खेलो एमपी: खिलाड़ियों पर निजी संघों से रजिस्ट्रेशन की पाबंदी

Sanjay Sharma | Jan 12, 2026, 21:09 IST
mp players registration
मध्यप्रदेश में खेलो एमपी यूथ गेम्स को निजी हाथों में सौंपने पर विवाद उठ गया है। खिलाड़ियों ने पंजीयन और शुल्क वसूली का विरोध किया है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाएं प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पा रही हैं।

NEWS IN Inshort

1. मध्य प्रदेश में 13 जनवरी से हो रहा है खेलो एमपी-26 का शुभारंभ।


2. एमपी के खेल ओलंपिक में खेल संघ से पंजीकृत खिलाड़ी ही कर पाएंगे शिरकत।


3. ग्रामीण और आर्थिक कमजोर खिलाड़ियों ने निजी संघों से रजिस्ट्रेशन पर उठाए हैं सवाल ।


4. खेल प्रशिक्षकों ने भी खेल मंत्री और संचालक को नई व्यवस्था के विरोध में पत्र लिखा है।


5. ,खेल संघों को फीस चुकाने में असमर्थ खिलाड़ी सरकारी आयोजन से वंचित होने से हैं नाराज।



News in Detail

मध्यप्रदेश में बीते एक दशक से खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई आयोजन कर रही है। अब एमपी यूथ गेम्स को मध्य प्रदेश के ओलंपिक के नाम से भव्य रूप दिया गया है। इसके तहत विकासखंड से लेकर राज्य स्तरीय स्पर्धाएं कराई जा रही हैं। इन आयोजनों की बदौलत कई खेल प्रतिभाएं सामने आई हैं।



इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और एशियन गेम्स ही नहीं बल्कि ओलंपिक जैसी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भी प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। लेकिन अब इस सरकारी आयोजन का निजीकरण करने की तैयारी हो गई है। 13 जनवरी से शुरू हो रहे एमपी यूथ गेम्स में भाग लेने के लिए खिलाड़ियों को पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीयन निजी क्लब और खेल संघों में कराना होगा। 15 जनवरी तक ब्लॉक स्तर, 16 से 20 जनवरी के बीच जिला स्तर, 21 से 25 जनवरी तक संभाग और 28 से 31 जनवरी तक राज्य स्तरीय स्पर्धाएं होंगी।



खेलो एमपी यूथ गेम्स के लिए मप्र खेल विभाग ने हाल ही में गाइडलाइन में बदलाव किया है। अब विकासखंड से लेकर राज्य स्तर तक खिलाड़ियों को खेल संघों से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स, पिट्टू, रस्साकसी, शतरंज, मलखम्ब जैसे खेलों के लिए खिलाड़ियों को पहले खेल संघों से जुड़ना होगा। पंजीयन के बाद ही खिलाड़ी खेलो एमपी में शामिल हो सकेंगे। प्रतियोगिताएं 13 से 31 जनवरी तक आयोजित होंगी।



सबसे बड़ी विडंबना है कि खेल प्रतिभाओं को निखारने की प्रतियोगिता में ग्रामीण खिलाड़ी शामिल नहीं हो पाएंगे। इसका कारण खेल संघों से संबद्धता की अनिवार्यता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी, शतरंज जैसे खेलों के लिए अलग से खेल संघ नहीं होते। ऐसे खिलाड़ी आपस में टीम बनाकर खेलते और प्रशिक्षण लेते हैं। खेलो एमपी के तहत रजिस्ट्रेशन की बाध्यता पर यही खिलाड़ी सवाल उठा रहे हैं।





Documents

मध्य प्रदेश बीपीएड संघ ने इस पाबंदी के विरोध में खेल मंत्री विश्वास सारंग सहित खेल संचालक राकेश गुप्ता को पत्र लिखा है। खेल प्रशिक्षकों का कहना है नई गाइडलाइन ग्रामीण खिलाड़ियों को खेलो एमपी से बाहर करने वाली है। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में खेल संघ नहीं है, वहीं इसके लिए खिलाड़ियों को शुल्क चुकानी होगी। ज्यादातर खिलाड़ी निजी खेल संघों को रजिस्ट्रेशन शुल्क चुकाने की स्थिति में नहीं हैं।



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खेल प्रशिक्षकों का कहना है कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग विकासखंड से लेकर राज्य स्तर तक होने वाली खेल स्पर्धाओं का खर्च उठा रहा है। खेल संसाधन और सुविधाओं पर सरकार खर्च कर रही है। इसके बावजूद निजी खेल संघ से रजिस्ट्रेशन की बाध्यता बेमानी है। इसका उद्देश्य खेल प्रतिभाओं को निखारने से ज्यादा निजी खेल संघों को लाभ पहुंचाना दिख रहा है।



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निष्कर्ष

खेल प्रशिक्षक पंकज भार्गव और फुटबॉल ट्रेनर रविकांत नामदेव के अनुसार, खिलाड़ियों की प्रतिभा महत्वपूर्ण है। निजी क्लब पहले से ही फीस वसूलकर खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं। ऐसे खिलाड़ियों को स्पर्धाओं में भाग लेने का अवसर मिलता है। सरकार ने ग्रामीण खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए खेलो एमपी आयोजन शुरू किया था।



खेलो एमपी यूथ गेम्स – 2026 शेड्यूल

मध्यप्रदेश का ओलंपिक

10 जनवरी से 31 जनवरी 2026


ब्लॉक स्तर: 10 – 15 जनवरी


जिला स्तर: 16 – 20 जनवरी


संभाग स्तर: 21 – 25 जनवरी


राज्य स्तर: 28 – 31 जनवरी



इन विधाओं की होगी स्पर्धा

विकासखंड, जिला एवं राज्य स्तर

1. हॉकी


2. बॉक्सिंग


3. एथलेक्टिक्स


4. खो- खो


5. तैराकी


6. मलखम्ब


7. कुश्ती


8. जूडो


9. शतरंज


10. वेटलिफ्टिंग



ब्लॉक, जिला, संभाग एवं राज्य स्तर

1. फुटबॉल


2. वॉलीबॉल


3. क्रिकेट


4. बैडमिंटन


5. पिट्टू


6. बास्केटबॉल


7. टेनिस


8. योगासन


9. रस्साकसी


10. कबड्डी



केवल राज्य स्तर


1. आर्चरी


2. ताईक्वांडो


3. क्याकिंग-कैनोइंग


4. रोइंग


5. फेसिंग


6. शूटिंग


7. थ्रो-बॉल



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