जंगल सफारी से आगे बढ़ेगा एमपी टूरिज्म: बांधवगढ़ से कान्हा तक बदलेगी तस्वीर, 520 करोड़ से बनेंगे लग्जरी रिजॉर्ट

Arohi Raj | Sootr Creatives | Oct 07, 2026, 14:45 IST
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मध्य प्रदेश के तीन प्रमुख वाइल्डलाइफ क्षेत्रों में लीला पैलेसेस, होटल एंड रिसॉर्ट्स निवेस करेगी।
मध्य प्रदेश के तीन प्रमुख वाइल्डलाइफ क्षेत्रों में लीला पैलेसेस, होटल एंड रिसॉर्ट्स निवेस करेगी।

एमपी का जंगल अब सिर्फ सफारी तक सीमित नहीं रहेगा। यहां लक्जरी टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। बता दें बांधवगढ़, कान्हा और सतपुड़ा में बड़े निवेश की योजना है। लीला इन तीनों इलाकों में 520 करोड़ का इंवेस्टमेंट करेगी। इस निवेश से तीन नए लक्जरी रिजॉर्ट तैयार किए जाएंगे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • लीला होटल्स एमपी के तीन टाइगर रिजर्व में निवेश करेगी।
  • बांधवगढ़, कान्हा और सतपुड़ा में कुल 520 करोड़ रुपए के निवेश।
  • बांधवगढ़ में निर्माण जनवरी 2026 से शुरू हो गया।
  • दिसंबर 2027 तक बांधवगढ़ रिजॉर्ट शुरू करने का लक्ष्य है।
  • कान्हा और सतपुड़ा में जमीन अधिग्रहण अभी जारी है।

लक्जरी टूरिज्म एमपी में लीला की एंट्री

मध्यप्रदेश के जंगल अब सिर्फ बाघ देखने के लिए मशहूर नहीं रहेंगे। यह लक्जरी टूरिज्म एमपी का नया बाजार बनने जा रहे हैं। लीला पैलेसेस, होटल एंड रिसॉर्ट्स पहली बार एमपी के वाइल्डलाइफ सेक्टर में उतर रहा है। इस ब्रांड ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, कान्हा नेशनल पार्क होटल और सतपुड़ा को चुना है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कब शुरू होगा काम

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कंपनी 190 करोड़ रुपए खर्च करेगी। यहां होटल के लिए 40 एकड़ जमीन चुनी गई है। इस प्रोजेक्ट क् लिए जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) और मंजूरी का काम पूरा हो चुका है। इसका निर्माण कार्य जनवरी 2026 से चल रहा है।

एमपी पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, दिसंबर 2027 तक रिसॉर्ट शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी दो साल के भीतर बांधवगढ़ में नया रिजॉर्ट खुल सकता है।

कान्हा नेशनल पार्क और सतपुड़ा रिसॉर्ट कब बनेगा

कान्हा नेशनल पार्क में होटल बनाने के लिए 160 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यहां 25 से 35 हेक्टेयर जमीन देने का प्रस्ताव है। सतपुड़ा और माढ़ई क्षेत्र में भी 170 करोड़ रुपए का निवेश होगा। यहां के लिए भी 40 एकड़ जमीन तय हुई है। इन दोनों जगहों पर अभी जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है। अभी सरकारी जमीन मिलने और जरूरी मंजूरी का इंतजार है।

एमपी पर्यटन बोर्ड के प्रस्ताव के मुताबिक, यहां निर्माण कार्य दिसंबर 2027 में शुरू हो सकता है। मार्च 2029 तक दोनों प्रोजेक्ट पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।

वाइल्डलाइफ टूरिज्म में बड़े निवेश की तैयारी

एमपी पर्यटन बोर्ड की एमडी के मुताबिक, हर दो विदेशी पर्यटकों में से करीब एक वाइल्डलाइफ देखने आता है। उनके मुताबिक, लीला जैसे ब्रांड ने इस बाजार को संगठित किया है। यह टाइगर रिजर्व में होटल निवेश को बढ़ावा देने वाला कदम है।

विदेशी पर्यटक पर फोकस

विदेशी पर्यटक एमपी में औसतन 7 से 15 दिन रुकते हैं। एशियाटिक चीता रिजर्व मध्यप्रदेश चैंबर के अध्यक्ष के मुताबिक, विदेशी पर्यटकों की यह खासियत है। अभी ग्वालियर, ओरछा और खजुराहो प्रमुख पर्यटन सर्किट माने जाते हैं। अब इन सर्किट में जंगल के इलाकों को जोड़ने की तैयारी है।

