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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- मध्य प्रदेश सरकार ने 5200 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया।
- कर्ज का भुगतान 4 फरवरी 2033 तक किया जाएगा।
- 2000 करोड़ रुपए का कर्ज 17 साल के लिए लिया गया।
- राज्य का कुल कर्ज 62,300 करोड़ रुपए तक पहुंचा।
- विपक्ष सरकार पर कर्ज लेने का आरोप लगाता है, योजना की कमी की बात करता है।
NEWS IN DETAIL
BHOPAL. मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार के लिए एक और चुनौती सामने आई है। सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में दूसरी बार 5200 करोड़ रुपए का कर्ज लेने का निर्णय लिया है। इस कर्ज का भुगतान 4 फरवरी 2033 तक ब्याज सहित करना होगा। राज्य की बढ़ती आर्थिक मुश्किलें सरकार के लिए एक बड़ी चिंता बनती जा रही हैं।
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नया कर्ज लेने का कारण और विवरण
इस कर्ज का भुगतान 2033 और 2043 तक किया जाएगा। 2000 करोड़ रुपए का कर्ज 17 साल की अवधि के लिए लिया गया है। इसका भुगतान 4 फरवरी 2043 तक किया जाएगा। 2000 करोड़ रुपए की तीसरी किस्त 22 साल के लिए ली गई है, जिसमें ब्याज भी शामिल होगा।
इस कर्ज के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार का कुल कर्ज इस वित्तीय वर्ष में बढ़कर 62,300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इस कर्ज की वजह से राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
पिछले कर्जों का हिसाब
2025-26 के वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश सरकार ने कई बार कर्ज लिया है, और अब तक कर्ज की कुल राशि 62,300 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।
कर्ज लेने के प्रमुख दिनांक:
7 जनवरी 2026 – 400 करोड़
30 दिसंबर 2025 – 3500 करोड़
2 दिसंबर 2025 – 3000 करोड़
11 नवंबर 2025 – 4000 करोड़
28 अक्टूबर 2025 – 5200 करोड़
30 सितंबर 2025 – 3000 करोड़
23 सितंबर 2025 – 3000 करोड़
9 सितंबर 2025 – 4000 करोड़
26 अगस्त 2025 – 4800 करोड़
5 अगस्त 2025 – 4000 करोड़
30 जुलाई 2025 – 4300 करोड़
8 जुलाई 2025 – 4800 करोड़
4 जून 2025 – 4500 करोड़
7 मई 2025 – 5000 करोड़
कर्ज की बढ़ती मात्रा से राज्य की सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि सरकार के पास विकास कार्यों की कोई ठोस योजना नहीं है, जिसके कारण बार-बार कर्ज लेना पड़ रहा है।
विपक्ष का आरोप: सही योजना का अभाव
कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने मोहन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में विकास कार्यों की सही योजना का अभाव है। इस कारण सरकार को लगातार कर्ज लेने की मजबूरी आ रही है। विपक्ष ने यह भी कहा कि कर्ज के बढ़ने से राज्य की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा, और भविष्य में इसका बोझ बढ़ सकता है।
क्या कर्ज से निकल पाएगी मोहन सरकार?
राज्य की बढ़ती कर्ज की समस्या से निपटना मोहन यादव सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अगर सरकार इस कर्ज के बोझ को कम करने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं करती है, तो राज्य की आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
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एमपी सरकार का नया कर्ज
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