/sootr/media/media_files/2026/02/08/liquor-will-become-expensive-in-mp-governments-new-plan-to-reduce-debt-burden-2026-02-08-16-02-31.jpg)
Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- मध्य प्रदेश सरकार शराब की कीमतों में बढ़ोतरी करने की तैयारी में है।
- केंद्र सरकार ने TCS दर को 1% से बढ़ाकर 2% किया, कीमतें बढ़ सकती हैं।
- शराब ठेकेदारों की मोनोपॉली को खत्म करने के लिए नए नियम लागू किए जाएंगे।
- राज्य को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी में कमी, वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
- 2026-27 के लिए 18,000 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य तय किया गया है।
NEWS IN DETAIL
मध्य प्रदेश सरकार इस समय गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है। इसका मुख्य कारण राज्य पर बढ़ता कर्ज और केंद्रीय करों में कमी है। इस संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने अपनी एक्साइज पॉलिसी 2026-27 में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है।
इस नई नीति के लागू होते ही शराब की बोतलें महंगी होने वाली हैं। करीब 1300 रुपए वाली बोतल पर 50 रुपए तक सीधे बढ़ सकते हैं। सरकार का लक्ष्य इस बार आबकारी से 18 हजार करोड़ रुपए वसूलने का है। यह पिछले साल के मुकाबले दो हजार करोड़ रुपए ज्यादा का बड़ा टारगेट है। सुरा प्रेमियों की जेब पर अब सीधा बोझ पड़ने वाला है।
यह खबरें भी पढ़ें..
AI और सैटेलाइट से तय होंगे मध्यप्रदेश में जमीन के नए रेट्स, 1 अप्रेल से लागू होगी नई गाइडलाइन
भोपाल में लव जिहाद का खुलासा: राजा निकला आवेश खान, मोबाइल में मिले 40 अश्लील वीडियो
कर्ज और वित्तीय संकट का असर
मध्य प्रदेश पर वर्तमान में 4.84 लाख करोड़ का कर्ज है। जिसकी भरपाई के लिए सरकार शराब की कीमतों में बढ़ोतरी करने जा रही है। सरकार के राजस्व में नुकसान हो रहा है। इसकी पहली वजह है केंद्र सरकार द्वारा TCS की दरों में की गई बढ़ोतरी। बजट 2026-27 में शराब पर लगने वाला टैक्स 1% से बढ़ाकर 2% किया गया।
दूसरा बड़ा कारण केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी घटना है। मप्र की हिस्सेदारी 7.86% से घटाकर अब केवल 7.34% ही रह गई है। इससे राज्य को सालाना करीब 7 हजार 700 करोड़ रुपए का बड़ा नुकसान होने वाला है। तीसरी वजह है प्रदेश पर 4.84 लाख करोड़ का भारी कर्ज। लाड़ली बहना योजना जैसी फ्रीबीज योजनाओं को चलाने के लिए सरकार को मोटा पैसा चाहिए। इसीलिए सरकार अब शराब ठेकों से ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू जुटाना चाहती है।
नई नीति के प्रमुख बदलाव
ठेकेदारों की मोनोपॉली खत्म करना
नई नीति का सबसे बड़ा उद्देश्य शराब ठेकेदारों के एकाधिकार को खत्म करना है। इससे पहले, बड़े ठेकेदारों की तरफ से कई जिलों में शराब की कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी की जा रही थी, जिससे ग्राहकों को परेशानी हो रही थी।
पारदर्शिता लाना
नई नीति में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया जाएगा। इससे सरकार और शराब ठेकेदारों के बीच धोखाधड़ी की घटनाओं पर रोक लगेगी। ई-चालान और ई-बैंक गारंटी को अनिवार्य किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सके।
क्या है उत्तर प्रदेश मॉडल और कंपोजिट दुकानें
मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले साल यूपी की तर्ज पर कंपोजिट दुकानें शुरू की थीं। इन दुकानों पर देसी और अंग्रेजी शराब एक साथ बेची जाती है। शुरुआती आंकड़ों के हिसाब से यह प्रयोग सरकार के लिए काफी सफल रहा है। इससे न केवल राजस्व बढ़ा है, बल्कि ग्राहकों को भी सहूलियत हुई है। नई आबकारी नीति में इन दुकानों की वर्किंग की फिर से समीक्षा होगी। अगर सब ठीक रहा तो इन दुकानों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। सरकार का पूरा जोर अब केवल वसूली और सिस्टम सुधारने पर है।
यह खबरें भी पढ़ें..
वर्मा के बयान पर जीतू का पलटवार, बोले- पूरा प्रदेश भ्रष्टाचार की चपेट में
बोल हरि बोल: साहब की मौज पर आयोग ने लगाया ब्रेक, दो मैडमों में कोल्डवॉर और वो खाकी वाले साहब!
मुख्यमंत्री की मंजूरी का इंतजार
अब तक यह नीति मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पास विचाराधीन है। मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद इसे कैबिनेट में भेजा जाएगा। यदि कैबिनेट से मंजूरी मिल जाती है, तो यह नीति 2026-27 के वित्तीय वर्ष में लागू की जाएगी। राज्य सरकार का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में 18 हजार करोड़ रुपए का राजस्व जुटाना है, जो पिछले वर्ष से दो हजार करोड़ रुपए अधिक है।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us