मेटा ग्लासेस से नकल पर होगी सख्ती, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने सरकार को भेजा लो पावर जैमर का प्रस्ताव
Jageshwar Prasad | Nov 01, 2026, 11:22 IST
भर्ती परीक्षा में नकल रोकने के लिए जैमर का प्रस्ताव, मेटा ग्लासेस पर सख्ती
राज्य की भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) अब तकनीक के जरिए सुरक्षा का दायरा बढ़ाने जा रहा है। बोर्ड की प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षा केंद्रों पर हर कक्ष में लो पावर जैमर लगाए जाएंगे। जैमर लगाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया गया है।
बोर्ड का मानना है कि वर्तमान में मेटा ग्लासेस जैसे आधुनिक डिवाइस के जरिए परीक्षा केंद्रों पर नकल की संभावना है। इसको रोकने के लिए जैमर लगाने की जरूरत है। इससे इन मेटा ग्लासेस की कनेक्टिविटी को बाधित कर नकल को रोका जा सकेगा।
मेटा ग्लासेस सामान्य नजर या धूप के चश्मे जैसे ही दिखाई देते हैं, लेकिन इनमें कैमरे, माइक्रोफोन, स्पीकर और ब्लूटूथ तकनीक इनबिल्ट होती है।
इसे पहनने वाला अभ्यर्थी बिना मोबाइल हाथ में लिए प्रश्नपत्र की फोटो या वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है। ब्लूटूथ और इंटरनेट के जरिए यह डेटा परीक्षा केंद्र से बाहर भेजा जा सकता है, और वहां से उत्तर भी मंगाए जा सकते हैं।
जैमर लगने से वाई-फाई और ब्लूटूथ कनेक्शन पूरी तरह से कट जाएगा, जिससे डेटा रियल-टाइम में बाहर नहीं भेजा जा सकेगा।
क्या है
लो पावर जैमर (Low Power Jammer) एक ऐसा उपकरण है जो बहुत ही कम दूरी (आमतौर पर कुछ मीटर से लेकर 10-20 मीटर तक) के भीतर रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सिग्नल, जैसे कि मोबाइल नेटवर्क (2G/3G/4G/5G), वाई-फाई (Wi-Fi), ब्लूटूथ या जीपीएस (GPS) को ब्लॉक या बाधित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
यह डिवाइस एक ही फ्रीक्वेंसी पर शोर (Noise) या Interference सिग्नल भेजकर असली सिग्नल को कमजोर कर देता है, जिससे आस-पास के मोबाइल या अन्य गैजेट्स का नेटवर्क गायब हो जाता है।
परीक्षा कक्ष में जैमर लगने से ब्लूटूथ और वाई-फाई कनेक्शन टूट सकता है। इससे चश्मे का मोबाइल से संपर्क कट जाएगा और रिकॉर्ड किया गया डेटा तुरंत बाहर नहीं भेजा जा सकेगा। बोर्ड के मुताबिक जैमर केवल परीक्षा कक्ष में असर करेगा, इसलिए केंद्र के बाहर आम लोगों को परेशानी नहीं होगी।
लेकिन जैमर से चश्मे का कैमरा पूरी तरह बंद नहीं होगा। वह ऑफलाइन वीडियो रिकॉर्ड करके अपनी मेमोरी में सेव रख सकता है। यानी जैमर अकेला पूरा समाधान नहीं है।
बोर्ड के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर अधिकृत रूप से लगाए जाने वाले ये जैमर विशेष रूप से 'लो पावर' क्षमता वाले होंगे। इनकी खासियत यह है कि ये सिर्फ परीक्षा कक्ष (Classroom) की सीमा के भीतर ही रेडियो सिग्नल्स को रोकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि परीक्षा केंद्र के बाहर आसपास रहने वाले आम नागरिकों और राहगीरों के मोबाइल नेटवर्क में किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड पहले से ही फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान के लिए बायोमैट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) शुरू कर चुका है और हर केंद्र पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरों से निगरानी की जा रही है।
"बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर बायोमैट्रिक जांच शुरू कर चुका है और सीसीटीवी कैमरे लगा रहा है। अब लो पावर जैमर लगाने की तैयारी की जा रही है। इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है।"
—आलोक राज , अध्यक्ष, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड
क्या हैं मेटा ग्लासेस और क्यों हैं खतरे की घंटी?
इसे पहनने वाला अभ्यर्थी बिना मोबाइल हाथ में लिए प्रश्नपत्र की फोटो या वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है। ब्लूटूथ और इंटरनेट के जरिए यह डेटा परीक्षा केंद्र से बाहर भेजा जा सकता है, और वहां से उत्तर भी मंगाए जा सकते हैं।
जैमर लगने से वाई-फाई और ब्लूटूथ कनेक्शन पूरी तरह से कट जाएगा, जिससे डेटा रियल-टाइम में बाहर नहीं भेजा जा सकेगा।
क्या है लो पावर जैमर ?
यह डिवाइस एक ही फ्रीक्वेंसी पर शोर (Noise) या Interference सिग्नल भेजकर असली सिग्नल को कमजोर कर देता है, जिससे आस-पास के मोबाइल या अन्य गैजेट्स का नेटवर्क गायब हो जाता है।
परीक्षा कक्ष में जैमर लगने से ब्लूटूथ और वाई-फाई कनेक्शन टूट सकता है। इससे चश्मे का मोबाइल से संपर्क कट जाएगा और रिकॉर्ड किया गया डेटा तुरंत बाहर नहीं भेजा जा सकेगा। बोर्ड के मुताबिक जैमर केवल परीक्षा कक्ष में असर करेगा, इसलिए केंद्र के बाहर आम लोगों को परेशानी नहीं होगी।
लेकिन जैमर से चश्मे का कैमरा पूरी तरह बंद नहीं होगा। वह ऑफलाइन वीडियो रिकॉर्ड करके अपनी मेमोरी में सेव रख सकता है। यानी जैमर अकेला पूरा समाधान नहीं है।
सिर्फ परीक्षा कक्ष में काम करेगा 'लो पावर जैमर'
पारदर्शिता बनाए रखना ही प्राथमिक उद्देश्य
"बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर बायोमैट्रिक जांच शुरू कर चुका है और सीसीटीवी कैमरे लगा रहा है। अब लो पावर जैमर लगाने की तैयारी की जा रही है। इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है।"
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FAQs
- मेटा ग्लासेस क्या हैं और इनमें कौन-सी तकनीकें शामिल हैं?
मेटा ग्लासेस सामान्य नजर या धूप के चश्मे जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन इनमें कैमरे, माइक्रोफोन, स्पीकर और ब्लूटूथ तकनीक इनबिल्ट होती है। - लो पावर जैमर कैसे कार्य करता है और इसका परीक्षा केंद्रों पर क्या उपयोग है?
लो पावर जैमर एक ऐसा उपकरण है जो कुछ मीटर की दूरी में वाई-फाई, मोबाइल नेटवर्क और ब्लूटूथ सिग्नल को बाधित करता है। इसका उपयोग परीक्षा केंद्रों पर इसलिए किया जाएगा ताकि मेटा ग्लासेस द्वारा डाटा को बाहर भेजा न जा सके। - राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड नकल रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड बायोमैट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी निगरानी के साथ-साथ परीक्षा केंद्रों पर लो पावर जैमर लगाने की तैयारी कर रहा है ताकि नकल की घटनाओं को रोका जा सके।
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