MP के नगरीय निकायों में किसी ने पत्नी के नाम की खरीदी, तो किसी ने लिया घटिया सामान, पुराने मामलों में क्या हुई कार्रवाई?

Sumit Kumar | Oct 22, 2026, 23:56 IST
Share
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी पर उठे सवालों के बीच पुराने 62 मामलों में हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आया है। (प्रतीकात्मक AI इमेज)
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी पर उठे सवालों के बीच पुराने 62 मामलों में हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आया है। (प्रतीकात्मक AI इमेज)
Amid fresh questions over government procurement in Madhya Pradesh's urban local bodies, records of action taken in 62 previous cases have surfaced.

मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी पर सवाल उठ रहे हैं। एसीएस संजय दुबे के वायरल वीडियो से मामला चर्चा में आया है। इसी बीच विभागीय जांच का पुराना रिकॉर्ड सामने आया है। आठ संभागों के 62 मामलों में 146 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में थे। रिकॉर्ड के मुताबिक सात को बर्खास्त किया गया था।

वहीं 76 की वेतनवृद्धियां रोकी गई थीं। आर्थिक नुकसान की वसूली के आदेश भी दिए गए थे।

ग्वालियर संभाग में सबसे ज्यादा मामले

नगरीय प्रशासन विभाग के रिकॉर्ड में कई तरह की अनियमितताओं का ब्योरा है। इनमें सरकारी सामान की खरीदी और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के मामले शामिल हैं। सरकारी योजनाओं और कर्मचारियों के संविलियन में भी नियमों का उल्लंघन सामने आया था।

विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक ग्वालियर संभाग में सबसे ज्यादा 16 मामले दर्ज हुए थे। इन मामलों में 32 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में थे। शहडोल संभाग में 10 मामलों से 25 अधिकारी-कर्मचारी जुड़े थे।

उज्जैन संभाग में आठ मामलों में 21 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में थे। इंदौर संभाग में सात मामलों से 21 अधिकारी-कर्मचारी जुड़े थे। वहीं भोपाल संभाग में चार मामलों में 16 अधिकारी-कर्मचारियों के नाम दर्ज थे।

38 मामलों में आर्थिक नुकसान की वसूली के आदेश

विभागीय जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों पर अलग-अलग कार्रवाई हुई थी। कुछ की वेतनवृद्धियां रोकी गई थीं। वहीं कुछ मामलों में आर्थिक नुकसान की भरपाई के आदेश दिए गए थे।

रिपोर्ट में 38 मामलों में आर्थिक क्षति की वसूली दर्ज है। संबंधित कर्मचारियों के वेतन या सेवानिवृत्ति लाभों से रकम वसूलने के आदेश दिए गए थे।

इसके अलावा 17 मामलों में पेंशन या महंगाई राहत में कटौती हुई। यह कटौती पांच से 25 प्रतिशत तक दर्ज है। इसकी अवधि एक से पांच साल के बीच रखी गई थी।

जांच में 22 अधिकारी और कर्मचारी दोषमुक्त भी हुए थे। पांच मामलों में चेतावनी या परिनिंदा की कार्रवाई दर्ज है। वहीं दो मामलों में कर्मचारियों की मृत्यु के कारण कार्रवाई समाप्त हुई।

हालांकि ये अलग-अलग तरह की कार्रवाई के आंकड़े हैं। एक अधिकारी पर एक से ज्यादा कार्रवाई के आदेश भी हो सकते हैं।

MP में सरकारी खरीदी की हाईलेवल जांच: मंत्री बोलीं- गड़बड़ी मिली तो जिम्मेदार होंगे कार्रवाई के भागी | High-level investigation into government procurement in MP: Minister says - if irregularities are found, those responsible will be held accountable
एमपी के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी की हाईलेवल जांच, मंत्री प्रतिमा बागरी बोलीं- गड़बड़ी मिली तो होगी सख्त कार्रवाई
22 Oct 2026 ,
By Sumit Kumar
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी की उच्चस्तरीय जांच होगी। नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सामान की कीमतों में अंतर की जांच होगी। दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में विभागीय बैठक का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें सरकारी खरीदी से जुड़ी कई गड़बड़ियों की आशंका जताई गई थी।
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी की उच्चस्तरीय जांच होगी। नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सामान की कीमतों में अंतर की जांच होगी। दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में विभागीय बैठक का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें सरकारी खरीदी से जुड़ी कई गड़बड़ियों की आशंका जताई गई थी।

