MP में 18,675 करोड़ का रोड प्लान, भोपाल बायपास समेत 7 सड़कें होंगी हाईटेक

Sandeep Kumar | Jun 01, 2026, 19:06 IST
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7 hightech-roads
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मध्य प्रदेश में 7 सड़कें HAM मॉडल में बनेंगी। सरकार और निजी निवेशक निर्माण करेंगे। टोल वसूली पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में होगी। भोपाल बायपास भी इन परियोजनाओं में शामिल है। कुल अनुमानित लागत 18 हजार 675 करोड़ रुपए है।

समझें पूरा मामला...

  • भोपाल बायपास समेत 7 सड़कें HAM मॉडल में विकसित होंगी।
  • कुल लंबाई 489 किमी और अनुमानित लागत 18,675 करोड़ रुपए।
  • HAM मॉडल में सरकार 40%, निजी निवेशक 60% खर्च करेगा।
  • सड़क बनने के बाद टोल वसूली पूरी तरह सरकार के पास रहेगी।
  • परियोजनाओं से कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यातायात सुविधा बढ़ेगी।
मध्य प्रदेश में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति मिलेगी। भोपाल बायपास समेत 7 सड़कें HAM (हाइब्रिड एन्युटी मॉडल ) मॉडल में विकसित होंगी। सरकार और निजी निवेशक मिलकर निर्माण करेंगे। निर्माण के बाद टोल वसूली पूरी तरह सरकार करेगी। कुल लंबाई 489 किलोमीटर और लागत 18,675 करोड़ रुपए तय की गई है।

सड़क परियोजनाओं का विस्तार

मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने सात प्रमुख सड़क परियोजनाओं का प्रस्ताव राज्य स्तरीय समिति को भेजा है। प्रस्तावित परियोजनाओं में राजधानी भोपाल का ईस्टर्न बायपास भी शामिल है। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई 489 किलोमीटर है और अनुमानित लागत 18,675 करोड़ रुपए है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

HAM यानी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल क्या है

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (Hybrid Annuity Model) केंद्र सरकार द्वारा 2016 में शुरू किया गया एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल है। इसका उद्देश्य निजी निवेशकों का जोखिम कम करना और अधूरी परियोजनाओं को गति देना है। इस मॉडल में सरकार और निजी कंपनी दोनों निर्माण के वित्तीय जोखिम साझा करते हैं।

HAM मॉडल की वित्तीय संरचना

HAM मॉडल में परियोजना की कुल लागत का 40 प्रतिशत सरकार वहन करती है। शेष 60 प्रतिशत निवेश निजी डेवलपर करता है। निर्माण पूरा होने के बाद सरकार निजी कंपनी को निवेश की राशि ब्याज सहित 15-20 वर्षों में छमाही किस्तों में वापस करती है। सड़क के रखरखाव और संचालन के लिए भी भुगतान किया जाता है।

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निजी कंपनी नहीं वसूलेगी टोल

HAM मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि सड़क बनने के बाद टोल वसूली निजी कंपनी के पास नहीं होगी। टोल संग्रह पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में रहेगा। इससे सरकारी नियमन और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। निवेशक अपनी हिस्सेदारी सरकार से समय पर प्राप्त करेंगे।

सड़क विकास को नई रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि HAM मॉडल से सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित होगी। वित्तीय जोखिम साझा होने से परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा। इससे प्रदेश की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। बड़े शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच यातायात की सुविधा बढ़ेगी।

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