NCRB Report: MP में हर दिन 42 लोग दे रहे जान, सुसाइड में छात्र-महिलाएं आगे

Kaushiki | Jun 09, 2026, 11:46 IST
MP Mental Health Policy
मध्य प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य नीति न होने से सुसाइड के मामले बढ़ रहे हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक एमपी सुसाइड के मामलों में देश में तीसरे नंबर पर है। यहां हर दिन 42 लोग अपनी जान दे रहे हैं, जिनमें छात्र और हाउसवाइफ सबसे आगे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में अब तक राज्य मानसिक स्वास्थ्य नीति लागू नहीं हो पाई है।
  • एनसीआरबी की नई रिपोर्ट के अनुसार मप्र सुसाइड के मामलों में तीसरे स्थान पर है।
  • प्रदेश में हर दिन औसतन 42 लोग मानसिक तनाव के कारण दम तोड़ रहे हैं।
  • छात्र, गृहिणी और किसानों की खुदकुशी के मामले में एमपी टॉप राज्यों में शामिल है।
  • इंदौर और भोपाल शहर में सुसाइड रेट देश के अन्य शहरों से काफी ज्यादा है।

एमपी में क्यों बढ़ रहे हैं सुसाइड के मामले

NCRB Report: मध्य प्रदेश से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की रिपोर्ट डराने वाली है। प्रदेश में मानसिक तनाव के कारण लोग अपनी जान दे रहे हैं।



साल 2024 में राज्य के अंदर 15 हजार 491 लोगों ने सुसाइड किया। आंकड़ों के लिहाज से महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और सोचने पर मजबूर करती है।



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क्यों बढ़ रहा है मानसिक तनाव

पढ़ाई और करियर का दबाव युवाओं पर भारी पड़ रहा है। देश के कुल छात्र सुसाइड मामलों में एमपी की हिस्सेदारी 10 फीसदी है। नीट पेपर लीक और सीबीएसई के नतीजों ने तनाव और बढ़ा दिया है।



हैरानी की बात है कि लड़कियां इस तनाव को ज्यादा झेल रही हैं। साल 2024 में 716 छात्रों और 731 छात्राओं ने मौत को गले लगाया। गृहिणियां भी इस मामले में बहुत आगे चल रही हैं।



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इंदौर-भोपाल में सुसाइड रेट बढ़ने का कारण

मध्य प्रदेश के बड़े शहरों का हाल भी ठीक नहीं है। इंदौर देश में सबसे ज्यादा सुसाइड रेट वाला चौथा शहर बन गया है। भोपाल भी इस लिस्ट में सातवें नंबर पर आ चुका है।



इन शहरों में प्रतियोगी परीक्षाओं (मेंटल हेल्थ कानून)की तैयारी करने वाले युवा रहते हैं। छोटे शहरों से आए बच्चे यहां अकेलेपन और दबाव का शिकार हो रहे हैं। इस वजह से वे गलत कदम उठा रहे हैं।



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MP में मेंटल हेल्थ पॉलिसी क्यों जरूरी है

राज्य में साल 2019 से मानसिक स्वास्थ्य नीति (mental health law) पर काम चल रहा है। इसके बाद भी अब तक यह पॉलिसी जमीन पर नहीं आ पाई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पॉलिसी से ही सुधार होगा।



इस नीति के तहत हर जिले में काउंसलिंग सेंटर बनाए जाने हैं। स्कूल और कॉलेजों में मेंटल हेल्थ प्रोग्राम शुरू करने की योजना भी शामिल है। इससे लोगों को सही समय पर डॉक्टर मिल सकेंगे।



सरकार और डॉक्टर इस मुद्दे पर क्या कह रहे हैं

मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने इस पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य की मानसिक स्वास्थ्य नीति (Mental Healthcare) जल्द तैयार की जाएगी। सरकार टेली-मानस और मनहित ऐप से मदद पहुंचा रही है। मनोचिकित्सक डॉ. जेपी अग्रवाल कहते हैं कि समय पर इलाज से सुसाइड रुक सकते हैं। अच्छी नींद, दोस्तों से बातचीत और मोबाइल का कम उपयोग इसके लिए बहुत जरूरी है।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश में सुसाइड के मामले में कौन सा शहर आगे है?
    एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार इंदौर मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा सुसाइड रेट वाला शहर है। इंदौर देश में चौथे और भोपाल सातवें स्थान पर है।
  2. मानसिक तनाव को दूर करने के लिए डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?
    डॉक्टर बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद लेने, दोस्तों से बात करने, नियमित व्यायाम करने और मोबाइल का इस्तेमाल कम करने की सलाह देते हैं।
  3. मध्य प्रदेश सरकार मानसिक स्वास्थ्य के लिए क्या कदम उठा रही है?
    सरकार टेली-मानस, मनकक्ष काउंसलिंग सेवा और मनहित ऐप के जरिए मदद दे रही है। साथ ही राज्य मानसिक स्वास्थ्य नीति को भी तैयार किया जा रहा है।

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