अब आग पर सख्ती की तैयारी: एमपी में 3 माह में आएगा नया फायर सेफ्टी कानून

Ramanand Tiwari | Feb 26, 2026, 08:44 IST
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मध्यप्रदेश सरकार जल्द ही नया फायर सेफ्टी एक्ट लागू करने जा रही है। इसमें 10 मिनट का रिस्पांस टाइम और अनिवार्य फायर ऑडिट जैसे सख्त प्रावधान शामिल होंगे।

BHOPAL. मध्यप्रदेश के शहरों और गांवों में बढ़ती आगजनी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया है कि अगले तीन माह में प्रदेश में नया फायर सेफ्टी एक्ट लागू किया जाएगा।



सरकार फायर ब्रिगेड के रिस्पांस टाइम को तय करने पर भी काम कर रही है, ताकि हादसे के बाद मदद समय पर पहुंचे।



मुद्दा कैसे उठा? जबलपुर से गूंजा सवाल

बीजेपी विधायक डॉ. अभिलाष पांडे ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि जबलपुर जैसे शहरों में कई घनी बस्तियां ऐसी हैं, जहां आग लगने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंच ही नहीं पाती है।



इन इलाकों में पहले भी आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने मांग की कि प्रदेश में सख्त फायर सेफ्टी कानून और नियमित फायर ऑडिट अनिवार्य किया जाए।



मुख्य बिंदु एक नजर में...

  • 3 माह में नया फायर सेफ्टी एक्ट लाने की तैयारी की जा रही है।
  • फायर ब्रिगेड का रिस्पांस टाइम तय करने की योजना बनाई जा रही है।
  • शहरी निकायों से जानकारी मांगी गई है।
  • फायर ऑडिट और सख्त नियमों की मांग की गई है।

क्या होगा नए कानून में खास?

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि भारत सरकार के मॉडल फायर एक्ट के आधार पर मध्यप्रदेश का कानून तैयार किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह एक्ट अन्य राज्यों से बेहतर और ज्यादा प्रभावी होगा। विभागीय स्तर पर ड्राफ्टिंग का काम अंतिम चरण में है।



रिस्पांस टाइम: 10 मिनट का लक्ष्य

सरकार की कोशिश है कि आग लगने के 10 मिनट के भीतर फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच जाए। इसके लिए:



  • मौजूदा फायर स्टेशनों की समीक्षा की जा रही है।
  • जहां जरूरत होगी, नए फायर स्टेशन बनाए जाएंगे।
  • आवश्यक निर्माण कार्य और संसाधनों की योजना तैयार की जा रही है।

ऑनलाइन सिस्टम पहले से लागू

प्रदेश में ई-नगर पालिका पोर्टल के जरिए फायर सेफ्टी प्लान और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट ऑनलाइन जारी किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि नए कानून के बाद इस प्रक्रिया को और पारदर्शी और सख्त बनाया जाएगा।



फायर ऑडिट और सख्ती की मांग

डॉ. अभिलाष पांडे ने कहा कि कई बार आगजनी के बाद बीमा कंपनियां भी क्लेम देने से पीछे हट जाती हैं। ऐसे में जरूरी है कि:



  • व्यापारिक प्रतिष्ठानों में नियमित फायर ऑडिट हो।
  • नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
  • यह व्यवस्था नगर निगम से लेकर पंचायत स्तर तक लागू हो।

नया फायर सेफ्टी एक्ट लाने की घोषणा

  • रिस्पांस टाइम तय करने की तैयारी।
  • ऑनलाइन सर्टिफिकेट सिस्टम पहले से सक्रिय।
  • नए फायर स्टेशनों की योजना।

चुनौतियां अभी बाकी

  • घनी बस्तियों में फायर ब्रिगेड की पहुंच मुश्किल है।
  • कई इलाकों में संसाधनों की कमी है।
  • फायर ऑडिट का सख्त पालन अभी भी सवालों में है।

अब आगे क्या?

सरकार ने तीन माह की समयसीमा तय की है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नया फायर सेफ्टी एक्ट कितना प्रभावी और जमीनी हकीकत के अनुरूप बनता है। क्योंकि आग लगने के बाद राहत पहुंचाना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है हादसा होने से पहले तैयारी पूरी होना।



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