एमपी हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी, हर पांचवां पद खाली!

Amresh Kushwaha | Jan 31, 2026, 13:59 IST
mp high court judges vacancies 2026
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों का हर पांचवां पद खाली है। यह खुलासा राज्यसभा में आरजेडी के सांसद मनोज झा के सवालों के बाद हुआ है। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने जानकारी दी है।

देशभर में जजों की कमी की समस्या एक बार फिर से सामने आई है। राज्यसभा में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 27 जनवरी 2026 तक सुप्रीम कोर्ट और 25 हाईकोर्ट में कुल 1122 स्वीकृत पदों में से 308 पद खाली थे।



इसका मतलब है कि करीब 27.4 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इस आंकड़े से साफ है कि देशभर में न्यायपालिका की स्थिति चिंताजनक है। इसकी सबसे बड़ी झलक मध्यप्रदेश में देखी जा सकती है।



एमपी हाईकोर्ट में खाली पदों की स्थिति

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 53 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 42 जज कार्यरत हैं, जबकि 11 पद खाली पड़े हैं। इसका मतलब यह है कि राज्य के हाईकोर्ट में लगभग 20.75 प्रतिशत पद रिक्त हैं।



यह स्थिति उस समय सामने आई है, जब प्रदेश में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बढ़ते मुकदमों के कारण जजों पर काम बोझ भी ज्यादा है। साथ ही, न्यायिक प्रक्रिया की गति धीमी होती जा रही है।



मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 20% पद रिक्त
विवरणसंख्या / प्रतिशत
स्वीकृत जजों के पद53
कार्यरत जज42
रिक्त पद11
रिक्ति प्रतिशत20.75%
नोट: आंकड़े 27 जनवरी 2026 तक के हैं।

जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में भी जजों की कमी

केंद्र सरकार की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों की स्थिति भी कोई बेहतर नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, यहां कुल 1639 न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं।



इनमें से 803 जज अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से हैं। यह कुल कार्यरत जजों का 48.99 प्रतिशत है। यानी मध्य प्रदेश की जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में 48.99 प्रतिशत जज SC, ST और OBC से आते हैं, जबकि बाकी जज अन्य वर्गों से हैं।



राज्य में जजों की कमी का असर

मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में न्यायिक अधिकारियों की कमी बढ़ती जा रही है। इससे निचली अदालतों पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, सरकार ने जिला वार रिक्त पदों का कोई विवरण संसद में नहीं दिया है। इसका मतलब है कि राज्य में निचली अदालतों में जजों की कमी का सही आकलन अभी नहीं हो पाया है।



देशभर में जजों की कमी की स्थिति

मध्य प्रदेश अकेला राज्य नहीं है, जहां जजों की कमी है। देशभर के कई हाईकोर्ट में पद खाली हैं। उदाहरण के लिए, बॉम्बे हाईकोर्ट में 94 में से 14 पद खाली हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में 60 में से 16 पद खाली हैं। मद्रास हाईकोर्ट में 75 में से 22 पद रिक्त हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी 34 में से 1 पद खाली हैं।



इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा खाली पद

आंकड़ों के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की सबसे बड़ी कमी है। यहां 160 स्वीकृत पदों में से 50 पद खाली हैं। इसका मतलब है कि 31.25% पद रिक्त हैं।



कलकत्ता हाईकोर्ट में भी 72 में से 29 पद खाली हैं, जो 40.3% है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और झारखंड हाईकोर्ट में भी स्थिति गंभीर है। यहां 44 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली हैं।



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