एमपी में सिस्टम की हकीकत: महिला को कागजों में मारा

मध्य प्रदेश के खजुराहो में सिस्टम की लापरवाही ने एक गर्भवती महिला को कागजों में मृत घोषित कर दिया। अब महिला खुद को जिंदा साबित करने दफ्तरों के चक्कर काट रही है।

author-image
Sanjay Dhiman
New Update
Sir, I am alive! In MP the system killed the woman on paper

Photograph: (the sootr)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

5 पाइंट में समझें पूरी खबर

  • गीता रैकवार, एक गर्भवती महिला, को आधार कार्ड में गलती से मृत घोषित किया गया।
  • सरकारी दफ्तरों में चक्कर काटने के बाद भी गीता को कोई समाधान नहीं मिला।
  • उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शन लेने में गीता को सरकारी लापरवाही का शिकार होना पड़ा।
  • गीता और उनके पति ने बमीठा थाने में शिकायत दर्ज करवाई, खुद को जिंदा साबित करने की कोशिश की।
  • सिस्टम की गलती से जिंदा महिला को परेशान होने का सामना करना पड़ा, सरकारी योजनाओं से वंचित हो गई।

Khajuraho. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सरकारी सिस्टम की एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। राजनगर जनपद के ग्राम इमलहा की रहने वाली गीता रैकवार कागजों में मृत घोषित कर दी गई हैं। जबकि असलियत में वह जीवित और गर्भवती हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब गीता अपने पति मंगलदीन के साथ उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शन लेने पहुंची थीं।

जैसे ही आधार सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई, सरकारी पोर्टल ने गीता को मृत बताते हुए उनका आधार सस्पेंड दिखा दिया। यह जानकर दंपति के पैरों तले जमीन खिसक गई। सिस्टम की इस एक गलती ने गीता के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया है। आधार सस्पेंड होने के कारण अब उन्हें न तो मुफ्त इलाज मिल पा रहा है और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ। फिलहाल, यह दंपति खुद को जिंदा साबित करने के लिए थाने और सरकारी दफ्तरों की ठोकरें खाने को मजबूर है।

यह खबरें भी पढ़ें...

ओवैसी ने हिमंत पर बोला हमला: समझ नहीं आती संविधान की बात

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कारनामा, कर दिया मृत व्याख्याता का तबादला

मृत घोषित होने के बाद गीता को क्या नुकसान हुआ?

गीता को अब सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकता है। उसे गैस कनेक्शन, इलाज, और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए परेशान होना होगा। उसने जब इस बारे में पूछा गया, तो अधिकारियों ने केवल यही कहा कि यह मामला भोपाल या दिल्ली स्तर से हल होगा।

अब जिंदा साबित होने की जद्दोजहद

पिछले एक हफ्ते से गीता और मंगलदीन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार एक ही जवाब मिलता है कि यहां से कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने बमीठा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई कि गीता रैकवार जिंदा हैं और उनका आधार कार्ड गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया है। अब उन्हें पुलिस रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए आधार में दर्ज मौत की एंट्री को हटवाने की उम्मीद है।

यह खबरें भी पढ़ें...

इंदौर में कांग्रेस की न्याय यात्रा, एकजुट हुए बड़े नेता, 1 करोड़ के मुआवजे और आपराधिक केस की मांग

20 साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा भोपाल का रहमान डकैत

सवाल उठता है: सरकारी सिस्टम पर कैसे भरोसा होगा?

यह मामला न केवल एक गलती का पर्दाफाश करता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि हमारे सिस्टम में कितना भरोसा किया जा सकता है। अगर सरकारी कागजों में जिंदा इंसान को मृत घोषित कर दिया जाता है, तो आम आदमी किस पर विश्वास करेगा?

आधार कार्ड छतरपुर उज्ज्वला योजना मृत जिंदा सरकारी लापरवाही गीता रैकवार कागजों में मृत घोषित
Advertisment