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News In Short
ग्रुप 2 सब ग्रुप 4 की भर्ती में 9000 से अधिक पदों का विज्ञापन जारी हुआ था।
सहायक नगर निवेशक और अतिक्रमण निरोधक अधिकारी के 86 पद खाली रह गए।
मेरिट लिस्ट में 4337 अभ्यर्थियों के नाम, लेकिन बड़ी संख्या में अपात्र।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान 86 में से सिर्फ 10 के पास जरूरी डिग्री मिली।
हाईकोर्ट ने सरकार, नगरीय प्रशासन विभाग और ESB को नोटिस जारी किया।
News in detail
साल 2022-23 में MPESB ने ग्रुप 2 सब ग्रुप 4 के तहत नौ हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें सहायक नगर निवेशक और सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी के पद भी शामिल थे।
यह पद भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, रीवा और सतना जैसे जिलों की नगर पालिकाओं में थे, जहां कुल 86 पद खाली थे। परीक्षा हुई, रिजल्ट भी आ गया और मेरिट लिस्ट भी जारी हो गई, लेकिन इन पदों पर अभी तक कोई नियुक्ति नहीं हो पाई है। बता दें कि MPESB (मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड) को पहले व्यापम के नाम से जाना जाता था।
मास्टर्स डिग्री अनिवार्य, फिर भी बिना योग्यता मेरिट में
इन पदों के लिए कंट्री एंड टाउन प्लानिंग में मास्टर्स डिग्री अनिवार्य थी। वहीं, परीक्षा फॉर्म भरते समय ना तो दस्तावेज अपलोड किए गए और ना ही कोई प्रारंभिक जांच हुई थी।
नतीजा यह हुआ कि बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों ने परीक्षा दे दी जिनके पास जरूरी डिग्री ही नहीं थी। कुल चार हजार 337 अभ्यर्थियों के नाम सेलेक्ट और वेटिंग लिस्ट में आ गए थे।
86 में से सिर्फ 10 निकले योग्य
जब मेरिट के आधार पर दस्तावेजों का सत्यापन शुरू हुआ तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। 86 पदों के लिए केवल 10 अभ्यर्थियों के पास ही मांगी गई मास्टर्स डिग्री थी। यानी करीब 90 प्रतिशत अभ्यर्थी अपात्र पाए गए थे। इसी वजह से पद भरे नहीं जा सके हैं।
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सिंगल बेंच ने दिया आदेश फिर भी अपात्र रहे मेरिट लिस्ट में
अभ्यर्थी सुधीर सिंह और प्रतिभा नरवरिया सहित अन्य ने इस मामले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने पैरवी की थी। सिंगल बेंच ने 90 दिनों में काउंसलिंग और दस्तावेज सत्यापन के बाद ही नियुक्ति देने का आदेश दिया था। वहीं, मेरिट लिस्ट में अपात्र अभ्यर्थियों के शामिल होने की समस्या जस की तस बनी हुई है।
रिट अपील और डिविजन बेंच में सुनवाई
सिंगल बेंच ने आदेश में सुधार से इनकार कर दिया था। इसके बाद अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने रिट अपील दायर की। अब यह मामला जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच में सुना जा रहा है।
कोर्ट ने साफ कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी है तो उसे सही नहीं ठहराया जा सकता है। ESB की ओर से बताया गया कि भारतीय नियम 2013 के अनुसार ही यह विज्ञापन जारी किया गया है। इसमें दस्तावेजों का वेरिफिकेशन विभाग के जरिए किया जाना है। अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कोर्ट को बताया कि नियम 2013 में ऐसी कोई भी बाध्यता नहीं है।
RTI से हुआ बड़ा खुलासा
याचिकाकर्ताओं की ओर से आरटीआई के जरिए प्राप्त पत्र भी कोर्ट में पेश किया गया है। भोपाल के संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास ने नगर पालिका आयुक्तों को एक पत्र भेजा था। इसमें साफ लिखा गया था कि मेरिट लिस्ट में अपात्र अभ्यर्थियों के कारण पद भरे नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने साल 2017 का भी उदाहरण देते हुए कोर्ट को यह बताया कि यह गड़बड़ी लगातार लंबे समय से चल रही है।
22-23 साल के अभ्यर्थी भी मेरिट में
सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि जिस पद के लिए मास्टर्स डिग्री जरूरी है, उसमें साल 2002 में जन्में युवा भी मेरिट लिस्ट में शामिल है। सवाल यह उठ रहा है कि जब इतनी कम उम्र में मास्टर्स डिग्री संभव ही नहीं है तो फिर अभ्यर्थियों को परीक्षा देने का मौका कैसे मिला?
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2002 जन्मतिथि और मास्टर्स डिग्री की अनिवार्यता के बाद भी मेरिट सूची मेंकोर्ट का सख्त रुख
हाईकोर्ट ने ESB और विभाग से पूछा है कि मेरिट लिस्ट में कितने ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिनके पास जरूरी मास्टर्स डिग्री नहीं है। विभाग ने जवाब के लिए समय मांगा है। कोर्ट ने सरकार, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास और MPESB को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को होगी।
इस मामले ने एक बार फिर ESB की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या योग्य अभ्यर्थियों को उनका हक मिलेगा या भर्ती प्रक्रिया की खामियां ऐसे ही जारी रहेंगी। 7 अप्रैल की सुनवाई पर अब सबकी नजर टिकी है।
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