छत्तीसगढ़ की थाली के 26 साल, चीला-फरा से फास्ट फूड तक, विकास के साथ बदला छत्तीसगढ़िया जायका
Arun Tiwari | Nov 01, 2026, 11:30 IST
छत्तीसगढ़ के 26 साल: चीला-फरा से पिज्जा-बर्गर तक बदला खानपान का स्वाद और अंदाज
कभी सुबह की शुरुआत बासी भात, चटनी और चाय से होती थी। चीला, फरा और ठेठरी-खुरमी रसोई की पहचान थे। अब उसी छत्तीसगढ़ में पिज्जा, बर्गर, मोमोज और फास्ट फूड भी जगह बना चुके हैं। छत्तीसगढ़ की थाली के 26 साल पर सवाल है कि क्या थाली बदल गई। यह भी देखना जरूरी है कि पारंपरिक स्वाद पीछे छूट रहे हैं या नए रूप में जगह बना रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- शहरों में कैफे, बेकरी और फास्ट फूड की दुकानें बढ़ी हैं।
- ऑनलाइन खाना मंगाने का चलन भी बढ़ा है।
- युवा अब नए-नए स्वाद पसंद कर रहे हैं।
- हालांकि, पारंपरिक भोजन आज भी लोगों की थाली में मौजूद है।
- सवाल है कि नई पीढ़ी पारंपरिक व्यंजन बनाना जानती है या नहीं।
चावल वही, खाने का तरीका कैसे बदला?
चावल से दाल-भात ही नहीं, चीला, फरा और कई पारंपरिक पकवान भी बनते हैं। बोरे बासी भी एक खास उदाहरण है। पके चावल को पानी में रखकर खाने की यह परंपरा गर्मी और ग्रामीण जीवन की स्मृतियों से जुड़ी बताई गई है।
क्या पारंपरिक भोजन सिर्फ अतीत की बात है?
पहले संयुक्त परिवारों में खाना बनाने की जिम्मेदारी कई लोगों में बंटती थी। अब छोटे परिवारों और व्यस्त कामकाजी जीवन में जल्दी बनने वाले व्यंजन, तैयार खाद्य और बाहर से मंगाया खाना कुछ परिवारों के लिए सुविधाजनक बन सकता है।
फास्ट फूड की मौजूदगी और बदलती पसंद
इसके कई कारण है। इनमें शहरीकरण, आय में बदलाव, इंटरनेट से नए व्यंजनों की जानकारी, विज्ञापन और सोशल मीडिया शामिल हैं। साथ ही फास्ट फूड की लोकप्रियता से पारंपरिक भोजन खत्म नहीं हो गया। कई लोग बाहर नए स्वाद चखते हैं और घर में पारंपरिक थाली भी पसंद करते हैं।
क्या अगली पीढ़ी को पारंपरिक व्यंजन बनाना आता है?
हो सकता है उसे स्वाद पसंद हो, पर बनाना न आता हो। दूसरी तरफ कई युवा पारंपरिक व्यंजन नए अंदाज में बनाना सीख रहे हों या सोशल मीडिया पर रेसिपी बांट रहे हों।
व्यंजन की विधि में क्या-क्या शामिल है?
क्या पारंपरिक भोजन कारोबार बन सकता है?
महिला स्व-सहायता समूह और छोटे उद्यमी भी भूमिका निभा सकते हैं।सिर्फ पारंपरिक पहचान से कारोबार नहीं चलेगा। गुणवत्ता, लागत, बाजार तक पहुंच, ग्राहक की पसंद और खाद्य सुरक्षा के नियम भी जरूरी हैं।
पर्यटकों के लिए स्थानीय भोजन का क्या?
स्वाद के साथ सेहत का सवाल
अब आगे क्या?
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