार ने गांव को शहर जैसा बना दिया। या बदलाव के बावजूद कुछ बुनियादी समस्याएं अब भी वैसी ही हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अब कई गांवों में मोबाइल, इंटरनेट, टीवी और मोटरसाइकिल आम हो गए हैं।
  • राज्य बनने के बाद गांवों में सड़क, बिजली, पानी और संचार की सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन हर इलाके में इनका असर एक जैसा नहीं रहा।
  • डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग से लोगों को लेन-देन के नए विकल्प मिले हैं।
  • रोजगार, पढ़ाई और इलाज के लिए आज भी लोगों को शहरों का रुख करना पड़ता है।

गांव में मोबाइल और वीडियो कॉल से क्या बदला?

पहले दूर रहने वाले रिश्तेदारों से संपर्क के साधन कम थे। अब स्मार्टफोन से बात आसान है। दूसरे शहर में काम करने वाला सदस्य घरवालों से वीडियो कॉल कर सकता है।

अब लोग मोबाइल पर मौसम, फसल के भाव और सरकारी योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं। डिजिटल भुगतान से खरीदारी और पैसों का लेनदेन आसान हुआ है। युवा मोबाइल से नौकरी और परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। साथ ही पढ़ाई से जुड़ी सामग्री भी ऑनलाइन देख सकते हैं।

26 साल छत्तीसगढ़: विकास की चमक या आम आदमी की जिंदगी का संघर्ष? | 26 Years of Chhattisgarh: Glow of Development or Struggle of Common Man's Life?
26 साल में कितना बदला छत्तीसगढ़ और कितना बदला छत्तीसगढ़िया, विकास की चमक के बीच आम आदमी की जिंदगी
01 Nov 2026 ,
By Arun Tiwari
छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के 26 साल पूरे कर चुका है। राज्य की स्थापना 1 नवंबर 2000 को हुई थी। इन वर्षों में नई राजधानी, चौड़ी सड़कें, बढ़ते शहर और बदलती जीवनशैली दिखती है। लेकिन विकास की कहानी सिर्फ इमारतों और योजनाओं में नहीं है। सवाल यह है कि इस दौरान आम छत्तीसगढ़िया की जिंदगी कितनी बदली।
छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के 26 साल पूरे कर चुका है। राज्य की स्थापना 1 नवंबर 2000 को हुई थी। इन वर्षों में नई राजधानी, चौड़ी सड़कें, बढ़ते शहर और बदलती जीवनशैली दिखती है। लेकिन विकास की कहानी सिर्फ इमारतों और योजनाओं में नहीं है। सवाल यह है कि इस दौरान आम छत्तीसगढ़िया की जिंदगी कितनी बदली।

तकनीक पहुंचना और इस्तेमाल होना एक बात नहीं

गांव में नेटवर्क होने पर भी इंटरनेट की गति कमजोर हो सकती है। परिवार में स्मार्टफोन हो, पर सब सदस्यों को स्वतंत्र इस्तेमाल का मौका न मिले। डिजिटल सेवाओं के लिए भाषा, तकनीकी जानकारी और भरोसेमंद इंटरनेट भी चाहिए। इसलिए यह देखना होगा कि तकनीक कितने लोगों तक पहुंची और किस काम में आ रही है।

पक्के मकान और सड़क से आगे की कहानी

सड़क से बाजार, स्कूल और अस्पताल तक पहुंच आसान हो सकती है। बिजली से पढ़ाई और छोटे कारोबार को सहारा मिल सकता है। लेकिन गांव की स्थिति सिर्फ इस बात से नहीं आंकी जा सकती कि सड़क बनी है या नहीं। बल्कि यह भी देखना होगा

