अमृत 2.0 योजना : पानी के नाम पर खुदाई, शहर बेहाल... बरसात में कौन देगा जवाब?
Ramanand Tiwari | Jun 18, 2026, 22:30 IST
Photograph: (thesootr)
BHOPAL. पेयजल सुधार के नाम पर शहरों में खुदाई जारी है। अमृत-2.0 पर 15 हजार करोड़ खर्च के बाद भी सड़कें खराब हैं। बारिश से पहले व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में सड़कों की खुदाई के बाद धीमी मरम्मत।
- बरसात में जलभराव और दुर्घटना का खतरा बढ़ा।
- पेयजल परियोजनाओं पर 15 हजार करोड़ से अधिक खर्च।
- 36 हजार से ज्यादा जल शिकायतें दर्ज।
- केवल 61 प्रतिशत शिकायतों का समाधान।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बरसात सिर पर खड़ी है तो इन उखड़ी सड़कों, अधूरे गड्ढों और बिखरी व्यवस्थाओं के बीच आम नागरिक आखिर कैसे निकलेंगे? शहरों में जगह-जगह खुदाई हो चुकी है, लेकिन उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की जिम्मेदारी लेने वाला अमला मैदान में नजर नहीं आ रहा।
15 हजार करोड़ खर्च, फिर भी 36 हजार शिकायतें
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 61 प्रतिशत शिकायतों का समाधान हो पाया। बाकी लोग आज भी कम दबाव, अनियमित जलापूर्ति और दूषित पानी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
amrit yojna crisis
प्रमुख तथ्य...
- 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाएं जारी।
- 36 हजार से अधिक पेयजल शिकायतें दर्ज।
- केवल 61 प्रतिशत शिकायतों का समाधान।
- कई परियोजनाएं अभी 60 से 85 प्रतिशत तक ही पूरी।
- बरसात से पहले हजारों स्थानों पर सड़कें खुदी हुई।
सड़कें खोदीं, लेकिन बनाने की जल्दबाजी नहीं
राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में नागरिक रोजाना धूल, गड्ढों और खराब रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुदाई के बाद खानापूर्ति कर दी जाती है, लेकिन स्थायी मरम्मत नहीं होती।
बरसात में बढ़ सकती है परेशानी
विशेषज्ञों का मानना है कि अधूरी मरम्मत वाले हिस्सों में जलभराव, कीचड़ और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। सबसे ज्यादा परेशानी कॉलोनियों और आंतरिक सड़कों में देखने को मिल सकती है, जहां खुदाई के बाद समुचित पुनर्निर्माण नहीं हुआ है।
अधूरी परियोजनाएं बढ़ा रहीं संकट
शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन नई पाइपलाइन और जल वितरण नेटवर्क उसी गति से विकसित नहीं हो सके। नतीजा यह है कि नए इलाकों में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है।
पुरानी पाइपलाइनें बनी मुसीबत
कई जगह पेयजल लाइनें नालों और सीवेज नेटवर्क के आसपास से गुजर रही हैं। अकेले भोपाल में 525 किलोमीटर पाइपलाइन ऐसे क्षेत्रों में चिन्हित की गई है जहां सीवेज मिश्रण का खतरा बना हुआ है।
दूषित पानी ने भी बढ़ाई चिंता
यह स्थिति बताती है कि समस्या केवल पानी पहुंचाने की नहीं, बल्कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पानी उपलब्ध कराने की भी है। इंदौर सबसे ऊपर, भोपाल दूसरे नंबर पर 1 जनवरी से 9 जून 2026 तक दर्ज शिकायतों में इंदौर सबसे आगे रहा।
सबसे बड़ा सवाल: पुनर्निर्माण समय पर नहीं
यदि बरसात से पहले तैयारी पूरी है, तो शहरों में जगह-जगह खुदाई और बदहाल सड़कें अब भी क्यों दिखाई दे रही हैं? फिलहाल जनता जवाब का इंतजार कर रही है, जबकि मानसून दस्तक देने को तैयार खड़ा है।
इसको लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा कि "प्रदेश में पेयजल व्यवस्था बद से बदतर है। हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिली। पानी की लाइन के नाम पर सड़कें खोद दी गईं, लेकिन बरसात से पहले उनकी मरम्मत पर कोई गंभीरता दिखाई नहीं दे रही।"
सड़कें बनाने पर कोई ध्यान नहीं: बारोलिया
कई इलाकों में सड़कें महीनों से उखड़ी पड़ी हैं, जिससे आम नागरिकों, व्यापारियों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बरसात सिर पर है और यदि समय रहते सड़कों को दुरुस्त नहीं किया गया तो हालात और गंभीर हो जाएंगे। सरकार एक ओर सुचारू पेयजल व्यवस्था के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनता धूल, कीचड़ और जाम से जूझ रही है। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग समाधान करने के बजाय केवल आश्वासन देने में लगे हैं।
पेयजल योजना के नाम पर अव्यवस्था का तोहफा: विवेक त्रिपाठी
विवेक त्रिपाठी ने कहा कि मानसून शुरू होने वाला है और यदि प्रशासन ने तत्काल कदम नहीं उठाए तो खुदी हुई सड़कें दुर्घटनाओं और जलभराव का बड़ा कारण बन सकती हैं।
सरकार को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और केवल घोषणाओं के बजाय जमीन पर काम दिखाना चाहिए। जनता लगातार शिकायतें कर रही है, लेकिन उनका निराकरण नहीं हो रहा, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। राजधानी की ऐसी स्थिति किसी भी जिम्मेदार प्रशासन के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए।
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