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Photograph: (the sootr)
News in Short
- दिग्विजय सिंह ने एमपी के बासमती चावल के लिए जीआई टैग की मांग की।
- उन्होंने केंद्र पर किसानों के साथ भेदभाव करने का सीधा आरोप लगाया है।
- मांग पूरी न होने पर दिग्विजय ने अनशन करने की चेतावनी दी है।
- रिटायरमेंट के वीडियो को उन्होंने केवल एक
साझा किया। - एमपी के 14 जिलों के किसानों को उचित दाम दिलाने की लड़ाई शुरू।
News in Detail
BHOPAL. दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट के बारे में एक मजाकिया वीडियो शेयर किया। उन्होंने वीडियो में बताया कि कैसे एक कपल बैंक से रिटायर होकर कार से पूरे भारत का भ्रमण कर रहा है। सिंह ने कहा, "मेरा रिटायरमेंट प्लान शायद ऐसा हो सकता है!" उन्होंने इस वीडियो को फेसबुक पर शेयर किया और इसे मजाकिया लहजे में पेश किया।
रंगपंचमी पर पूर्व सीएम के आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वीडियों हास परिहास के लिए डाला गया था, उसके कोई दूसरे अर्थ न निकाले जाएं। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एमपी के किसानों के साथ भेदभाव
हो रहा है। पाकिस्तान जैसा देश अपने किसानों के हितों के लिए लड़ रहा है लेकिन हमारी सरकार सो रही है।
दिग्विजय सिंह का बयान: किसानों के हक के लिए लड़ाई
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हाल ही में एमपी के किसानों के अधिकारों पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा, "हमारे किसान लंबे समय से भेदभाव का सामना कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने अब तक मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई (Geographical Indication) टैग क्यों नहीं दिया, यह समझ से परे है।"
किसानों के साथ भेदभाव
दिग्विजय ने आरोप लगाया कि मप्र के किसानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में बासमती चावल की उच्च गुणवत्ता होती है, लेकिन जीआई टैग के बिना किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने यह मुद्दा हल नहीं किया, तो वह अनशन करने पर मजबूर होंगे।
बासमती चावल का महत्व
दिग्विजय सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश के 13 जिलों में बासमती चावल की खेती होती है। इस चावल का अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीन गुना अधिक मूल्य है, लेकिन जीआई टैग के अभाव में किसान इसका सही मूल्य प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार ने 2016 में बासमती के जीआई टैग को वापस ले लिया, जबकि अन्य राज्य जैसे जम्मू-कश्मीर, पंजाब, और उत्तर प्रदेश के बासमती चावल को यह टैग मिला हुआ है।"
सिंह का पत्र और सरकार की चुप्पी
दिग्विजय ने यह भी बताया कि उन्होंने तीन महीने पहले इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने यह मुद्दा संसद में भी उठाया था, लेकिन सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
सिंह का राज्यसभा से इंकार
दिग्विजय सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वे आगामी राज्यसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने अपने कार्यकाल के खत्म होने के बाद राज्यसभा का सदस्य बनने से इनकार किया। इस फैसले के बाद एमपी में कांग्रेस के संघर्ष को और बढ़ावा मिला है।
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