छत्तीसगढ़ी भाषा का बदलता स्वरूप: क्या डिजिटल युग में लुप्त हो रही हैं स्थानीय बोलियां? | Changing Nature of Chhattisgarhi Language: Are Local Dialects Disappearing in the Digital Age?
छत्तीसगढ़ के 26 साल : हमारी बोली बची, लेकिन क्या अगली पीढ़ी उसे बोलती है, नई पीढ़ी से दूर हो रही हैं छत्तीसगढ़ की बोलियां
01 Nov 2026 ,
By Arun Tiwari
छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस पर एक अहम सवाल उठा है। राज्य की सांस्कृतिक पहचान की आधार रही स्थानीय भाषाएं और बोलियां नई पीढ़ी तक किस रूप में पहुंच रही हैं। यह छत्तीसगढ़ी भाषा के भविष्य का सवाल है। छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बने 26 साल हो गए हैं। राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था।
छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस पर एक अहम सवाल उठा है। राज्य की सांस्कृतिक पहचान की आधार रही स्थानीय भाषाएं और बोलियां नई पीढ़ी तक किस रूप में पहुंच रही हैं। यह छत्तीसगढ़ी भाषा के भविष्य का सवाल है। छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बने 26 साल हो गए हैं। राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था।

सड़क की गुणवत्ता कैसी है

बारिश में आवागमन संभव रहता है या नहीं

नजदीकी अस्पताल तक कितना समय लगता है

पेयजल नियमित मिलता है या नहीं

स्कूल में पर्याप्त शिक्षक हैं या नहीं

क्या खेती भी आधुनिक हुई?

पिछले 25 साल में खेती के तरीकों, उपकरणों, बाजार तक पहुंच और सरकारी सहायता में अलग-अलग स्तर पर बदलाव दिखे हैं। कुछ किसान आधुनिक उपकरण और तकनीक अपना सकते हैं। कई परिवार अब भी सीमित संसाधनों से खेती करते हैं।

सिंचाई, जमीन का आकार, मौसम, फसल की लागत और बाजार तक पहुंच आर्थिक स्थिति तय करते हैं। मोबाइल से मौसम, सलाह और भाव की जानकारी मिल सकती है। पर जानकारी मिलना बेहतर आमदनी की गारंटी नहीं है। किसान की आय खर्च, पैदावार और उपज के दाम पर निर्भर करती है।

छत्तीसगढ़ की थाली का 26 साल का सफर: चीला-फरा से फास्ट फूड तक, बदलता छत्तीसगढ़िया जायका | 26 Years of Chhattisgarh's Thali: From Cheela-Phara to Fast Food, Evolving Chhattisgarhiya Cuisine
छत्तीसगढ़ की थाली के 26 साल, चीला-फरा से फास्ट फूड तक, विकास के साथ बदला छत्तीसगढ़िया जायका
01 Nov 2026 ,
By Arun Tiwari
कभी सुबह की शुरुआत बासी भात, चटनी और चाय से होती थी। चीला, फरा और ठेठरी-खुरमी रसोई की पहचान थे। अब उसी छत्तीसगढ़ में पिज्जा, बर्गर, मोमोज और फास्ट फूड भी जगह बना चुके हैं। छत्तीसगढ़ की थाली के 26 साल पर सवाल है कि क्या थाली बदल गई। यह भी देखना जरूरी है कि पारंपरिक स्वाद पीछे छूट रहे हैं या नए रूप में जगह बना रहे हैं।
कभी सुबह की शुरुआत बासी भात, चटनी और चाय से होती थी। चीला, फरा और ठेठरी-खुरमी रसोई की पहचान थे। अब उसी छत्तीसगढ़ में पिज्जा, बर्गर, मोमोज और फास्ट फूड भी जगह बना चुके हैं। छत्तीसगढ़ की थाली के 26 साल पर सवाल है कि क्या थाली बदल गई। यह भी देखना जरूरी है कि पारंपरिक स्वाद पीछे छूट रहे हैं या नए रूप में जगह बना रहे हैं।

गांवों से शहरों की ओर पलायन क्यों जारी?

