एमपी में सड़क हादसे में Gen-Z सबसे ज्यादा शिकार, घायलों को नहीं मिला मुफ्त इलाज!
Aman Vaishnav | Aug 27, 2026, 09:53 IST
एमपी में सड़क हादसे
मध्य प्रदेश के हाईवे युवाओं के लिए मौत का जाल बन रहे हैं। हाईवे पर तेज रफ्तार के शौकीन 14 से 29 साल के Gen-Z युवा सबसे ज्यादा हादसों का शिकार हो रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के हाईवे युवाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।
- यहां सड़क हादसों में सबसे ज्यादा जान युवा वर्ग की जा रही है।
- सरकारी आंकड़ों में एक चौंकाने वाला सच सामने आया है।
- राज्य में 19 फीसदी घायलों को गोल्डन आवर में मुफ्त इलाज नहीं मिल पाया।
- पुलिस की देरी की वजह से 336 पीड़ित पीएम-राहत योजना के फायदे से वंचित रह गए।
सरकार ने पीड़ितों की मदद के लिए एक खास योजना शुरू की थी। वहीं प्रशासनिक लापरवाही के चलते इसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा।
गोल्डन आवर में लापरवाही
पीएम-राहत योजना के तहत मुफ्त कैशलेस इलाज तभी मिलता है, जब स्थानीय पुलिस 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट ई-डीएआर पोर्टल पर अपलोड करे।
मध्य प्रदेश पुलिस समय पर यह रिपोर्ट अपलोड नहीं कर सकी। इस वजह से 336 मामले सीधे योजना से बाहर हो गए। यह कुल मामलों का करीब 19 फीसदी है। इन पीड़ितों को अपनी जेब से इलाज का खर्च उठाना पड़ा।
यह आंकड़ा दिखाता है कि योजना अच्छी होने के बावजूद जमीनी अमल में कमी है। एक तरफ सरकार पीड़ितों की मदद के लिए पैसा तैयार रखती है। दूसरी तरफ पुलिस महकमे की सुस्ती इस मदद के रास्ते में रोड़ा बन जाती है।
मुफ्त इलाज में एमपी दूसरे नंबर पर
वहां 7 हजार 36 लोगों को योजना का लाभ मिला। मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जहां 6 हजार 761 पीड़ितों को मुफ्त इलाज मिल सका।
यानी एक तरफ पुलिस की सुस्ती से सैकड़ों लोग योजना से बाहर हुए। दूसरी तरफ राज्य के स्वास्थ्य और परिवहन तंत्र ने बाकी हजारों पीड़ितों तक मदद पहुंचाई। यह आंकड़ा राज्य की क्षमता और उसकी कमी, दोनों को एक साथ सामने रखता है।
हाईवे पर युवाओं की मौतें
अगर इसमें 18 वर्ष से कम उम्र के किशोर और 25 से 29 वर्ष के युवा भी जोड़ दिए जाएं, तो यह आंकड़ा कुल मौतों का करीब 41 फीसदी हो जाता है।
यानी करीब 700 मौतें युवा वर्ग की हैं। यह आंकड़ा साफ बताता है कि हाईवे पर सबसे ज्यादा खतरा युवाओं को ही है।
राज्य सरकार के पिछले वर्षों के आंकड़े भी यही रुझान दिखाते हैं। 2022 से 2024 के बीच हर उम्र वर्ग में हादसों की संख्या ज्यादा रही।
18 से 25 वर्ष के वर्ग में 2022 में 3 हजार 43, 2023 में 3 हजार 242 और 2024 में 3 हजार 270 मौतें दर्ज हुईं। 25 से 35 वर्ष के वर्ग में यह संख्या इससे भी अधिक रही। इससे पता चलता है कि युवा और मध्य आयु वर्ग हाईवे हादसों में सबसे ज्यादा प्रभावित होता आया है।
पीएम-राहत योजना क्या है
यह योजना मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 162 के तहत काम करती है। इसका मकसद है कि हादसे के तुरंत बाद पीड़ित को पैसों की चिंता किए बिना इलाज मिल सके।
योजना के फायदे
यह सुविधा हादसे की तारीख से 7 दिन तक वैध रहती है। इसका मकसद गोल्डन आवर में ही मरीज की जान बचाना है। यह लाभ मोटर वाहन हादसे में घायल होने वाले हर नागरिक को मिलता है, चाहे वह किसी भी राज्य का हो।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी योजनाओं की सफलता पूरी तरह पुलिस और अस्पताल प्रशासन के आपसी तालमेल पर निर्भर करती है।
अगर रिपोर्ट समय पर अपलोड नहीं होगी तो सबसे अच्छी योजना का फायदा भी पीड़ित तक नहीं पहुंच पाएगा। मध्य प्रदेश के मामले में यही कमी सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
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