मंत्री इंदर सिंह परमार ने राजा राममोहन राय को बताया अंग्रेजों का दलाल, मांगनी पड़ी माफी

Amresh Kushwaha | Nov 16, 2025, 13:30 IST
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मंत्री इंदर सिंह परमार ने राजा राममोहन राय को लेकर एक विवादित बयान दिया था। अब इस बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने एक्स पर माफी मांगी है। क्या कुछ कहा था मंत्री ने... चलिए बताते हैं

मध्यप्रदेश प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। शनिवार, 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती पर कई अलग-अलग जिलों में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।



वहीं, एक कार्यक्रम में मंत्री परमार भी शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने राजा राममोहन राय को अंग्रेजों का दलाल कहा था। वहीं अब इस बयान को लेकर शिक्षा मंत्री ने माफी मांगी है।



राजा राममोहन राय को बताया अंग्रेजों का दलाल

मध्यप्रदेश के आगर मालवा में बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम में मंत्री परमार ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने इस दौरान राजा राममोहन राय को अंग्रेजों का दलाल बताया।



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मंत्री ने एक्स पर ट्वीट कर मांगी माफी

मंत्री परमार ने इस विवाद को लेकर अपनी सफाई देने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम के दौरान मुझसे गलती से राजा राममोहन राय के बारे में कुछ गलत शब्द निकल गए।



इसके लिए मैं दिल से दुखी हूं और प्रायश्चित करता हूं। राजा राममोहन राय हमारे इतिहास के महान समाज सुधारक थे। इनका मैं व्यक्तिगत रूप से सम्मान करता हूं।



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मंत्री इंदर सिंह परमार के विवादित बयान की खबर पर एक नजर...

  • मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राजा राममोहन राय को अंग्रेजों का दलाल कहा, जिसके बाद माफी मांगी।
  • मंत्री परमार ने ट्वीट कर स्वीकार किया कि उन्होंने 15 नवंबर को आगर मालवा में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती कार्यक्रम में गलती से यह बयान दिया।
  • परमार ने कहा कि अंग्रेजों द्वारा मिशनरी स्कूलों के जरिए धर्मांतरण की साजिश चल रही थी और राजा राममोहन राय इस साजिश का हिस्सा थे।
  • मंत्री ने बिरसा मुंडा को धर्मांतरण के खिलाफ संघर्ष करने वाला नेता बताया और आदिवासी समाज को बचाने का श्रेय उन्हें दिया।
  • परमार ने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने आदिवासी नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास दबाया और धर्मांतरण को बढ़ावा देने वालों को महान बताया।

मिशनरी स्कूलों के खिलाफ भी दिया बयान

वहीं इस दौरान परमार ने कहा कि अंग्रेजों के समय में मिशनरी स्कूल ही शिक्षा का एकमात्र साधन थे। इन स्कूलों में धर्मांतरण की गतिविधियां चलती थीं।



परमार ने बताया कि बिरसा मुंडा भी शिक्षा पाना चाहते थे। वहीं, मिशनरी गतिविधियां देखकर उन्होंने उन स्कूलों को छोड़ दिया। फिर वे अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन में शामिल हो गए।



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धर्मांतरण को मिला अंग्रेजों का समर्थन

मंत्री परमार ने कहा कि अंग्रेजों ने कुछ लोगों को समाज सुधारक बना दिया। उनका असली उद्देश्य धर्मांतरण बढ़ाना था। इसी का जिक्र करते हुए उन्होंने राजा राममोहन राय को अंग्रेजों का दलाल बताया था।



परमार का कहना था कि केवल बिरसा मुंडा ने धर्मांतरण को रोकने की कोशिश की। उन्होंने आदिवासी समाज को बचाने के लिए संघर्ष किया।



पिछली सरकारों पर हमला

परमार ने पिछली सरकारों पर भी हमला बोला और आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पिछली सरकारों ने आदिवासी नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास दबाया था। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने धर्मांतरण के प्रयासों को बढ़ावा दिया, उन्हें महान बताया गया था। साथ ही, असली वीरों को छिपा दिया गया था।



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साल 2025 को बताया खास

मंत्री परमार ने इस अवसर पर यह भी कहा कि साल 2025 एक ऐतिहासिक साल है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस साल बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, सरदार पटेल की 150वीं जयंती और वंदे मातरम् के विशेष स्मरण का आयोजन हुआ। उन्होंने आदिवासी समाज के योगदान को भी सराहा। खासकर उनके वन संरक्षण के कार्य को सबसे अहम बताया।





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