PWD में ‘सेटिंग’ से तय हो रहीं मलाईदार पोस्टिंग! जांचों में घिरे अफसर रेस में आगे
मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में इन दिनों पोस्टिंग का खेल नियमों से नहीं, बल्कि ‘सेटिंग’ से तय होता नजर आ रहा है। फिट लिस्ट और सीनियरिटी जैसे स्थापित पैमाने लगभग खत्म हो चुके हैं। नतीजा जांचों में घिरे और विवादित अफसर भी मलाईदार कुर्सियों की दौड़ में सबसे आगे दिख रहे हैं।
फिट लिस्ट गायब, ‘जुगाड़’ सिस्टम हावी
पहले इंजीनियरों की पोस्टिंग फिट लिस्ट के आधार पर होती थी, जिससे सीनियर-जूनियर का संतुलन बना रहता था। अब यह सिस्टम लगभग खत्म हो गया है।
आज स्थिति यह है कि जूनियर अफसर भी ‘सेटिंग’ के दम पर सीनियर्स को पीछे छोड़कर अहम पदों पर काबिज हो रहे हैं। विभाग में इसे लेकर अंदरखाने असंतोष बढ़ रहा है।
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जांचों के बावजूद मलाईदार कुर्सियों की होड़
PWD में कई ऐसे अधिकारी हैं जिन पर गंभीर जांचें लंबित हैं, फिर भी वे अहम पदों के दावेदार बने हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि विभागीय और शासन स्तर पर पोस्टिंग को लेकर लॉबिंग तेज है। “जिसकी सेटिंग मजबूत, वही काबिज”—यह धारणा अब खुलकर चर्चा में है।
फोकस में कई नाम: विवादों के बावजूद रेस में आगे
सबसे ज्यादा चर्चा कुछ चुनिंदा अधिकारियों को लेकर है, जो विवादों के बावजूद अहम पदों के दावेदार बने हुए हैं। इसी कड़ी में ग्वालियर PIU में पदस्थ वीके आरख का मामला सुर्खियों में है। वे भोपाल परिक्षेत्र चीफ इंजीनियर पद पर अपनी पोस्टिंग की दावेदारी सेटिंग के आधार पर मजबूती से कर रहे हैं। जबकि उनके खिलाफ पूर्व में छोला ROB निर्माण से जुड़ा वित्तीय नुकसान और जांच लंबित रहने जैसे गंभीर मुद्दे सामने आए।
क्लीनचिट पर सवाल, मामला कोर्ट तक
कुछ मामलों में विभागीय स्तर पर राहत मिल चुकी है, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एक्टिविस्ट स्तर पर न्यायालय में याचिकाएं दायर कर जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं और मामलों को दोबारा खोलने की मांग की गई है। इससे संभावित पोस्टिंग पर भी असर पड़ सकता है।
‘सेटिंग’ से पोस्टिंग तय होने की चर्चा
विभागीय गलियारों में चर्चा है कि भोपाल जैसे अहम परिक्षेत्र में पोस्टिंग के लिए अंदरखाने डीलिंग चल रही है। कई नामों को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि उनकी पोस्टिंग लगभग तय मानी जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
अन्य अधिकारी भी रडार पर
केवल एक-दो नहीं, बल्कि कई दावेदार विवादों में घिरे हैं:
- ईएनसी के पीएस राणा—राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े मामलों में जांच की चर्चा।
- आनंद राणे—लोकायुक्त स्तर तक पहुंचे मामलों में पूर्व में कार्रवाई की अनुमति को लेकर फाइलें चलीं। लेकिन अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली, हालांकि कुछ मामलों में भी उनकी जांच लंबित है।
- वीके झा (रीवा/सतना)—सतना से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताओं की जांच का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद सभी अधिकारी अहम और मलाईदार पोस्टिंग की दौड़ में बने हुए हैं।
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सवाल सिस्टम पर: योग्यता या ‘जुगाड़’?
बड़ा सवाल यही है कि क्या PWD में पोस्टिंग अब योग्यता और अनुभव से नहीं, बल्कि ‘जुगाड़’ और ‘नेटवर्क’ से तय हो रही है? अगर जांचों में घिरे अफसर ही अहम पदों पर बैठेंगे, तो पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल उठना तय है।
PWD में चल रहा यह पोस्टिंग खेल सिर्फ विभागीय मसला नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। अब नजर इस बात पर है कि शासन नियमों को प्राथमिकता देता है या ‘सेटिंग कल्चर’ को जारी रहने देता है।