पत्नी के नाम से संस्था बनाकर जेम पोर्टल से खरीदी

छिंदवाड़ा जिले की न्यूटनचिखली नगर परिषद में सरकारी सामान की खरीदी में बड़ी गड़बड़ी मिली थी। यहां तत्कालीन सीएमओ नितिन बिजवे ने अपनी पत्नी के नाम से ऑनलाइन संस्था रजिस्टर कराई थी। इसके बाद उसी संस्था से जेम पोर्टल के जरिए सरकारी सामान खरीदा गया। विभागीय जांच में सामने आया कि यह खरीदी निजी फायदा उठाने के लिए की गई थी।

इस मामले में नितिन बिजवे की अगली तीन वेतनवृद्धियां रोक दी गई थीं। इसका असर उनकी आगे की सैलरी बढ़ोतरी पर भी पड़ेगा। निलंबन के दौरान की अवधि को भी उनकी ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना गया था।

सिवनी में महंगे दामों पर खरीदी गई थीं LED लाइटें

सिवनी नगर पालिका में भी सरकारी सामान की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। यहां जेम पोर्टल से हाईमास्ट पोल और लाइट महंगे दामों पर खरीदी गई थीं। इसके अलावा 26 वाट की एलईडी लाइट भी ज्यादा कीमत पर खरीदी गई थीं। शौचालय और मूत्रालय के लिए खरीदी गई सामग्री में भी गड़बड़ी सामने आई थी।

विभागीय जांच में सामान ज्यादा कीमत पर खरीदने की बात सामने आई थी। इस मामले में तत्कालीन सीएमओ पूजा बुनकर की अगली दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई थीं। साथ ही उनसे 7 लाख 16 हजार रुपए वसूलने के निर्देश दिए गए थे।

उपयंत्री विकास मेहरा और दीपक उईके पर भी कार्रवाई हुई थी। बिंदेश्वरी पन्द्रे सहित संबंधित उपयंत्रियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोकी गई थी। साथ ही उनसे उनकी जिम्मेदारी के हिसाब से नुकसान की रकम वसूलने के आदेश दिए गए थे।

कोटर में बाजार से महंगे दामों पर खरीदे गए टैंकर

सतना जिले की कोटर नगर परिषद में भी सरकारी सामान की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। यहां तीन हजार लीटर क्षमता वाले पानी के टैंकर खरीदे गए थे। इसके साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली भी खरीदी गई थी। विभागीय जांच में सामने आया कि इनकी कीमत बाजार दर से काफी ज्यादा थी।

इस मामले में तत्कालीन प्रभारी सीएमओ अंबिका प्रसाद साहू और उपयंत्री देवरत्न सोनी के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।

अंबिका प्रसाद साहू का निधन हो चुका था। इसलिए उन पर कोई दंड नहीं लगाया गया। हालांकि उनके बकाया सेवानिवृत्ति लाभों से 3 लाख 95 हजार 215 रुपए की वसूली की गई।

वहीं उपयंत्री देवरत्न सोनी की एक वेतनवृद्धि रोक दी गई थी। साथ ही उनसे 1 लाख 45 हजार 215 रुपए वसूलने के आदेश भी दिए गए थे।

सरकारी खरीद में बड़ा खुलासा: मध्य प्रदेश के निकायों में 250 करोड़ की संभावित बचत, कीमतों में भारी अंतर | Major Revelation in Government Procurement: Rs 250 Crore Potential Savings in Madhya Pradesh Municipalities, Huge Price Differences
2 लाख की कचरा गाड़ी 6 लाख में! 200 LED बल्ब का बिल 60 लाख रुपए, MP के 374 नगरीय निकायों की सरकारी खरीद पर उठे सवाल
21 Oct 2026 ,
By Sumit Kumar
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीद पर बड़े सवाल उठे हैं। कहीं 2 लाख की कचरा गाड़ी 6 लाख में खरीदी गई। कहीं 200 एलईडी बल्ब का बिल 60 लाख रुपए बना। तीन साल में 374 निकायों ने 1,134 करोड़ रुपए खर्च किए। अगर औसत मूल्य पर खरीदारी होती तो करीब 250 करोड़ रुपए की बचत हो सकती थी।
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीद पर बड़े सवाल उठे हैं। कहीं 2 लाख की कचरा गाड़ी 6 लाख में खरीदी गई। कहीं 200 एलईडी बल्ब का बिल 60 लाख रुपए बना। तीन साल में 374 निकायों ने 1,134 करोड़ रुपए खर्च किए। अगर औसत मूल्य पर खरीदारी होती तो करीब 250 करोड़ रुपए की बचत हो सकती थी।

