एमपी में गहराया रोजगार संकट, तीन साल में 5374 MSME बंद, 42 हजार नौकरियां गईं
Pawan Modiya | Aug 21, 2026, 17:02 IST
छोटे उद्योग बंद
मध्यप्रदेश में बीते तीन साल में 5374 MSME बंद हुए, 42 हजार से ज्यादा रोजगार खत्म हुआ। कर्ज, बदलती नीति और देरी से न्याय बड़ी वजह। भोपाल की उद्यमी संध्या मिश्रा की कहानी से समझें पूरा मामला।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश में तीन साल में 5374 MSME बंद हुए, 42 हजार से ज्यादा रोजगार गया।
- संध्या मिश्रा जैसी उद्यमी की फैक्ट्री भी विद्युत मंडल की सख्ती से बंद हुई।
- सुप्रीम कोर्ट और कंज्यूमर फोरम ने संध्या के पक्ष में फैसला सुनाया।
- MSME को दिया गया कर्ज बढ़ा, साथ ही बकाया राशि भी बढ़ी।
- सरकार की सब्सिडी योजना के बावजूद उद्योग बंद होने का सिलसिला जारी है।
देश में बीते तीन साल में सबसे ज्यादा एमएसएमई (MSME) 2025-26 में बंद हुए। यह संख्या 62,747 तक पहुंच गई। इससे करीब 3.60 लाख लोगों का रोजगार खत्म हो गया। बंद हुए एमएसएमई में 4.5 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले मध्यप्रदेश की है। यहां तीन साल में 5374 सूक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्योग ठप पड़ गए। इससे 42 हजार से ज्यादा लोगों की रोजी-रोटी छिन गई।
प्रदेश में सबसे ज्यादा एमएसएमई साल 2025-26 में ही बंद हुए हैं। इस साल 2861 उद्योग बंद हुए। इससे 21 हजार से ज्यादा रोजगार खत्म हुए। वहीं 2024-25 में 1962 और 2023-24 में 552 उद्योग बंद हुए हैं। इससे क्रमश: 15,696 और 4,416 लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ।
बंद होने की वजह क्या
धीरे-धीरे कंपनी ने 10 करोड़ रुपए का टर्नओवर हासिल कर लिया। इस फैक्ट्री में करीब 200 लोगों को रोजगार मिला हुआ था। साल 2018 में संध्या को नेशनल वूमेन एम्पावरमेंट अचीवर अवॉर्ड भी मिला। उनकी सफलता की कहानी IIM (Indian Institute Of Management) लखनऊ तक पहुंची। यह कहानी अब वहां के सिलेबस में पढ़ाई जाती है।
इसी साल एक बड़ा झटका लगा। तेज बारिश से फैक्ट्री में पानी भर गया। इससे रखा हुआ सामान खराब हो गया। इस वजह से ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पाए। कंपनी को एक मौका देने के बजाय मध्यप्रदेश विद्युत मंडल ने सख्ती दिखाई। संध्या की फैक्ट्री को 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। साथ ही 40 लाख रुपए की पेनल्टी भी लगा दी गई।
प्रॉपर्टी बेचकर चुकाया कर्ज
साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने विद्युत मंडल की पेनल्टी और ब्लैकलिस्टिंग को गलत ठहराया। इसी साल 7 अगस्त को कंज्यूमर फोरम ने भी फैसला सुनाया। यह फैसला भी संध्या के पक्ष में गया। फोरम ने इंश्योरेंस कंपनी पर भी जुर्माना लगाया। लेकिन न्यायिक जीत से पहले ही संध्या को प्रॉपर्टी बेचनी पड़ी। इसी से उन्होंने अपनी देनदारियां चुकाई थीं।
कर्ज का बढ़ता बोझ
सरकार का सब्सिडी प्रयास
उद्योग बंद होने की वजहें
संध्या मिश्रा जैसी उद्यमी की कहानी बहुत कुछ बताती है। एक गलत फैसला बरसों की मेहनत पर भारी पड़ सकता है। कर्ज, बदलती नीतियां और देरी से मिलने वाला न्याय बड़ी परेशानी हैं। ये छोटे उद्योगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। अगर समय रहते सुधार नहीं हुए तो हालात और बिगड़ सकते हैं। आने वाले सालों में और फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं।
जरूरी FAQ
मध्यप्रदेश में तीन साल में 5374 सूक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) बंद हुए हैं। इससे 42 हजार से ज्यादा लोगों का रोजगार खत्म हुआ। सबसे ज्यादा बंदी साल 2025-26 में हुई, जब 2861 उद्योग बंद हुए।
उद्यमी संध्या मिश्रा का मामला क्या है?
संध्या मिश्रा ने भोपाल में 1989 में ट्रांसफॉर्मर बनाने की फैक्ट्री शुरू की थी। बारिश से नुकसान होने पर विद्युत मंडल ने उन्हें ब्लैकलिस्ट कर पेनल्टी लगा दी। बाद में सुप्रीम कोर्ट और कंज्यूमर फोरम ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन तब तक उन्हें प्रॉपर्टी बेचनी पड़ चुकी थी।
MSME बंद होने की मुख्य वजहें क्या हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक आधे MSME सरकारी लोन नहीं चुका पाते। बाकी उद्योग बदलती नीतियों और सरकारी सप्लाई में लंबे समय तक फंसी सिक्योरिटी राशि से परेशान रहते हैं। हर राज्य में अलग नीति होने से भी दिक्कत बढ़ती है।
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