मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की बॉन्ड पोस्टिंग में गड़बड़ी, PG डॉक्टर गांव छोड़ मेडिकल कॉलेज पहुंचे
Aman Vaishnav | May 03, 2026, 12:38 IST
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मध्यप्रदेश में बॉन्ड के तहत पोस्ट किए गए पीजी डॉक्टरों को ग्रामीण अस्पतालों की बजाय मेडिकल कॉलेजों में तैनात किया जा रहा है। NHM के आदेश के बावजूद 81 में से 35 स्त्री रोग, 23 एनेस्थीसिया और 23 शिशु रोग विशेषज्ञ मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
News In Short
- मध्यप्रदेश में ग्रामीण अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है।
- सरकार ने बॉन्ड के तहत पोस्टग्रेजुएट (PG) डॉक्टरों की ग्रामीण पोस्टिंग अनिवार्य की थी।
- लेकिन 81 में से 35 से ज्यादा PG डॉक्टर मेडिकल कॉलेज में पोस्ट हो गए।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए आदेश जारी किया।
- ग्रामीण क्षेत्रों में 340 में से सिर्फ 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही ठीक से काम कर रहे हैं।
News In Detail
गांवों में कौन देखेगा मरीज?
इसी समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने एक बड़ा फैसला लिया। तय हुआ कि जो पीजी यानी पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर बॉन्ड के तहत सरकारी सेवा में आएंगे, उनकी पोस्टिंग पहले चिह्नित एफएआरयू में ही होगी।
इनमें स्त्री रोग, शिशु रोग और निश्चेतना यानी एनेस्थीसिया जैसे अहम विभागों के डॉक्टर शामिल हैं।
81 में से 35 गए मेडिकल कॉलेज
एनेस्थीसिया के 23 और शिशु रोग विशेषज्ञों के 23 और डॉक्टर भी मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। ग्रामीण क्षेत्रों को जो डॉक्टर मिलने चाहिए थे, वे शहरी मेडिकल कॉलेजों में तैनात हो गए।
NHM ने इस पर आपत्ति जताते हुए स्पष्ट कहा कि बॉन्ड के तहत आने वाले पीजी/डिप्लोमाधारक डॉक्टरों की मेडिकल कॉलेजों में पोस्टिंग नियमों के खिलाफ है।
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पोस्टिंग में यूनिफाइड पॉलिसी की मांग
फाइमा (FAIMA - Federation of All India Medical Association) के नेशनल कोऑर्डिनेटर डॉ. आकाश सोनी का कहना है कि, बॉन्ड पोस्टिंग पर सरकार की एक स्पष्ट यूनिफाइड पॉलिसी होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इस तरह अलग-अलग वेतन देने से डॉक्टरों के बीच असमानता और संशय पैदा होता है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाल बुरा
इसी तरह एम्स भोपाल में स्मार्ट यूनिट में संविदा चिकित्सा अधिकारी के चयन को लेकर एक गड़बड़ी सामने आई है। दरअसल इस चयन में प्रक्रियागत त्रुटियां थीं। इसका सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
इसके बाद डॉ. हिमानी यादव, जो शिशु स्वास्थ्य विभाग की उप संचालक हैं, उन्हें अपर मिशन संचालक दिशा नागवंशी ने नोटिस दिया है। वहीं अपर मुख्य सचिव ने भी इस मामले को अपनी टास्क लिस्ट में डालकर जवाब मांगा है।
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ऊपर से आदेश, जमीन पर अमल नहीं
सिस्टम में खामी या मंशा में?
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