MPPSC 13 फीसदी रुके रिजल्ट पर क्या बोल रहे एजी प्रशांत सिंह, शासन की क्या है रणनीति?

13 फीसदी रिजल्ट की कानूनी लड़ाई में उलझे कई उम्मीदवारों ने दू सूत्र को फोन करके कहा कि हम केवल यह चाहते हैं कि यह रिजल्ट की सूची जारी कर दें। अब यह पद obc को जाएंगे या अनारक्षित को हमे नहीं पता।

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Pratibha ranaa
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संजय गुप्ता@ INDORE.

मप्र लोक सेवा आयोग (पीएससी) ( MPPSC ) के 13 फीसदी रूके हुए रिजल्ट को लेकर उम्मीदवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। साल 2019, 2020, 2021 राज्य सेवा के अंतिम रिजल्ट आ चुके हैं, लेकिन 87 फीसदी पदों के ही रिजल्ट आए हैं। बाकी 13 फीसदी पदों के लिए इंटरव्यू देने वाले उम्मीदवार बैचेन है। इस मामले में द सूत्र ने एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ( AG Prashant Singh ) से ही जानने की कोशिश की क्या हो रहा है और आगे क्या संभव है?

यह बोले एजी प्रशांत सिंह

एजी प्रशांत सिंह से द सूत्र ने बात कर जानना चाहा कि क्या इस पर शासन को कोई अभिमत दिया गया है कि 13 फीसदी का रिजल्ट जारी कर दिया जाए? इस पर सिंह ने कहा ऐसा कुछ नहीं है, मप्र के साथ ही छत्तीसगढ़ में भी यह 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण का मुद्दा चल रहा है। यह केस सुप्रीम कोर्ट में शिफ्ट हुए हैं, जिसमें एक साथ सुनवाई हो रही है। द सूत्र ने उनसे पूछा कि फिर आगे क्या होगा? इस पर उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट डबल बैंच ने जो आदेश दिए थे और शासन ने जो 87-13 फीसदी का फार्मूला बनाया था। इसके आधार पर ही शासन ने रिजल्ट की व्यवस्था की है। वहीं व्यवस्था चल रही है और अलग से अभी कुछ नहीं है। आगे जो भी कोर्ट से आदेश होगा, वैसा किया जाएगा। शासन बता चुका है कि 13 फीसदी रूका हुआ रिजल्ट जैसे ही कोर्ट आदेश करेगा हम जारी कर देंगे। 

ओबीसी आरक्षण में फरवरी 2022 में यह आदेश दे चुका हाईकोर्ट

हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस रवि मलिणठ और जस्टिस एमएस भाटी की डबल बैंच ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर ही फरवरी 2022 में रिट पिटीशन 2927/2022 में अंतरिम आदेश दिया था। इसमें लिखा था कि पीएससी ओबीसी को 14 फीसदी से अधिक आरक्षण नहीं दें। यह साल 2019 की राज्य सेवा परीक्षा को लेकर दिया गया था। 

33 हजार को उनके अंक नहीं पता ना कॉपियां देख पा रहे

द सूत्र लगातार यह मुद्दा उठा रहा है। क्योंकि हाईकोर्ट के किसी भी आर्डर में सौ फीसदी रिजल्ट 14 फीसदी ओबीसी आरक्षण के साथ जारी करने के से नहीं रोका है। यह खुद मप्र शासन ने 87-13 फीसदी फार्मूला बनाकर रोका हुआ है। इसके चलते साल 2019, 2020, 2021 की मेन्स दे चुके करीब 33 हजार उम्मीदवारों को उनके अंक भी नहीं पता और ना ही कॉपियां देखने को मिल रही है। जबकि इन दोनों ही बातों पर किसी भी कोर्ट से कोई रोक नहीं है। इसमें इन तीन परीक्षाओं 2019, 2020 और 2021 के ही 171 पद होल्ड है और 600 उम्मीदवारों के अंतिम रिजल्ट भी। 

हाईकोर्ट ने पीएससी को भी दिया था आदेश, लेकिन अटकी बात

जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले में कई उम्मीदवार पीएससी और मप्र शासन के खिलाफ गए। अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट ने साफ आदेश दिए कि सात दिन में 13 फीसदी रिजल्ट की सूची सार्वजनिक की जाए। लेकिन इसमें पीएससी ने आवेदन दे दिया और सूची जारी करने से मना कर दिया। अब इसमें एक जुलाई को सुनवाई होना है। 

उम्मीदवारों की यह भी मांग, कम से कम सूची तो बता दो

वहीं 13 फीसदी रिजल्ट की कानूनी लड़ाई में उलझे कई उम्मीदवारों ने दू सूत्र को फोन करके कहा कि हम केवल यह चाहते हैं कि यह रिजल्ट की सूची जारी कर दें। अब यह पद ओबीसी को जाएंगे या अनारक्षित को हमे नहीं पता, लेकिन सूची सार्वजनिक होने से यह तो पता चलेगा कि हम चयनित भी हुए हैं या नहीं। यदि नहीं हुए तो फिर अपने भविष्य के बारे में अलग कोई फैसला करें, ऐसे कितने दिन, महीनों, सालों तक इस इंतजार में रहेंगे कि हमारा सिलेक्शन होगा या नहीं। ऐसे में कम से कम जो चयनित उम्मीदवार है वही इंतजार करेगा और बाकी आगे बढ़ जाएंगे। साथ ही कॉपियां दिखाने से कोई समस्या नहीं होना चाहिए, हम गलतियां तो सुधार लेंगे नहीं तो बस परीक्षा पर परीक्षा ही देते जाएंगे।

 

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