एमपी में 769 दिन में 987 छात्रों ने दी जान, अब हर महीने होगी बच्चों की मॉनिटरिंग
Sanjay Dhiman | Sept 07, 2026, 17:10 IST
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मध्य प्रदेश में रोज 42 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। अब उच्च शिक्षा विभाग हर महीने छात्रों की आत्महत्या का डेटा जुटाएगा। विधानसभा में सरकार ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। सरकार अब इस पर अंकुश लगाने ठोस उपाए करने जा रही है।
मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन 42 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या छात्रों की भी है। इस बात की जानकारी विधानसभा में खुद सरकार ने बीते दिनों दी थी। इस समस्या को लेकर अब उच्च शिक्षा विभाग हर महीने छात्रों की आत्महत्या का डेटा इकट्ठा करेगा। कॉलेज और यूनिवर्सिटी को हर महीने रिपोर्ट देनी होगी। इसमें छात्रों की मौत की वजह भी बतानी होगी।
मध्य प्रदेश विधानसभा में हाल ही में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया। 769 दिनों में प्रदेश में 987 छात्रों ने आत्महत्या की। इसी अवधि में 562 किसानों और 667 खेत मजदूरों ने भी जान दी।
कुल मिलाकर इस दौरान 32,385 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए। यानी हर दिन औसतन 42 लोग यह खौफनाक कदम उठा रहे हैं। यह जवाब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में लिखित रूप में दिया था।
यह सवाल कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई ने पूछा था। मुख्यमंत्री ने माना कि हर मामले की वजह अलग होती है।
इन आंकड़ों के बाद सरकार हरकत में आई है। युवाओं की आत्महत्या रोकने के लिए पहले ही एक टास्क फोर्स बनाई गई थी। अब उच्च शिक्षा विभाग भी इस पर सीधे नजर रखेगा।
विभाग अब हर महीने ऐसे छात्रों की रिपोर्ट लेगा जिन्होंने आत्महत्या की है। अगर किसी छात्र की असामान्य मौत हुई है तो उसकी जानकारी भी देनी होगी। यह जिम्मेदारी कॉलेज और यूनिवर्सिटी प्रशासन की होगी।
जिला स्तर पर पहले से एक मॉनिटरिंग सेल काम कर रही है। यह सेल छात्रों को तनाव मुक्त रखने में मदद करती है। इसकी मासिक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी जा रही है।
उच्च शिक्षा विभाग मंगलवार 08 सितंबर को एक बड़ी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक करेगा। इसमें प्रदेश के सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी के प्राचार्य और कुल सचिव शामिल होंगे।
बैठक का एक बड़ा एजेंडा छात्रों की आत्महत्या से जुड़ा है। हर शैक्षणिक संस्थान को हर महीने 20 तारीख तक तय फॉर्मेट में रिपोर्ट देनी होगी।
इस रिपोर्ट में बताना होगा कि पिछले महीने कितने छात्रों ने आत्महत्या की। उनका नाम और मौत की वजह भी लिखनी होगी। अगर कोई ऐसी घटना नहीं हुई तो भी निल रिपोर्ट देनी होगी।
बैठक में सिर्फ आत्महत्या का मुद्दा नहीं उठेगा। कई और विषयों पर भी समीक्षा होगी।
कॉलेजों को अपने निर्माण और मरम्मत कार्यों की जानकारी देनी होगी। बिना अनुमति गैरहाजिर रहने वाले स्टाफ की जानकारी भी मांगी गई है। स्टाफ के वेतन भुगतान में देरी की भी समीक्षा होगी।
सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline – मुख्यमंत्री हेल्पलाइन) में 50 दिन से ज्यादा पुरानी शिकायतों पर भी बात होगी। डी ग्रेड पाने वाली यूनिवर्सिटी की भी चर्चा होगी। जिन कॉलेजों ने पिछले साल का बजट खर्च नहीं किया, उन्हें नया प्रस्ताव भेजना होगा।