गुना में कचरा वाहनों की खरीदी में गड़बड़ी

गुना नगर पालिका में भी कचरा वाहनों की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक जरूरी मंजूरी लिए बिना वाहन खरीदे गए थे। यहां 20 कचरा वाहनों की जगह सिर्फ 10 वाहन खरीदे गए थे। इस खरीदी में नियमों का पालन नहीं किया गया था।

इस मामले में तत्कालीन प्रभारी सीएमओ संजय श्रीवास्तव और प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी हरीशबाबू शाक्यवार पर कार्रवाई हुई थी। दोनों अधिकारियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोक दी गई थी। हालांकि इसका असर उनकी आगे की वेतनवृद्धियों पर नहीं पड़ना था।

इसी नगर पालिका में कीटनाशक सामग्री खरीदने में भी गड़बड़ी मिली थी। यहां टेंडर की प्रक्रिया से बचने के लिए अलग-अलग फाइलें बनाई गई थीं। हर फाइल में खरीदी की रकम एक लाख रुपए से कम रखी गई थी। इसके बाद बिना नियमित टेंडर निकाले कोटेशन के आधार पर सामान खरीदा गया था।

इस मामले में भी संजय श्रीवास्तव और हरीशबाबू शाक्यवार की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई हुई थी।

घटिया सामान खरीदने से 26 लाख रुपए का नुकसान

निवाड़ी जिले की तरीचरकलां नगर परिषद में भी सरकारी सामान की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। यहां बाजार से ज्यादा कीमत पर घटिया सामान खरीदा गया था। विभागीय जांच में सामने आया कि सामान की गुणवत्ता तय मानकों के अनुसार नहीं थी।

इस खरीदी से नगर परिषद को 26 लाख 16 हजार रुपए का नुकसान हुआ था। मामले में तत्कालीन प्रभारी सीएमओ श्रवण कुमार द्विवेदी पर कार्रवाई हुई थी। वे नौकरी से रिटायर हो चुके थे।

विभाग ने उनके रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम से 13 लाख 8 हजार रुपए वसूलने के आदेश दिए थे। साथ ही उनकी पेंशन पर मिलने वाली महंगाई राहत में 10 प्रतिशत कटौती की गई थी। यह कटौती दो साल के लिए तय की गई थी।

धार में सड़क बनाने की सामग्री की खरीदी में गड़बड़ी

धार नगर पालिका में भी सड़क बनाने की सामग्री खरीदने में गड़बड़ी मिली थी। यहां डामर और सड़क किनारे लगाए जाने वाले डेलीनेटर की खरीदी में अनियमितता सामने आई थी। डेलीनेटर सड़क पर वाहन चालकों को रास्ता दिखाने के लिए लगाए जाते हैं।

इस मामले में रिटायर अधिकारी विजय कुमार शर्मा पर कार्रवाई हुई थी। उनकी पेंशन पर मिलने वाली महंगाई राहत में कटौती की गई थी। साथ ही उनसे 1 लाख 43 हजार 325 रुपए वसूलने के आदेश भी दिए गए थे।

वहीं अधिकारी पुनीत तिवारी की दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई थीं। उनसे भी 1 लाख 43 हजार 325 रुपए वसूलने के आदेश हुए थे। हालांकि जांच में उपयंत्री दिव्या सोलंकी को दोषमुक्त कर दिया गया था।

70 टन कोयला गायब: GPS से खुला राज, घंटों रुके ट्रक, FIR दर्ज नहीं | 70 Ton Coal Missing: GPS Reveals Secret, Trucks Stopped for Hours, FIR Not Registered
छत्तीसगढ़ में 70 टन कोयला गायब होने का आरोप: GPS से खुला ट्रकों के घंटों रुकने का राज, शिकायत के बाद भी FIR नहीं
22 Oct 2026 ,
By Umeshwari Baghel
छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन के दौरान करीब 70 टन कोयला गायब होने का मामला सामने आया है। यह घटना अंबिकापुर की अमेरा खदान से तिल्दा स्थित एक स्टील कंपनी के लिए कोयला भेजने के दौरान हुई। कंपनी ने पुलिस से शिकायत की लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन के दौरान करीब 70 टन कोयला गायब होने का मामला सामने आया है। यह घटना अंबिकापुर की अमेरा खदान से तिल्दा स्थित एक स्टील कंपनी के लिए कोयला भेजने के दौरान हुई। कंपनी ने पुलिस से शिकायत की लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

