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News in Short
- सुप्रीम कोर्ट ने 2 सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया था, मियाद 2 फरवरी को पूरी हो चुकी है।
- एसआईटी ने 19 अगस्त को ही अभियोजन अनुमति मांगी थी, जवाब अभी लंबित।
- कोर्ट ने शाह की माफी को रिकॉर्ड पर न मानते हुए सख्ती दिखाई।
आज, 4 फरवरी को मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली में हैं। thesootr को मिली जानकारी के मुताबिक, विजय शाह के मामले में वहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ बातचीत के बाद कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
News in Detail
सोमवार तक लेना था फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को एमपी सरकार को दो सप्ताह में फैसला लेने का आदेश दिया था। समय 2 फरवरी को खत्म हो गया। लेकिन अब तक सरकार इस पर कोई फैसला नहीं ले पाई है। आज दिल्ली में इस मामले पर फैसला हो सकता है।
कर्नल सोफिया को लेकर विवादित बोल
यह मामला उस विवादित बयान से जुड़ा है, जो मंत्री विजय शाह ने मई 2025 में महू में ऑपरेशन सिंदूर के एक इवेंट के दौरान दिया था। उनका बयान कर्नल सोफिया कुरैशी (सोफिया कुरैशी न्यूज) को लेकर था। जैसे ही यह बयान सामने आया, मामला तूल पकड़ने लगा।
फिर हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश पर इंदौर पुलिस ने इस पर अपराधी मुकदमा दर्ज किया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वहीं राज्य सरकार से तीन आईपीएस अफसरों की एक एसआईटी (विशेष जांच दल) बनाने को कहा।
एसआईटी ने कहा नहीं मिली मंजूरी
19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने शाह के मामले ( विजय शाह सोफिया कुरैशी बयान) में सुनवाई की थी। इस दौरान एसआईटी ने बताया कि उसने बीएनएस की धारा 196 के तहत 19 अगस्त को सरकार से अभियोजन की अनुमति मांगी थी। इसके बाद भी अब तक सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया।
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और दो सप्ताह का समय दिया। सुनवाई के दौरान शाह की तरफ से दी गई माफी को कोर्ट ने भी पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड पर औपचारिक माफी का कोई सबूत नहीं है।
ये है विजय शाह का सोफिया कुरैशी पर बयान
विवाद की शुरुआत 11 मई को हुई थी। उस दौरान विजय शाह ने इंदौर के महू में आयोजित कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर पर बयान दिया था।
शाह ने कहा था, उन्होंने (आतंकियों) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा (पहलगाम हमले की बात करते हुए)। मोदी जी ने उनकी बहन को ही उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।
शाह ने आगे कहा था- अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा, कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी।
शाह के इस बयान ने पूरे देश में हंगामा मचाया। इसके कारण उनकी कड़ी आलोचना की गई।
टाइमलाइन से समझें विजय शाह का पूरा मामला
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11 मई 2025 को विजय शाह ने इंदौर के महू में आयोजित हलमा कार्यक्रम में कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादास्पद बयान दिया।
13 मई को माफी मांगने के बाद भाजपा संगठन ने पकड़कर लाठियां मारी।
14 मई को हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
14 मई की रात 11 बजे इंदौर के मानपुर थाने में FIR दर्ज की गई।
15 मई को हाईकोर्ट ने FIR की भाषा पर नाराजगी जताई।
16 मई को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
17 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अगली तारीख 19 मई दी गई।
19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और विजय शाह को फटकार लगाई। कोर्ट ने SIT को जांच के आदेश दिए।
19 मई को ही SIT का गठन हुआ, जिसमें सागर रेंज के तत्कालीन IG प्रमोद वर्मा, तत्कालीन SAF DIG कल्याण चक्रवर्ती और डिंडोरी SP वाहिनी सिंह शामिल थे।
20 मई को SIT ने जांच शुरू की और इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में अपना बेस कैम्प स्थापित किया।
21 मई को SIT की टीम महू के रायकुंडा गांव पहुंची, जहां विजय शाह ने अपना बयान दिया था।
28 मई को कई लोगों के बयान दर्ज करने के बाद SIT ने दस्तावेज तैयार कर इन्हें कोर्ट के सामने पेश किया।
19 जुलाई को SIT ने विजय शाह को जबलपुर बुलाकर उनसे बयान दर्ज किया और 25 मिनट तक सवाल-जवाब किए।
28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और शाह को फटकारा।
- 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह की माफी पर कहा की बहुत देर हो गई है। साथ ही मध्य प्रदेश सरकार को दो हफ्ते में अभियोजन पर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।
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