पीजी में 45% अंक में भी बन गए शिक्षक, ज्यादा नंबर वाले हुए बाहर
Ravi Kant Dixit | Jul 25, 2024, 13:01 IST
शिक्षक भर्ती
स्नातकोत्तर यानी पीजी में 45 प्रतिशत अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को शिक्षक नियुक्त कर दिया गया है। इसके उलट अधिक अंक वाले अभ्यर्थियों को अवसर ना देते हुए बाहर कर दिया गया।
मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया किसी न किसी रूप में चर्चाओं में बनी ही रहती है। अब ताजा मामला स्कूल शिक्षा विभाग और आदिम जाति कल्याण विभाग की शिक्षक भर्ती से जुड़ा है। शिक्षक भर्ती नियम 2018 की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है।
इसमें कहा गया है कि स्नातकोत्तर यानी पीजी में 45 प्रतिशत अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को शिक्षक नियुक्त कर दिया गया है। इसके उलट अधिक अंक वाले अभ्यर्थियों को अवसर ना देते हुए बाहर कर दिया गया। कहा जा रहा है कि ऐसा शिक्षक भर्ती के असंगत नियमों के चलते हुआ है।
अब हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायाधीश विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार को चार सप्ताह में शिक्षकों की भर्ती से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि ऐसे कितने अभ्यर्थी हैं, जिन्हें पीजी में 45 से 50 फीसदी अंक प्राप्त हैं और उन्हें नियुक्ति दी गई है। अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।
दरअसल, जबलपुर निवासी अवनीश त्रिपाठी, रायसेन के प्रदीप अहिरवार, राजस्थान के हुसैन मोहम्मद और सागर के हेमंत चौधरी ने याचिका दायर कर राज्य सरकार के शिक्षक भर्ती नियम 2018 की संवैधानिकता को चुनौती दी है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में अलग-अलग विश्वविद्यालयों में द्वितीय व तृतीय श्रेणी में विभेद है। इसे लेकर अभ्यर्थी परेशान हैं।
याचिका में बताया कि कुछ विश्वविद्यालयों में 35 से 45 प्रतिशत को तृतीय श्रेणी और 45-50 फीसदी अंक को द्वितीय श्रेणी माना गया है। कुछ में 35 से 50 प्रतिशत को तृतीय और 50 से 59 फीसदी अंक को द्वितीय श्रेणी माना है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार का नियम एनसीटीई के नियम से अलग है। एनसीटीई के अनुसार संबंधित विषय में स्नातकोत्तर में 55 प्रतिशत अंक और बीएड पास ही हाईस्कूल शिक्षक की पात्रता रखता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है।
द सूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट के साथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें
इसमें कहा गया है कि स्नातकोत्तर यानी पीजी में 45 प्रतिशत अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को शिक्षक नियुक्त कर दिया गया है। इसके उलट अधिक अंक वाले अभ्यर्थियों को अवसर ना देते हुए बाहर कर दिया गया। कहा जा रहा है कि ऐसा शिक्षक भर्ती के असंगत नियमों के चलते हुआ है।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा रिकॉर्ड
यह है मामला
राज्य सरकार का नियम एनसीटीई से अलग
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
द सूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट के साथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें
मंडला में बनेगा टाइगर सफारी जू, सीएम मोहन यादव की घोषणा, तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिला 36 करोड़ का बोनस
By Sanjay Dhiman
बच्चों के भोजन का अधिकार: आधार नहीं तो भी मिले आंगनवाड़ी और मध्याह्न भोजन, भोपाल अधिवेशन में उठी मांग
By Sandeep Kumar
पुलिस की ड्यूटी 55 जिलों में, इलाज का नेटवर्क क्यों रह गया पीछे? कैशलेस सुरक्षा में अस्पतालों की पहुंच बनी बड़ा सवाल
By Ramanand Tiwari
मध्यप्रदेश में फार्मासिस्ट के 1132 पद खाली, सरकारी अस्पताल से दवा सुरक्षा तक निगरानी किसके भरोसे?
By Ramanand Tiwari
इंदौर बैठक में हंगामा, कांग्रेस कार्यकर्ता बोले- राहुल गांधी से हमें नहीं मिलवाया, बड़े नेता मिल लिए
By Sanjay Gupta
mp top news: खबरें काम की...विकास पर 1 लाख करोड़ खर्च करेगी मोहन सरकार, एमपी के प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान योजना का करेंगे बहिष्कार
By Sanjay Dhiman
IDA की स्कीम 171 के पीड़ित फिर उतरेंगे मैदान में, मीटिंग में बोले, BJP को जीवन भर से दे रहे वोट
By Sanjay Gupta