HC में मुंशी ने किया आवेदन तामीली में फर्जीवाड़ा, मामला पति-पत्नी के तलाक का
Neel Tiwari | Aug 19, 2026, 09:30 IST
Photograph: (THESOOTR)
MP हाईकोर्ट में एक मुंशी के फर्जी सिग्नेचर का मामला सामने आया। कोर्ट की पूछताछ में उसकी लिखावट से सच सामने आया। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला माना। बार काउंसिल को भविष्य में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
समझें क्या है पूरा मामला...
- MP हाईकोर्ट में एक आवेदन पर फर्जी साइन मिले।
- सिग्नेचर दूसरे पक्ष के वकील के नाम से किए गए थे।
- कोर्ट ने रिकॉर्ड से असली सिग्नेचर का मिलान किया।
- पूछताछ में मुंशी ने अपनी लिखावट स्वीकार कर ली।
- कोर्ट ने भविष्य में ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह ने की। कोर्ट ने शिकायत मिलने के बाद रिकॉर्ड की जांच शुरू की। वकील ने कहा कि उसे आवेदन की कॉपी नहीं मिली थी। इसके बाद आवेदन के सिग्नेचर की जांच की गई।
वकालतनामे पर मौजूद असली सिग्नेचर से मिलान किया गया। दोनों सिग्नेचर अलग पाए गए। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।
मुंशी से सवाल हुए तो बदल गई पूरी कहानी
शुरुआत में मुंशी ने इस बारे में जानकारी होने से इनकार किया। उसने कहा कि वकील के साथ तीन क्लर्क काम करते हैं। इसलिए उसे पता नहीं था कि नोटिस किसने दिया। यह तामील 4 जुलाई 2026 को होने की बात थी। इसके बाद कोर्ट ने आवेदन की लिखावट पर ध्यान दिया।
कोर्ट ने मुंशी से बाएं हिस्से की लिखावट देखने को कहा। लिखावट देखते ही मुंशी ने अपनी बात बदल दी। उसने माना कि वह लिखावट उसी की थी। इसके बाद पूरे मामले की तस्वीर साफ हो गई।
कोर्ट ने फर्जी तामील को गंभीर मामला माना
कोर्ट ने इसे सामान्य गलती नहीं माना। बेंच ने इस मामले पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसी हरकत से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे अदालत के रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठता है। इसी वजह से कोर्ट ने भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी दी। अदालत ने वकीलों और मुंशियों को सावधान रहने को कहा।
कोर्ट मुंशी की उम्र देखकर FIR से मिली राहत
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ऐसी गलती को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अदालत में जमा हर दस्तावेज की जिम्मेदारी तय हो सकती है। गलत जानकारी या गलत तामील पर कानूनी कार्रवाई संभव है। इस मामले में उम्र के कारण मुंशी को राहत मिली। लेकिन कोर्ट ने भविष्य के लिए स्पष्ट संदेश दिया।
बार काउंसिल और बार एसोसिएशन को भेजा आदेश
कोर्ट ने भविष्य में ऐसे मामलों पर सख्त कदम उठाने को कहा। ऐसे मामलों में मुंशी के साथ वकील की भूमिका भी देखी जाएगी। कोर्ट ने FIR जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इससे पंजीकृत मुंशियों की जिम्मेदारी भी साफ हो गई। अदालत में दस्तावेज जमा करना गंभीर जिम्मेदारी है। किसी भी गलत जानकारी का असर पूरे मामले पर पड़ सकता है।
फर्जी सिग्नेचर का मामला किस केस से जुड़ा है
शादी हिंदू रीति रिवाज से होने की जानकारी दी गई। शादी के बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ। बाद में पति ने तलाक के लिए अदालत का रुख किया। उसने पत्नी पर कई आरोप लगाए। पत्नी ने इन आरोपों का अलग पक्ष रखा। इसी वैवाहिक विवाद से जुड़ी अपील हाईकोर्ट में चल रही है।
पति ने तलाक के लिए क्या आरोप लगाए
पति के अनुसार पत्नी इसके बाद वापस नहीं आई। उसने 50 हजार रुपये मांगने का आरोप भी लगाया। मांग पूरी नहीं होने पर विवाद बढ़ने की बात कही गई। इसके बाद पति ने तलाक की याचिका दाखिल की। पति ने दहेज मामले को भी इसी विवाद से जोड़ा। उसने पुलिस शिकायत को बाद में उठाया गया कदम बताया।
दमोह की अदालत ने तलाक की याचिका खारिज की
अदालत ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी।
10 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट में अपील दायर हुई। अपील हिंदू विवाह कानून की धारा 28 से जुड़ी है। इसमें फैमिली कोर्ट कानून की धारा 19 का भी सहारा लिया गया।
हाईकोर्ट में पति ने किन बातों पर जोर दिया
पति ने पुलिस शिकायत की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया। उसके अनुसार शिकायत तलाक मामले के बाद दर्ज हुई। पति ने इसे बाद में उठाया गया कदम बताया। उसने निचला फैसला रद्द करने की मांग की। उसने अपने पक्ष में तलाक की डिक्री देने की मांग की।
फर्जी सिग्नेचर ने सुनवाई को नया मोड़ दिया
मुंशी की लिखावट ने मामले में अहम मोड़ ला दिया। पहले दी गई जानकारी और बाद की बात अलग थी। कोर्ट के सामने सच स्वीकार करने के बाद स्थिति साफ हुई। कम उम्र के कारण मुंशी को तत्काल राहत मिली। फिर भी कोर्ट ने भविष्य के लिए कड़ा संदेश दिया। बार काउंसिल को भी आदेश की प्रति भेजी गई।
हाईकोर्ट ने दी साफ चेतावनी
फर्जी सिग्नेचर से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस मामले में कोर्ट ने समय रहते गड़बड़ी पकड़ ली। वैवाहिक अपील का अंतिम फैसला अभी अलग मुद्दा है।
फर्जी सिग्नेचर वाले मामले ने सुनवाई को नया मोड़ दिया। कोर्ट की चेतावनी ने वकीलों और मुंशियों को संदेश दिया। अदालत की प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी भारी पड़ सकती है।
ये खबरें भी पढ़ें...
विदेशी फंड पर आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, जबलपुर समेत कई शहरों में रेड
जबलपुर हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष बने मृगेंद्र सिंह, असीम त्रिवेदी सचिव पद पर काबिज
प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई फिर टली, अब 26 अगस्त को होगी
भर्ती के बीच बदला नियम, हाईकोर्ट ने मेरिट लिस्ट और नियुक्तियों पर लगाई रोक
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj