एमपी में फिर गठित होगा स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल: सरकार ने तैयार किया ड्राफ्ट
Sanjay Dhiman | Jun 03, 2026, 19:09 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों और हाई कोर्ट में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने के लिए मोहन यादव सरकार बड़ा कदम उठा रही है। सरकार 23 साल बाद राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (SAT) को दोबारा गठित करने जा रही है।
पांच पाइंट में समझें पूरा मामला
- मध्य प्रदेश सरकार 23 साल बाद स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल फिर से शुरू कर रही है।
- हाई कोर्ट में पेंडिंग कर्मचारियों के करीब 4.5 लाख मामलों का बोझ कम होगा।
- सरकारी कर्मचारियों को भर्ती, प्रमोशन, वेतन और पेंशन विवाद में जल्दी न्याय मिलेगा।
- जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में लंबित मामलों की संख्या घटेगी।
- मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की सहमति के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ड्राफ्ट तैयार कर रहा है।
क्यों लिया सरकार ने यह फैसला?
क्या करेगा यह ट्रिब्यूनल?
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ट्रिब्यूनल का सफर: स्थापना से खात्मे और अब वापसी तक
दिग्विजय सरकार ने क्यों किया था बंद?
13 साल के काम का लेखा-जोखा
कैसे बनेगा नया ट्रिब्यूनल? सरकार की क्या तैयारी?
दूसरे राज्यों की स्टडी और नया ड्राफ्ट
निष्कर्ष
FAQ
- 1. मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (SAT) का मुख्य कार्य क्या है और इससे क्या फायदा होगा?
मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल का मुख्य कार्य राज्य सरकार के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवादों और शिकायतों की सुनवाई करना है। इससे कर्मचारियों को फायदा यह होगा उन्हें अब सीधे हाई कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। - एमपी में ट्रिब्यूनल को क्यों बंद किया गया था और अब इसे फिर से शुरू करने की क्या आवश्यकता पड़ी?
एमपी में ट्रिब्यूनल को 2001 में मध्य प्रदेश के पुनर्गठन और प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर बंद किया गया था। अब इसे फिर से शुरू करने की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि एमपी हाई कोर्ट में कर्मचारियों के सेवा संबंधी करीब साढ़े चार लाख केस लंबित हैं, जिससे अदालतों पर बोझ बहुत बढ़ गया है और फैसलों में देरी हो रही है। - क्या ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है?
हां, ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है। जब यह ट्रिब्यूनल पहले काम कर रहा था, तब भी व्यवस्था थी कि ट्रिब्यूनल के निर्णयों के खिलाफ सीधे हाई कोर्ट में अपील की जा सकती थी। नई व्यवस्था में भी, ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद ही कर्मचारी हाई कोर्ट में अपील कर सकेंगे।
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