शहडोल में कर्मचारियों की गलत नियुक्ति से 3.20 करोड़ का नुकसान

नगरीय निकायों में सिर्फ सरकारी सामान की खरीदी में ही गड़बड़ी नहीं मिली थी। कर्मचारियों को नगर परिषदों में शामिल करने की प्रक्रिया में भी नियम तोड़े गए थे।

शहडोल संभाग की चार नई नगर परिषदों में ऐसा मामला सामने आया था। इनमें डूमरकछार, डोला, बनगवां और बकहो शामिल थीं। यहां पंचायतों में पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमों के खिलाफ नगर परिषदों में शामिल किया गया था। इसे संविलियन कहा जाता है। विभागीय जांच में इस गड़बड़ी से करीब 3 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान सामने आया था।

इस मामले में संयुक्त संचालक मकबूल खान सहित छह अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त किया गया था। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों से नुकसान की रकम वसूलने के निर्देश भी दिए गए थे। वहीं रीना राठौर की एक वेतनवृद्धि रोक दी गई थी।

गोहद में डस्टबिन की खरीदी में गड़बड़ी

भिंड जिले की गोहद नगर पालिका में भी डस्टबिन खरीदने में गड़बड़ी मिली थी। यह मामला साल 2017 का था। जांच में सामने आया कि डस्टबिन खरीदते समय तय नियमों का पालन नहीं किया गया था।

इस मामले में सुरेंद्र शर्मा और राघवेंद्र शर्मा पर कार्रवाई हुई थी। दोनों अधिकारियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोक दी गई थी। साथ ही दोनों से 39-39 हजार रुपए की वसूली भी की गई थी।

इसी तरह ग्वालियर जिले की डबरा नगर पालिका में भी सरकारी सामान की खरीदी में गड़बड़ी मिली थी। इस मामले में रिटायर सीएमओ पीके सिंह की पेंशन पर मिलने वाली महंगाई राहत में कटौती की गई थी।

वहीं उपयंत्री धर्मेंद्र भदौरिया की दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई थीं। हालांकि जांच में उपयंत्री राहुल सिंह पर लगे आरोप साबित नहीं हुए थे। इसलिए उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया था।

ACS संजय दुबे के वायरल वीडियो से फिर उठे सवाल

मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह एसीएस संजय दुबे का वायरल वीडियो है। वीडियो भोपाल में हुई नगरीय प्रशासन विभाग की बैठक का है। इसमें संजय दुबे सरकारी सामान की कीमतों में भारी अंतर पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। इसके बाद से नगरीय निकायों में खरीदी की अनियमितताओं को लेकर चर्चा तेज है।

बैठक में तीन साल की सरकारी खरीदी का विश्लेषण पेश किया गया है। इसके मुताबिक 374 नगरीय निकायों ने करीब 1,134 करोड़ रुपए का सामान खरीदा है। कई निकायों में एक जैसे सामान की कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है।

एक निकाय ने कचरा गाड़ी दो लाख रुपए में खरीदी। दूसरे निकाय ने इसी तरह की गाड़ी पर छह लाख रुपए खर्च किए। इस गाड़ी के साथ चार डस्टबिन भी शामिल थे।

वहीं एक नगर पालिका में 200 एलईडी बल्ब खरीदने का मामला भी सामने आया है। इन बल्बों पर 60 लाख रुपए खर्च होने की शिकायत मिली थी।

विभागीय विश्लेषण में करीब 250 करोड़ रुपए की संभावित बचत का अनुमान जताया गया है। अधिकारियों के मुताबिक औसत दरों पर खरीदी से इतनी रकम बच सकती थी। हालांकि यह केवल अनुमान है। इसे सीधे घोटाले की राशि नहीं माना जा सकता।

