MP के इस गांव में भीषण जलसंकट, पलायन को मजबूर हुए ग्रामीण, घरों में लटक रहे ताले

Vikram Jain | Apr 15, 2025, 23:54 IST
MP Sehore Khamlia village water crisis upset villagers
सीहोर के कई गांव भीषण जलसंकट की चपेट में आ गए हैं। जिला मुख्यालय के लगे ग्राम खामलिया में हालत इतने गंभीर हो गए हैं कि पानी के लिए परेशान 50 परिवार के लोगों ने गांव छोड़ दिया है। गांव के कई घरों में ताले लटके हुए हैं।

नफीस खान@ Sehore



मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में कई गांवों में जलसंकट गहराते जा रहा है। पानी की समस्या के कारण अब ग्रामीण पलायन को मजबूर हैं। ग्राम खामलिया में हालत इतने गंभीर हो गए हैं कि गांव के सभी एक दर्जन हैंडपंपों के कंठ पूरी तरह से सूख चुके हैं। बड़ी हैरानी की बात यह है कि कि इस गांव की नल-जल योजना बंद पड़ी है। भीषण जलसंकट के कारण अब तक 50 परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं, और जो लोग गांव में रह हैं वे पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।



पानी के लिए मची त्राहि-त्राहि

दरअसल, सीहोर जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर स्थित खामलिया गांव में भीषण जलसंकट ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। इस गांव कई सालों से पानी की समस्या से परेशान है, लेकिन इस साल जलसंकट विकराल रूप ले चुका है। पीने के पानी के लिए ग्रामीण दिन रात एक कर रहे हैं। इसके बाद भी पानी की व्यवस्था मुश्किल से हो पा रही है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव के हैंडपंपों में पानी नहीं है। साथ ही नलकूप नाकारा हो गए हैं। गांव के कुओं की हालत भी यही हैं। गांव में नल-जल योजना के नल तो लगे हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आता है। गांव में पानी का कोई अन्य स्रोत नहीं है। जिसके कारण ग्रामीण पलायन को मजबूर हैं।



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घरों पर लटक गए ताले, गांव से पलायन जारी

तीन हजार आबादी वाले खामलिया गांव में जल संकट ने ग्रामीणों को परेशानी में डाल दिया है। गांव के लोग हर गांव छोड़कर अन्य गांवों में या शहरों में पलायन करने पर मजबूर हैं। गांव के मुकेश पटेल, सजन सिंह, राकेश मेवाड़ा ने बताया कि गांव में भीषण जलसंकट बना हुआ है। लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। पानी की समस्या के कारण गांव के 50 से अधिक परिवार गांव छोड़कर पलायन कर चुके हैं और उनके घरों पर ताले लटक गए हैं। गांव छोड़कर जाने वालों की संख्या में हर दिन बढ़ रही है।



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गांव के हैंडपंपों पानी नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पेयजल के लिए आधा दर्जन हैंडपंप ही सहारा है। गांव के कुएं गर्मी आने के पहले ही सूख चुके हैं। गांव के हैंडपंपों ने भी पूरी तरह से साथ छोड़ दिया है। लोगों ने यह भी बताया कि पानी के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल के लिए ग्रामीण दूसरे गांव पर आश्रित हैं। जिनके पास साधन है। वह अपने साधनों से दूसरे गांव से पानी भरकर ला रहे हैं, लेकिन जिनके पास साधन नहीं है। उन्हें पानी के लिए दिन-रात एक करना पड़ रहा है।



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आदेश हुए लेकिन नहीं लगे हैंडपंप

ग्रामीणों की मानें तो गांव में जलसंकट को लेकर पीएचई मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों को करीब डेढ़ माह पहले ही शिकायत की जा चुकी है। शिकायत के बाद गांव में तीन हैंडपंप खनन के आदेश भी जारी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक हैंडपंप खनन का कार्य नहीं हो सका है। इसके चलते गांव में जलसंकट ने विकराल रूप ले लिया है। समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने कहा कि गांव की जल समस्या का निवारण हैंडपंप खनन से नहीं होगा। गांव के तालाब का गहरीकरण, कुओं की सफाई, जल सरंक्षण के तहत स्टापडेम आदि का भी निर्माण किया जाना चाहिए।



5 रुपए में मिल रहा एक केन पानी

पेयजल संकट की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव में पांच रुपए में एक कुप्पा पानी मिल रहा है। कुछ लोग दूसरे गांवों से टैंकरों के माध्यम से पानी लाकर गांव में बेच रहे हैं। ग्रामीण भी मजबूरी में पानी खरीदने पर मजबूर हैं। गांव की चतर बाई, देव बाई, सौरम बाई ने बताया कि लाड़ली बहनों की मिलने वाली राशि पानी खरीदने पर जा रही है। इसके बाद भी पानी का इंतजाम नहीं हो पा रहा है।



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जल संकट से निपटने कर रहा है प्रयास

मामले में ग्राम सरपंच कुलदीप सिंह राजपूत का कहना है कि गांव में पांच हैंडपंप हैं, जिनमें से तीन पूरी तरह सूख चुके हैं। बाकी दो में भी थोड़ा-बहुत ही पानी बचा है। चार कुएं थे, वो भी सूख चुके हैं। तीन बोर के लिए आवेदन दिए हैं। इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ नेहा जैन ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। यहां पानी की समस्या बनी हुई है। हम लोग पीएचई के साथ इस क्षेत्र की जांच करेंगे। बोरिंग के आवेदन पर पीएचई काम कर रहा है।



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