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News In Short
समूह-1 उपसमूह-2 भर्ती परीक्षा 10 फरवरी 2026 को हो चुकी है।
एसोसिएट प्रोफेसर के पद नियम अनुसार 100% प्रमोशन से भरे जाने थे।
सिस्टर ट्यूटर के पद 90% सीधी भर्ती और 10% प्रमोशन से भरने का प्रावधान।
निशा चंदेल सहित 59 नर्सिंग अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने एसोसिएट प्रोफेसर और सिस्टर ट्यूटर के रिजल्ट पर रोक लगाई।
News In Detail
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने समूह-1 उपसमूह-2 के कई पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा-2025 की अधिसूचना जारी की थी। ऑनलाइन आवेदन 24 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 तक भरे गए।
आवेदन संशोधन की अंतिम तिथि 12 जनवरी तय की गई थी। परीक्षा 10 फरवरी 2026 को आयोजित कर ली गई। लेकिन इसी भर्ती में कुछ ऐसे पदों को भी शामिल कर लिया गया, जिन्हें नियम के अनुसार प्रमोशन से भरा जाना था। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
प्रमोशन के पदों पर सीधी भर्ती का आरोप
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एसोसिएट प्रोफेसर के पद 100 प्रतिशत प्रमोशन से भरे जाने थे। इसके बावजूद इन पदों के लिए सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया गया।
सिस्टर ट्यूटर के पदों के लिए नियम में 90 प्रतिशत सीधी भर्ती और 10 प्रतिशत प्रमोशन का प्रावधान है। लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पदों की गणना और प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया।
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नर्सिंग अधिकारियों ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
निशा चंदेल सहित 59 सिस्टर ट्यूटर और नर्सिंग अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना है कि वे लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे और अब उनका प्रमोशन एसोसिएट प्रोफेसर पद पर होना था। यदि इन पदों को सीधी भर्ती से भर दिया गया तो उनका वैधानिक हक प्रभावित होगा। इसी आधार पर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी गई।
प्रमोशनल पदों की सीधी भर्ती पर आपत्ति
मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर की डिवीजन बेंच में हुई। जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने एक साथ तीन याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुयश मोहन गुरु और अधिवक्ता विशाल बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि प्रमोशन वाले पदों पर सीधी भर्ती निकालना नियमों के विपरीत है।
ESB भर्ती के रिजल्ट पर लगी रोक
अधिवक्ताओं ने कोर्ट से मांग की कि जब तक मामले का अंतिम निर्णय न हो जाए, तब तक परीक्षा का परिणाम घोषित न किया जाए। उनका कहना था कि यदि रिजल्ट जारी हुआ तो थर्ड पार्टी इंटरेस्ट पैदा होगा और चयनित अभ्यर्थियों की ओर से नई कानूनी जटिलताएं खड़ी हो सकती हैं। कोर्ट ने इस दलील को गंभीर मानते हुए 10 फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा के एसोसिएट प्रोफेसर और सिस्टर ट्यूटर पदों के परिणाम जारी करने पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।
सरकार और विभाग से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के कमिश्नर और MPESB को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।।अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को होगी। तब तक रिजल्ट पर रोक जारी रहेगी।
यह मामला अब सैकड़ों अभ्यर्थियों और विभागीय कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ गया है। 18 मार्च की सुनवाई में यह साफ होगा कि भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी या नियमों में बदलाव के बाद नई दिशा तय होगी।
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