एमपी का पानी पीने लायक नहीं, 52 में से 50 के सैंपल फेल, NGT सख्त

Aman Vaishnav | Jul 24, 2026, 12:15 IST
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एमपी का पानी पीने लायक नहीं
एमपी का पानी पीने लायक नहीं

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भूजल के 52 नमूने जांचे थे। इनमें से 50 नमूनों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया। वहीं 40 नमूनों में खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हैजा फैला था।
  • दिसंबर 2025 में इससे 36 लोगों की मौत हो गई थी।
  • हाईकोर्ट ने 29 बिंदुओं की गाइडलाइन जारी की थी।
  • अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मामले पर संज्ञान लिया है।
  • NGT ने इन नियमों को पूरे मध्यप्रदेश में लागू करने का आदेश दिया है।
मध्यप्रदेश में अब पीने के पानी की डिजिटल निगरानी होगी। यह फैसला इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में फैले हैजा के बाद लिया गया है।

बता दें कि दिसंबर 2025 में यहां दूषित पानी पीने से 36 लोगों की जान चली गई थी। सैकड़ों लोग बीमार पड़े थे। इस घटना ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया था।

हाईकोर्ट ने इस मामले में 29 बिंदुओं की एक गाइडलाइन जारी की थी। अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भी इस पर संज्ञान लिया है।

सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि जल प्रदूषण सिर्फ इंदौर की समस्या नहीं है। यह पूरे मध्यप्रदेश की समस्या है। इसलिए हाईकोर्ट के सुझाए उपाय पूरे राज्य में लागू करने होंगे।

जांच में क्या मिला

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भूजल के 52 नमूने जांचे थे। इनमें से 50 नमूनों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया। वहीं 40 नमूनों में खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला। यह आंकड़े बताते हैं कि कई इलाकों में पेयजल स्रोत गंदगी से बुरी तरह प्रभावित हैं।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इंदौर में हैजा फैलने की सबसे बड़ी वजह दूषित घरेलू पेयजल बताई गई। सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिल गया था।

इसी वजह से संक्रमण तेजी से फैला। ज्यादातर मरीजों ने पानी के स्वाद और गंध में बदलाव की शिकायत की थी।

जांच में एक और बड़ी बात सामने आई है। प्रभावित परिवारों में पानी उबालकर या फिल्टर करके पीने की आदत नहीं थी। इससे संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया।

अब मिलेगी हेल्पलाइन और ऐप की सुविधा

हाईकोर्ट ने नगर निगमों को साफ निर्देश दिए हैं। इससे अब हर शहर में 24x7 हेल्पलाइन शुरू करनी होगी। साथ ही एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च करना होगा। इस ऐप पर लोग अपने इलाके के पानी की गुणवत्ता देख सकेंगे।

ऐप में ओवरहेड टंकियों की सफाई की तारीख भी दिखेगी। अगली सफाई कब होगी यह जानकारी भी मिलेगी। लोग अपनी शिकायत की स्थिति भी ट्रैक कर सकेंगे। इस ऐप को नगर निगम के 311 ऐप से भी जोड़ा जा सकता है। इससे नागरिकों को एक ही जगह पूरी जानकारी मिलेगी।

भोपाल में भी मिली गड़बड़ी

भोपाल में भी पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता सामने आई है। नगर निगम की जांच में चार बोरवेल में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। निगम का कहना है कि इन बोरवेल को अब बंद कर दिया गया है। यह घटना बताती है कि खतरा सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है।

अफसरों की तय होगी जवाबदेही

NGT ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। जलापूर्ति नेटवर्क के संचालन में लापरवाही करने वाले अफसरों की जिम्मेदारी तय होगी।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आम नागरिकों को नहीं भुगतना चाहिए। रखरखाव और निगरानी में कमी मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

सुनवाई और आगे की प्रक्रिया

बता दें कि गुरुवार को एनजीटी में इस मामले की सुनवाई हुई। राशिद नूर खान और कमल कुमार राठी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं।

याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी और हरप्रीत गुप्ता ने पक्ष रखा। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।

ट्रिब्यूनल ने एमपीपीसीबी की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया है। अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को तय की गई है। हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग भी इस मामले की जांच कर रहा है। उसकी रिपोर्ट आगे की सुनवाई में अहम आधार बनेगी।

यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि पीने के पानी की सुरक्षा अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रहा है। यह एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य मामला बन चुका है। आने वाले समय में इसका असर पूरे प्रदेश की जलापूर्ति व्यवस्था पर दिख सकता है।

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