कौन बनेगा एमपी का अगला DGP? 1991 से 1994 बैच तक के 12 IPS अफसर रेस में
भोपाल में पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी की कुर्सी के लिए हलचल तेज है। मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना का कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है। इसी वजह से नए डीजीपी की तलाश शुरू हो गई है।
सरकार ने इसके लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। एमपी गृह विभाग ने 12 सीनियर आईपीएस (Indian Police Service) अफसरों की सूची बनाई है। यह पैनल दिल्ली भेजा गया है। अब आगे की प्रक्रिया वहीं से पूरी होगी। पुलिस महकमे में इस पर लगातार चर्चा हो रही है।
पैनल में चार बैच शामिल
पैनल में चार अलग-अलग बैच के अफसर शामिल किए गए हैं।
इसमें 1991 बैच के तीन अफसर हैं।
1992 बैच से भी तीन नाम शामिल किए गए हैं।
1993 बैच के दो अफसरों को जगह मिली है।
सबसे ज्यादा 1994 बैच के चार अफसरों के नाम भेजे गए हैं।
कुल मिलाकर पैनल में 12 नाम हैं। हर बैच से अनुभवी अफसरों को चुना गया है।
1991 बैच के तीन नाम
वरिष्ठता क्रम में सबसे पहला नाम आईपीएस वरुण कपूर का है। वे 1991 बैच के आईपीएस अफसर हैं। फिलहाल वे जेल डीजी के पद पर हैं। दूसरे नंबर पर आईपीएस उपेंद्र जैन का नाम है। वे ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) के डीजी हैं। तीसरे नंबर पर आईपीएस प्रज्ञा ऋचा हैं। वे होमगार्ड की डीजी हैं। यही तीन नाम 1991 बैच से भेजे गए हैं। तीनों अफसर लंबे समय से सेवा दे रहे हैं।
1992 बैच के अफसर
1992 बैच से भी तीन अफसरों को पैनल में रखा गया है। इनमें पंकज श्रीवास्तव का नाम शामिल है। दूसरा नाम आदर्श कटियार का है। तीसरा नाम जी. अखेती सेमा का है। ये तीनों अफसर काफी सीनियर माने जाते हैं। इनकी सेवा का लंबा अनुभव भी है। पुलिस विभाग में इनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
1993 बैच के दो नाम
1993 बैच से दो नाम पैनल में शामिल किए गए हैं। पहला नाम अनिल कुमार का है। दूसरा नाम रवि गुप्ता का है। ये दोनों अफसर भी वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। इस बैच से सिर्फ दो ही नाम भेजे गए हैं। बाकी बैचों के मुकाबले यह संख्या कम है।
1994 बैच का बड़ा दल
सबसे ज्यादा नाम 1994 बैच से भेजे गए हैं। इसमें अनंत सिंह का नाम शामिल है। मनमीत सिंह नारंग को भी पैनल में जगह मिली है। राजाबाबू सिंह का नाम भी सूची में है। चौथा नाम डीपी गुप्ता का है। इस तरह इस बैच से चार अफसर शामिल हुए हैं। यह बैच पैनल (mp IPS officers) में सबसे बड़ा समूह है।
आगे यूपीएससी तय करेगी
अब आगे की प्रक्रिया UPSC(Union Public Service Commission) की कमेटी तय करेगी। यह कमेटी पैनल में से तीन नाम चुनेगी। इसके बाद यह सूची सरकार को भेजी जाएगी। सरकार इन तीन नामों में से एक पर मुहर लगाएगी। यही अफसर अगला डीजीपी बनेगा। यह पूरी प्रक्रिया कुछ हफ्तों में पूरी हो सकती है। तब तक अटकलों का दौर जारी रहेगा।
मकवाना का कार्यकाल
मौजूदा एमपी डीजीपी आईपीएस कैलाश मकवाना ने बीते साल पद संभाला था। सरकार ने 23 नवंबर को उनके नाम का ऐलान किया था। इसके बाद 1 दिसंबर को उन्होंने डीजीपी का कार्यभार संभाला। अब उनका कार्यकाल इसी साल नवंबर में पूरा हो रहा है। इसलिए नए डीजीपी की तलाश जरूरी हो गई है। सरकार समय रहते नई नियुक्ति करना चाहती है। इससे पुलिस विभाग में कामकाज सुचारू रहेगा।
