दिग्विजय वाली राज्यसभा सीट पर जंग: कांग्रेस के 6 विधायकों का गणित बिगाड़ सकता है खेल

Amresh Kushwaha | Mar 11, 2026, 17:18 IST
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मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। दिग्विजय सिंह की खाली हो रही सीट पर कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह और क्रॉस वोटिंग का डर बना हुआ है।

BHOPAL. मध्य प्रदेश में आगामी 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। वर्तमान में इनमें से दो सीटों पर भाजपा के डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का कब्जा है, जबकि तीसरी सीट कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के पास है।



हालांकि, इस बार समीकरण बदले हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वे दोबारा राज्यसभा नहीं जा रहे हैं। उन्होंने मीडिया से चर्चा के दौरान साफ कहा कि मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस में करीब एक दर्जन नेता इस सीट के लिए अपनी दावेदारी (Candidacy) ठोक रहे हैं।



क्यों मुश्किल में है कांग्रेस की राह?

भले ही दावेदारों की लंबी फेहरिस्त हो, लेकिन पार्टी के भीतर इस सीट को बचाने को लेकर गहरा तनाव है। कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ नेता (जो खुद इस रेस में शामिल हैं) ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि पार्टी को सीट हारने का डर सता रहा है।



सियासी गलियारों में चर्चा है कि यदि कांग्रेस के 6 विधायक इधर से उधर हुए, तो यह सीट हाथ से निकल सकती है। आरोप लग रहे हैं कि भाजपा विपक्षी विधायकों को अगले चुनाव के टिकट और अन्य लुभावने ऑफर देकर अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है।



सत्ता और विपक्ष के बीच जुबानी जंग

इस खींचतान पर सियासत भी गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा हर जगह तोड़फोड़ की कोशिश करती है, लेकिन हमारे विधायक मजबूत हैं और यह सीट कांग्रेस के पास ही रहेगी।



वहीं, भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा अपने काम और विचारधारा पर टिकी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत है, क्योंकि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।



58 वोटों की दरकार और डगमगाते आंकड़े

इस बार का चुनावी गणित काफी दिलचस्प है। 230 सदस्यीय विधानसभा में एक उम्मीदवार को सीधे जीतने के लिए 58 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होगी। कागजों पर कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।



बीना विधायक निर्मला सप्रे पहले ही भाजपा के पाले में खड़ी हैं। इसके अलावा, विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन हाईकोर्ट ने शून्य घोषित कर दिया है। यदि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती, तो कांग्रेस के पास केवल 63 वोट बचेंगे। ऐसे में यदि 5 से 6 विधायकों ने पाला बदला या क्रॉस वोटिंग की, तो कांग्रेस का खेल बिगड़ना तय है।



क्रॉस वोटिंग का पुराना जख्म: 2020 और 2022 की यादें

कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर बेवजह नहीं है। साल 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में जब द्रौपदी मुर्मू उम्मीदवार थीं, तब कांग्रेस के करीब 19-20 विधायकों ने अपनी पार्टी लाइन से हटकर मुर्मू के पक्ष में मतदान किया था।



इससे पहले 2020 के राज्यसभा चुनाव में, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायक भाजपा में चले गए थे, तब 206 विधायकों के प्रभावी संख्या बल के आधार पर चुनाव हुआ था। उस समय दिग्विजय सिंह 57 वोट पाकर जीते थे, लेकिन आज स्थितियां बदली हुई हैं। बीएपी (BAP) के एकमात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार का रुख भी इस बार निर्णायक साबित हो सकता है।



दावेदारों की रेस में पटवारी से लेकर कमलनाथ तक

दिग्विजय सिंह की सीट के लिए कांग्रेस में दिग्गजों की लाइन लगी है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और मीनाक्षी नटराजन जैसे नाम चर्चा में हैं। वहीं, विंध्य से ओबीसी चेहरा कमलेश्वर पटेल और दलित वर्ग से सज्जन सिंह वर्मा व प्रदीप अहिरवार भी अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहे हैं। प्रदीप अहिरवार ने तो पत्र लिखकर मांग की है कि इस बार अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के किसी नेता को मौका मिलना चाहिए।



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