एमपी के धनकुबेर सौरभ शर्मा का मुद्दा विधानसभा में गूंजा, कहां तक पहुंचा केस, जानें

Amresh Kushwaha | Feb 19, 2026, 13:20 IST
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मध्यप्रदेश की सियासत में इन दिनों एक पूर्व आरक्षक की अकूत संपत्ति चर्चा का केंद्र बनी हुई है। कभी परिवहन विभाग में मामूली सिपाही रहे सौरभ शर्मा का मामला अब विधानसभा की दहलीज तक पहुंच गया है। उनके ठिकानों पर छापेमारी ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी।

विधानसभा में उठा सवाल: पूर्व मंत्री ने घेरा

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र (MP Budget 2026-27) के दौरान पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने यह मुद्दा उठाया है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल किया कि परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर अब तक किन-किन एजेंसियों ने क्या कार्रवाई की है? विधायक का इशारा उस 'कुबेर' के खजाने की ओर था, जिसका खुलासा कुछ समय पहले हुआ था।



सवा साल बाद भी 'जानकारी एकत्रित की जा रही है'

इस मामले में सबसे हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री (गृह विभाग) की ओर से लिखित जवाब दिया गया कि जानकारी एकत्रित की जा रही है। ध्यान देने वाली बात ये है कि दिसंबर 2024 में हुई इस बड़ी कार्रवाई को अब सवा साल हो चुका है।



ऐसे में प्रदेश सरकार के रिकॉर्ड में अपडेट जानकारी न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या एजेंसियां आपस में समन्वय नहीं कर पा रही हैं, या फिर इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है?



लोकायुक्त की छापेमारी में मिली थी करोड़ों की संपत्ति

19 और 20 दिसंबर 2024 को लोकायुक्त की टीम ने सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी में जो सामान बरामद हुआ, वह किसी फिल्म की कहानी जैसा था:



  • नकद राशि: दो करोड़ 83 लाख 23 हजार कैस बरामद किया गया था।
  • सोना और हीरा: 50 लाख 37 हजार 425 रुएप की कीमत के 558.64 ग्राम सोने के आभूषण और 10.80 कैरेट के डायमंड आभूषण मिले थे।
  • चांदी: करीब 233.936 किलो चांदी बरामद हुई थी। इसकी कीमत दो करोड़ 10 लाख 50 हजार 716 बताई गई है।
  • अचल संपत्ति: दस्तावेजों के हिसाब से 30 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी का खुलासा हुआ था।
  • अन्य निवेश: तीन करोड़ आठ लाख 46 हजार 158 रुपए की बैंक एफडी और करीब दो करोड़ 54 लाख रुपए के वाहन और घरेलू सामान भी मिले थे।

इसके अलावा, जांच के दौरान एक लावारिस कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए नकद भी बरामद हुआ था।



ED और IT की भी हो चुकी एंट्री

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) ने मोर्चा संभाला था। फरवरी 2025 में ED ने सौरभ शर्मा और उसके करीबियों को गिरफ्तार किया था। केंद्रीय एजेंसी ने लगभग 92 करोड़ रुपए की संपत्ति को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद विधानसभा में 'जानकारी जुटाने' का सरकारी तर्क विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे रहा है।



सिपाही से कुबेर बनने का सफर

सौरभ शर्मा का करियर किसी को भी हैरान कर सकता है। साल 2015 में अनुकंपा नियुक्ति पर परिवहन विभाग में भर्ती हुए थे। महज 8 साल में उन्होंने वीआरएस ले लिया था। इतने कम समय में करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया था। वहीं, अब उनका यह साम्राज्य कानूनी और राजनीतिक जांच के घेरे में है।



जानें आयकर विभाग के दायरे में कौन सी संपत्तियां हैं?

आयकर विभाग की जांच का दायरा अब सौरभ शर्मा के रिश्तेदारों की संपत्तियों तक फैल चुका है। इन संपत्तियों में जमीनों के अलावा अन्य संपत्तियों की खरीदी भी शामिल है, जो रिश्तेदारों के नाम पर की गई हैं। विभाग का उद्देश्य यह है कि ये संपत्तियां बेनामी कानून के तहत अटैच की जा सकें।



बेनामी प्रॉपर्टी क्या है?

बेनामी प्रॉपर्टी का मतलब है वह संपत्ति जो किसी और के नाम पर हो। असल मालिक कोई और होता है। आयकर विभाग और अन्य एजेंसियां ऐसी संपत्तियों को अवैध धन के मामले में अटैच करती हैं। बेनामी संपत्ति अधिनियम 1988 के तहत ये संपत्तियां जब्त की जाती हैं। इन संपत्तियों के असली मालिकों की पहचान छिपाई जाती है।



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