एमपी में शिकार, टेरिटोरियल फाइट के बाद अब संक्रमण बना बाघों का काल, 5 माह में मारे गए 28 बाघ
Sanjay Sharma | May 07, 2026, 21:43 IST
mp tiger deaths
मध्यप्रदेश में 2026 के पहले 5 महीने में 28 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से 12 मौतें अप्रैल के बाद हुई हैं। 2025 में रिकॉर्ड 55 बाघ मरे थे। NTCA डेटा से यह चिंता बढ़ी है। कान्हा और बांधवगढ़ में भी बाघों की मौत के मामले सामने आए हैं।
News in Short
- 2026 में 5 माह में 28 बाघों की गई जान।
- शिकार और आपसी संघर्ष के बाद संक्रमण बना खतरा।
- 2025 में सबसे ज्यादा 55 बाघों की मौत हुई।
- एमपी में देश में सबसे ज्यादा 780 बाघ।
- शिकार, इलाके का संघर्ष, हैबिटेट स्ट्रेस।
News in Short
इनमें 12 मौतें सिर्फ अप्रैल की शुरुआत के बाद हुईं। 2025 में राज्य में रिकॉर्ड 55 बाघ मरे थे। यह 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद एक साल का सबसे बड़ा आंकड़ा है। भारत में 3000 से ज्यादा बाघ हैं। इनमें 780 अकेले एमपी में हैं। फिर भी मौतें सबसे ज्यादा यहीं हो रही हैं। कान्हा और बांधवगढ़ जैसे रिजर्व में भी केस सामने आए हैं।
बढ़ती मौतों का ट्रेंड
2024 में 126 मौतें थीं। 2026 का ट्रेंड भी चिंता बढ़ा रहा है। सिर्फ 5 महीने में 28 मौतें हो चुकी हैं। 2026 में पहली मौत 7 जनवरी को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हुई। इसके बाद कान्हा, पेंच से भी मामले आए। वहीं 2024-25 में इसी अवधि में 16 से 19 मौतें हुई थी जबकि इस बार अब तक पांच माह में 28 बाघ मारे गए हैं।
क्यों मारे जा रहे बाघ
2. दूसरी वजह इलाके का संघर्ष है। मध्य प्रदेश में लगातार बाघों की संख्या बढ़ने से टेरिटोरियल फाइट के मामले भी बढ़े हैं। वयस्क बाघ के लिए 50 से 100 वर्ग किलोमीटर जंगल की जरूरत होती है। प्रदेश में बाघों की दर्ज संख्या 780 से ज्यादा है। जबकि रिवर्ज वन क्षेत्र 11 हजार वर्ग किलोमीटर के करीब है। यह बाघों की संख्या के अनुपात में बहुत कम है।
3. तीसरी वजह हैबिटेट स्ट्रेस यानी बाघों के लिए सिकुड़ते जंगल हैं। इसके कारण बाघों को पर्याप्त शिकार और पानी का संकट हो रहा है। इसके लिए जंगलों में बढ़ता खनन, सड़कों का निर्माण और वाइल्ड लाइफ टूरिज्म की होड़ भी जिम्मेदार है। प्रदेश सरकार जंगलों में पर्यटन की संभावनाएं तलाश रही है और इसका बुरा असर बाघों पर पड़ रहा है।
4. चौथा कारण इंसानों से संघर्ष है। जंगलों में शिकार और पानी की कमी के कारण बाघ अकसर आसपास की बसाहटों की ओर आ जाते हैं। मवेशियों को शिकार बनाने और ग्रामीणों पर हमले की घटनाओं के कारण जवाबी हमलों में बाघों की जान भी जा रही है।
बाघों का काल बना CVD
क्या है CDV संक्रमण
टाइगर स्टेट पर दबाव
NTCA ने मांगी रिपोर्ट
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