खेल सामग्री खरीदी में घोटाला: टेंडर से बचने के लिए लाखों की खरीद टुकड़ों में, 15 लाख में हॉकी टर्फ की सफाई पर सवाल | Sports Equipment Purchase Scam: Millions Bought in Parts to Avoid Tenders, Questions Raised on 15 Lakh Hockey Turf Cleaning
खेल सामग्री की खरीदी में बिलों का खेल, टेंडर से बचने के लिए लाखों की खरीद टुकड़ों में, 15 लाख में हॉकी टर्फ की सफाई
22 Oct 2026 ,
By Arun Tiwari
<b>Raipur. </b>छत्तीसगढ़ के खेल विभाग में खेल सामग्री की खरीदी और विभिन्न सेवाओं के भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खरीद संबंधी दस्तावेजों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही दिन में लाखों रूपए की खेल सामग्री के लिए कई अलग-अलग बिल जारी किए गए। आरोप है कि खरीद को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर टेंडर प्रक्रिया से बचने का रास्ता अपनाया गया।
<b>Raipur. </b>छत्तीसगढ़ के खेल विभाग में खेल सामग्री की खरीदी और विभिन्न सेवाओं के भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खरीद संबंधी दस्तावेजों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही दिन में लाखों रूपए की खेल सामग्री के लिए कई अलग-अलग बिल जारी किए गए। आरोप है कि खरीद को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर टेंडर प्रक्रिया से बचने का रास्ता अपनाया गया।

मंत्री प्रतिमा बागरी ने की हाईलेवल जांच की बात

सरकारी खरीदी पर उठे सवालों के बाद सरकार भी सक्रिय हुई है। नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है। मंत्री का कहना है कि विभाग सभी खरीदी और निर्माण कार्यों की निगरानी करता है। पहले भी गड़बड़ियां सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।

प्रतिमा बागरी के मुताबिक वायरल वीडियो से सामने आई जानकारी की जांच कराई जाएगी। सामान की कीमतों में इतना अंतर क्यों है। इसकी वजह भी पता की जाएगी। जांच में खरीद प्रक्रिया की कमियों को भी देखा जाएगा। किसी ने इन कमियों का गलत फायदा तो नहीं उठाया। इस पहलू की भी पड़ताल होगी।

मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें शामिल सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि पुराने रिकॉर्ड में दर्ज 62 मामले नई हाईलेवल जांच का हिस्सा नहीं हैं। ये पहले दर्ज अलग-अलग विभागीय मामलों में हुई कार्रवाई का विवरण हैं। नई खरीदी में वास्तविक गड़बड़ी और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
Tags:
  • MP Nagariya Nikay
  • MP Urban Bodies
  • मंत्री प्रतिमा बागरी
  • जेम पोर्टल
  • मध्य प्रदेश नगरीय निकाय
  • नगरीय निकाय
  • नगरीय निकाय घोटाला
  • नगरीय प्रशासन विभाग
  • ग्वालियर
  • सिवनी
नवा रायपुर में लगेगी छत्तीसगढ़ की पहली इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, 3,500 लोगों को मिलेगा रोजगार

By The Sootr

नवा रायपुर में लगेगी छत्तीसगढ़ की पहली इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, 3,500 लोगों को मिलेगा रोजगार
भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर विवाद, 66 गांवों के किसानों की जमीन के इस्तेमाल पर उठे सवाल

By Ramanand Tiwari

भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर विवाद, 66 गांवों के किसानों की जमीन के इस्तेमाल पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में सरकारी सेवाएं हुईं आसान, सेवा सेतु पर मिल रहीं 38 विभागों की 939 सुविधाएं

By The Sootr

छत्तीसगढ़ में सरकारी सेवाएं हुईं आसान, सेवा सेतु पर मिल रहीं 38 विभागों की 939 सुविधाएं
आवारा सांड के हमले में जान गंवाने पर प्रशासन पर लगा 61.35 लाख का जुर्माना, एडीजे कोर्ट ने दिए निर्देश

By Mukesh Sharma

आवारा सांड के हमले में जान गंवाने पर प्रशासन पर लगा 61.35 लाख का जुर्माना, एडीजे कोर्ट ने दिए निर्देश
राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण में 63% मतदान, मांगता में सर्वाधिक तो रानी स्टेशन में सबसे कम मतदान

By Mukesh Sharma

राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण में 63% मतदान, मांगता में सर्वाधिक तो रानी स्टेशन में सबसे कम मतदान
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें...राज्यसभा सीट पर उपचुनाव का ऐलान, और गरीबों के मकान बनाएंगे प्राइवेट बिल्डर...

By Sandeep Kumar

MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें...राज्यसभा सीट पर उपचुनाव का ऐलान, और गरीबों के मकान बनाएंगे प्राइवेट बिल्डर...
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने युवाओं से कहा- बड़े सपने देखें और देश के लिए काम करें, छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर भी दिया बयान

By Umeshwari Baghel

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने युवाओं से कहा- बड़े सपने देखें और देश के लिए काम करें, छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर भी दिया बयान