अतिथि विद्वानों के खाली पदों की जानकारी भी हर महीने 14 और 30 तारीख को आईएफएमएस (IFMS – Integrated Financial Management System) में दर्ज करनी होगी।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब फरवरी-2026 में विधानसभा में सवाल पूछा गया था। उस समय जवाब में सरकार ने माना कि प्रदेश में स्थिति गंभीर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उच्च शिभा विभाग की नई पहल को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं है। हर आंकड़े के पीछे एक परिवार की टूटी हुई उम्मीद है। अब देखना होगा कि नई मॉनिटरिंग व्यवस्था कितना असर दिखाती है।
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हर रोज जा रही 42 जानें
कुल मिलाकर इस दौरान 32,385 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए। यानी हर दिन औसतन 42 लोग यह खौफनाक कदम उठा रहे हैं। यह जवाब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में लिखित रूप में दिया था।
यह सवाल कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई ने पूछा था। मुख्यमंत्री ने माना कि हर मामले की वजह अलग होती है।
उच्च शिक्षा विभाग की नई पहल
विभाग अब हर महीने ऐसे छात्रों की रिपोर्ट लेगा जिन्होंने आत्महत्या की है। अगर किसी छात्र की असामान्य मौत हुई है तो उसकी जानकारी भी देनी होगी। यह जिम्मेदारी कॉलेज और यूनिवर्सिटी प्रशासन की होगी।
जिला स्तर पर पहले से एक मॉनिटरिंग सेल काम कर रही है। यह सेल छात्रों को तनाव मुक्त रखने में मदद करती है। इसकी मासिक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी जा रही है।
मंगलवार को होगी अहम बैठक
बैठक का एक बड़ा एजेंडा छात्रों की आत्महत्या से जुड़ा है। हर शैक्षणिक संस्थान को हर महीने 20 तारीख तक तय फॉर्मेट में रिपोर्ट देनी होगी।
इस रिपोर्ट में बताना होगा कि पिछले महीने कितने छात्रों ने आत्महत्या की। उनका नाम और मौत की वजह भी लिखनी होगी। अगर कोई ऐसी घटना नहीं हुई तो भी निल रिपोर्ट देनी होगी।
और किन मुद्दों पर चर्चा
कॉलेजों को अपने निर्माण और मरम्मत कार्यों की जानकारी देनी होगी। बिना अनुमति गैरहाजिर रहने वाले स्टाफ की जानकारी भी मांगी गई है। स्टाफ के वेतन भुगतान में देरी की भी समीक्षा होगी।
सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline – मुख्यमंत्री हेल्पलाइन) में 50 दिन से ज्यादा पुरानी शिकायतों पर भी बात होगी। डी ग्रेड पाने वाली यूनिवर्सिटी की भी चर्चा होगी। जिन कॉलेजों ने पिछले साल का बजट खर्च नहीं किया, उन्हें नया प्रस्ताव भेजना होगा।
अतिथि विद्वानों के खाली पदों की जानकारी भी हर महीने 14 और 30 तारीख को आईएफएमएस (IFMS – Integrated Financial Management System) में दर्ज करनी होगी।
विधानसभा में उठ चुका है सवाल
यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं है। हर आंकड़े के पीछे एक परिवार की टूटी हुई उम्मीद है। अब देखना होगा कि नई मॉनिटरिंग व्यवस्था कितना असर दिखाती है।
FAQ
- एमपी में हर दिन कितने लोग आत्महत्या कर रहे हैं?
मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन 42 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। यह आंकड़ा 769 दिनों के डेटा पर आधारित है। यह जानकारी विधानसभा में सरकार ने दी है। - उच्च शिक्षा विभाग अब क्या नया कदम उठा रहा है?
विभाग अब हर महीने छात्रों की आत्महत्या का डेटा जुटाएगा। कॉलेज और यूनिवर्सिटी को हर महीने रिपोर्ट देनी होगी। इसमें मौत की वजह भी बतानी होगी। - यह रिपोर्ट कब तक जमा करनी होगी?
हर शैक्षणिक संस्थान को हर महीने की 20 तारीख तक रिपोर्ट देनी होगी। अगर कोई घटना नहीं हुई तो भी निल रिपोर्ट देनी होगी।
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