फसल खराब हुई तो तुरंत मिलेगा मुआवजा, किसान नहीं करेगा सफर: हाईकोर्ट

फसल बीमा योजना में रजिस्ट्रेशन के बावजूद मुआवजे के लिए भटक रहे किसानों को राहत मिली है। जबलपुर हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि गलती चाहे जिसकी हो, भुगतान पहले होगा।

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Neel Tiwari
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News in Short

  • 2017 में अतिवृष्टि से सागर जिले के किसानों की फसल हुई थी बर्बाद।
  • बीमा कंपनी और बैंक एक-दूसरे पर डालते रहे जिम्मेदारी।
  • स्टेट कंज्यूमर फोरम ने 100% भुगतान का दिया था आदेश।
  • नेशनल फोरम ने 50-50 भुगतान तय किया।
  • हाईकोर्ट ने कहा किसान को तुरंत मुआवजा मिले, बहस बाद में।

News in details

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रजिस्ट्रेशन के बावजूद मुआवजे के लिए वर्षों से भटक रहे किसानों को आखिरकार राहत मिली है। बैंक और बीमा कंपनी की आपसी जिम्मेदारी तय न होने की कीमत किसान नहीं चुकाएगा। हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि गलती चाहे जिसकी हो, भुगतान पहले होगा।

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गलती की कीमत नहीं चुकाएगा किसान 

जबलपुर हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि बैंक और बीमा कंपनी की लापरवाही का खामियाजा किसान नहीं भुगतेगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे पहले मुआवजा दिया जाए, जिम्मेदारी बाद में तय होगी।

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2026 तक मुआवजे का इंतजार

सागर जिले की मालथौन तहसील के दिनेश कुमार मिश्रा सहित अन्य किसानों की फसल वर्ष 2017 में अतिवृष्टि से पूरी तरह नष्ट हो गई थी। किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल का बीमा कराया था। इसके बावजूद जब नुकसान की भरपाई की बारी आई, तो उन्हें सिर्फ आश्वासन मिले, लेकिन मुआवजा नहीं मिला।

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बैंक बनाम बीमा कंपनी

बीमा कंपनी ने दावा किया कि बैंक ने समय पर प्रीमियम और फसल की जानकारी नहीं दी। इसलिए भुगतान संभव नहीं है। वहीं बैंक अपनी किसी भी गलती को स्वीकारने को तैयार नहीं हुआ। इस आपसी टकराव में किसान सालों तक दर-दर भटकता रहा।

कंज्यूमर फोरम से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

किसानों ने स्टेट कंज्यूमर रिड्रेसल फोरम का दरवाजा खटखटाया, जहां बीमा कंपनी को 100% मुआवजा देने का आदेश हुआ। इसके खिलाफ बीमा कंपनी ने नेशनल कंज्यूमर फोरम में अपील की, जहां 12 जून 2024 को आदेश बदला गया और भुगतान 50% बैंक व 50% बीमा कंपनी पर डाल दिया गया।

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हाईकोर्ट में फिर टालमटोल, लेकिन इस बार नहीं चली दलील

बीमा कंपनी ने नेशनल फोरम के आदेश को चुनौती दी। उसने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। कंपनी ने पूरी जिम्मेदारी बैंक पर डालने की मांग की। 30 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कोई दलील स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने स्थगन आदेश देने से इनकार कर दिया।

कोर्ट का स्पष्ट आदेश: तुरंत भुगतान

हाईकोर्ट ने कहा कि यह बेहद गंभीर स्थिति है कि 2017 में नुकसान झेल चुके किसान आज तक मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि बीमा कंपनी को अपने हिस्से का 50% भुगतान तुरंत करना होगा। यह भी स्पष्ट किया गया कि भुगतान के बाद यह तय किया जाएगा कि अंतिम जिम्मेदारी किसकी है।

क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भारत सरकार की प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान पर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।

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योजना का उद्देश्य...

बुआई से कटाई तक प्राकृतिक आपदाओं से फसलों की सुरक्षा।
असमय बारिश, बाढ़, ओलावृष्टि, कीट–रोग से हुए नुकसान का मुआवजा।

कवर की जाने वाली फसलें...

इस योजना में खाद्यान्न, दालें, तिलहन और कपास, गन्ना, फल-सब्जी जैसी वाणिज्यिक फसलें भी कवर होती हैं।
प्रीमियम दरें (2026)
खरीफ: 2%
रबी: 1.5%
वाणिज्यिक/बागवानी: 5%

नई सुविधाएं...

जंगली जानवरों से नुकसान भी शामिल।
80% क्लेम 30 दिन में निपटाने का लक्ष्य।
आवेदन की प्रक्रिया।

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