करोड़ों के नए बंगलों पर भी मंत्रियों को पुराने सरकारी आवासों का मोह, स्पीकर समेत चार माननीयों के पास दो-दो बंगले | Ministers' Attachment to Old Government Quarters Despite Crores in New Bungalows, Speaker and Four Dignitaries Hold Two Bungalows Each
करोड़ों के आलीशान बंगले मिलने पर भी मंत्रियों को पुरानों का मोह, स्पीकर समेत चार माननीयों पर दो सरकारी आवास
06 Oct 2026 ,
By Arun Tiwari
<b>Raipur.</b> छत्तीसगढ़ के मंत्रियों को नवा रायपुर में करोड़ों के आलीशान बंगले मिले हुए हैं। मंत्री नए बंगलों में शिफ्ट भी कर गए हैं। कुछ मंत्री ऐसे हैं जिनके पास अभी भी दो सरकारी आवास हैं। इन मंत्रियों की मै बंगले में शिफ्टिंग के बाद भी इनसे पुरानों का मोह नहीं छूट रहा है। स्पीकर समेत चार मंत्री ऐसे हैं जिनके पास रायपुर में बने पुराने बंगले भी हैं।
<b>Raipur.</b> छत्तीसगढ़ के मंत्रियों को नवा रायपुर में करोड़ों के आलीशान बंगले मिले हुए हैं। मंत्री नए बंगलों में शिफ्ट भी कर गए हैं। कुछ मंत्री ऐसे हैं जिनके पास अभी भी दो सरकारी आवास हैं। इन मंत्रियों की मै बंगले में शिफ्टिंग के बाद भी इनसे पुरानों का मोह नहीं छूट रहा है। स्पीकर समेत चार मंत्री ऐसे हैं जिनके पास रायपुर में बने पुराने बंगले भी हैं।

जंगल से बाहर भी घूम सकेंगे पर्यटक

एमपी सिर्फ टाइगर सफारी तक सीमित नहीं है। यहां ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन भी मजबूत है। ग्वालियर, ओरछा और खजुराहो इसके प्रमुख उदाहरण हैं। अब जंगल पर्यटन को इन सर्किट से जोड़ने की कोशिश है। ऐसे में पर्यटक एक यात्रा में कई जगह घूम सकेंगे। सफारी के साथ इतिहास और संस्कृति भी देख सकेंगे।

कनेक्टिविटी और नई सुविधाओं पर भी जोर

एमपी पर्यटन बोर्ड कनेक्टिविटी पर भी काम कर रहा है। वाइल्डलाइफ जगहों तक पहुंच आसान बनाने पर जोर है। बहुभाषी डिजिटल सुविधाओं (Multilingual digital features) को भी बढ़ाने की तैयारी है। इससे विदेशी पर्यटकों को यात्रा में मदद मिल सकती है।

मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट में भी निवेश पर जोर है। राज्य ने 2025 में 21.05 करोड़ पर्यटक दर्ज किए हैं। ट्रैवल मार्ट में एक हजार 100 करोड़ से ज्यादा निवेश प्रस्तावों की बात है। यह आंकड़ा लीला के 520 करोड़ निवेश से अलग है।

विकास के साथ संरक्षण भी जरूरी

जंगल के पास पर्यटन बढ़ने के अपने फायदे हैं। इससे रोजगार और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। लेकिन निर्माण के साथ पर्यावरण का ध्यान रखना जरूरी है। टाइगर रिजर्व में विकास नियमों के तहत ही होना चाहिए। पर्यटन और वाइल्ड लाइफ रिजर्व के बीच संतुलन जरूरी रहेगा।

अगर तीनों प्रोजेक्ट तय योजना के अनुसार आगे बढ़ते हैं, तो एमपी के जंगलों में लक्जरी स्टे का विकल्प बढ़ेगा। पर्यटकों को सफारी के साथ बेहतर ठहराव मिल सकता है। यही इस पूरे निवेश की सबसे खास बात होगी।

FAQs

  1. लीला होटल्स ने मध्य प्रदेश के कौन से टाइगर रिजर्व में निवेश करने की योजना बनाई है?
    लीला होटल्स ने मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, कान्हा और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में कुल 520 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बनाई है।
  2. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लीला होटल का निर्माण कब शुरू होगा?
    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लीला होटल का निर्माण जनवरी 2026 से शुरू होगा और दिसंबर 2027 तक रिसॉर्ट का उद्घाटन किया जाने का लक्ष्य रखा गया है।
  3. कान्हा और सतपुड़ा में रिसॉर्ट के लिए कितनी राशि का निवेश किया जाएगा और उनकी स्थिति क्या है?
    कान्हा और सतपुड़ा में 160 करोड़ रुपए और 170 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा, लेकिन अभी दोनों स्थानों पर जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है। इन परियोजनाओं का निर्माण दिसंबर 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।
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