पुलिस महकमे में इस बदलाव को लेकर चर्चा तेज है। कई सीनियर अफसर इस दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं। सभी की नजर अब यूपीएससी की कमेटी पर टिकी है। तीन नामों की सूची आते ही तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद सरकार जल्द फैसला ले सकती है। पुलिस विभाग को भी नए नेतृत्व का इंतजार है। कर्मचारियों में भी इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
क्यों अहम है यह पद
डीजीपी पद हमेशा से बेहद अहम माना जाता रहा है। इस पद पर बैठने वाला अफसर पूरे प्रदेश की पुलिस व्यवस्था संभालता है। कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी भी उसी पर होती है। इसलिए इस नियुक्ति पर सबकी निगाहें रहती हैं। सरकार भी इस फैसले में पूरी सावधानी बरतती है। यही वजह है कि नामों का चयन बेहद सोच-समझकर किया जाता है।
नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया
डीजीपी की नियुक्ति (DGP selection rules) के लिए तय प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। सबसे पहले सीनियर अफसरों की सूची तैयार की जाती है। इसमें सेवा अवधि और अनुभव को ध्यान में रखा जाता है। इसके बाद यह सूची केंद्र स्तर की कमेटी के पास भेजी जाती है। वहां से कुछ चुनिंदा नाम वापस भेजे जाते हैं। आखिर में राज्य सरकार अंतिम फैसला लेती है। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश होती है।
पैनल में शामिल सभी अफसर अलग-अलग विभागों में काम कर रहे हैं। किसी के पास जेल विभाग की जिम्मेदारी है तो किसी के पास होमगार्ड की। कुछ अफसर आर्थिक अपराध जांच जैसे संवेदनशील महकमे संभाल रहे हैं। इनका प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक माना जाता है। इसी अनुभव के आधार पर इन्हें पैनल में जगह मिली है। अब देखना होगा कि अंतिम रूप से किसे कमान मिलती है।
FAQ
- सवाल 1: मध्यप्रदेश में नया डीजीपी कब तक तय होगा?
मध्यप्रदेश सरकार ने 12 सीनियर आइपीएस अफसरों का पैनल दिल्ली भेज दिया है। अब यूपीएससी की कमेटी इसमें से तीन नाम चुनकर सरकार को वापस भेजेगी। इसके बाद सरकार इन तीन नामों में से एक पर मुहर लगाएगी। मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना का कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है, इसलिए यह प्रक्रिया जल्द पूरी होने की उम्मीद है। - सवाल 2: मध्यप्रदेश के नए डीजीपी की दौड़ में सबसे आगे कौन है?
वरिष्ठता क्रम में पहला नाम 1991 बैच के वरुण कपूर का है, जो फिलहाल जेल डीजी हैं। दूसरा नाम उपेंद्र जैन का है, जो ईओडब्ल्यू के डीजी हैं। तीसरा नाम होमगार्ड डीजी प्रज्ञा ऋचा का है। ये तीनों 1991 बैच के अफसर होने के कारण वरिष्ठता में सबसे आगे माने जा रहे हैं। - सवाल 3: मध्यप्रदेश के नए डीजीपी पैनल में किन-किन बैच के अफसर शामिल हैं?
पैनल में 1991, 1992, 1993 और 1994 बैच के अफसर शामिल हैं। 1991 और 1992 बैच से तीन-तीन नाम भेजे गए हैं। 1993 बैच से दो नाम शामिल हैं। सबसे ज्यादा चार नाम 1994 बैच से भेजे गए हैं, जिसमें अनंत सिंह, मनमीत सिंह नारंग, राजाबाबू सिंह और डीपी गुप्ता शामिल हैं।
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