सुविधाएं बढ़ने पर भी कई परिवारों को रोजगार और शिक्षा के लिए शहर जाना पड़ सकता है। कुछ युवा उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहर जाते हैं। कुछ लोग निर्माण, उद्योग, परिवहन या घरेलू काम के लिए दूसरे जिलों और राज्यों में जाते हैं।

पलायन के कारण हर परिवार में एक जैसे नहीं होते। कहीं खेती से आय कम होती है। कहीं नियमित स्थानीय रोजगार नहीं मिलता। कहीं शिक्षा या कौशल प्रशिक्षण के मौके सीमित हैं।

क्या पलायन सिर्फ समस्या है?

इसे सिर्फ समस्या के रूप में देखना गलत होगा। बाहर काम करने वाले कुछ लोग घर पैसे भेजते हैं। इससे खर्च, पढ़ाई या मकान निर्माण में मदद मिल सकती है। दूसरी तरफ परिवार से लंबी दूरी, काम की असुरक्षा और रहने की स्थितियां जैसी चुनौतियां भी हो सकती हैं।

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तीन दिन छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और उपलब्धियों का भव्य उत्सव संगम, तीनों दिन बड़े आयोजन, समापन में अमित शाह रहेंगे उपस्थित
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छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 26 साल पूरे होने का जश्न मनाने जा रहा है। राज्योत्सव 2026 नवा रायपुर में 1 से 3 नवंबर तक होगा। इस बार आयोजन की थीम है सशक्त नारी, युवा उड़ान। यह छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 तीन दिन तक चलेगा। इसमें कला, संस्कृति और उपलब्धियों की झलक दिखेगी। समापन समारोह में अमित शाह शामिल होंगे।
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ग्रामीण महिलाओं की बदली भूमिका

खेती, पशुपालन और परिवार की देखभाल में महिलाओं का योगदान लंबे समय से रहा है। स्वयं सहायता समूह, स्थानीय उद्यम और सरकारी कार्यक्रमों से कुछ महिलाओं को बचत, कर्ज और सामूहिक आर्थिक गतिविधि से जुड़ने के मौके मिले हैं। मोबाइल और डिजिटल भुगतान भी नए रास्ते खोल सकते हैं।

ये सब भी मायने रखता है :

क्या महिलाएं अपनी आय पर नियंत्रण रखती हैं

क्या उन्हें बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं का स्वतंत्र इस्तेमाल मिलता है

क्या स्थानीय स्तर पर उनके लिए पर्याप्त बाजार है

क्या गांव का सामाजिक जीवन बदला?

टीवी, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने मनोरंजन के विकल्प बढ़ाए हैं। पर इसका मतलब सामुदायिक जीवन का खत्म होना नहीं है। कई गांवों में त्योहार, मेले और धार्मिक आयोजन अब भी लोगों को जोड़ते हैं। कुछ परंपराएं नए रूप में भी सामने आती हैं।

गांव को शहर बनाने से ज्यादा जरूरी क्या?

गांव की अपनी आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान है। विकास का मतलब है कि लोगों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, संचार और परिवहन अपने आसपास मिले। अगर कोई युवा बेहतर पढ़ाई के लिए शहर जाए, तो यह गलत नहीं। पर अगर विकल्प न होने की मजबूरी में गांव छोड़ना पड़े, तो यह अलग सवाल है।

अब आगे क्या?

असली बदलाव तब होगा, जब लोगों को अपने गांव में ही रोजगार, अच्छी सुविधाएं और आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे। यह बदलाव कितना हुआ है, इसे समझने के लिए आंकड़ों और जमीनी जानकारी की जरूरत है।

यह खबर क्यों जरूरी है

छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी आज भी गांवों में रहती है। इसलिए गांवों में कितना विकास हुआ, यह जानना जरूरी है। सिर्फ सड़क बनना या मोबाइल पहुंचना ही विकास नहीं है। असली विकास तब होगा, जब गांव के लोगों को अच्छी पढ़ाई, इलाज और रोजगार की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पलायन, किसानों की कमाई और महिलाओं को मिलने वाले मौके भी अहम हैं। इसलिए यह एक नजरिया है, जिसके जरिए लोग अपने गांव की स्थिति को समझ सकते हैं।
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