News Strike: मोहन कैबिनेट में दिखेंगे ये नए चेहरे, इन 6 मंत्रियों पर होगा सख्त फैसला

परफॉर्मेंस के आधार पर मोहन मंत्रिमंडल का विस्तार या फेरबदल होगा। तो अब आप इंतजार कीजिए। मानसून सत्र से पहले आपको मध्यप्रदेश बीजेपी में कई बड़े बदलाव नजर आने वाले हैं। हम आपको बताते हैं क्या-क्या हो सकते हैं वो बड़े बदलाव...

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Jitendra Shrivastava
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News Strike: मोहन मंत्रिमंडल ( Mohan cabinet ) के चेहरे बहुत जल्द बदलने वाले हैं और शिवराज सिंह चौहान के साथ वीडी शर्मा दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाले हैं। अरे चौंकिए नहीं अभी ऐसे फैसले हुए नहीं हैं, लेकिन जल्दी ही हो जाएं तो ताज्जुब मत कीजिएगा। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ( Union Minister Amit Shah ) पहले ही ये ताकीद कर चुके हैं कि विधायकों का रिपोर्टकार्ड उनके चुनावी परफॉर्मेंस के आधार पर तैयार होगा। और उसी आधार पर मोहन मंत्रिमंडल का विस्तार या फेरबदल होगा। तो अब इंतजार कीजिए। मानसून सत्र से पहले आपको मध्यप्रदेश बीजेपी ( Madhya Pradesh BJP ) में कई बड़े बदलाव नजर आने वाले हैं। हम आपको बताते हैं क्या-क्या हो सकते हैं वो बड़े बदलाव।

4 जून को साफ हो जाएगा किसको कितनी सीटें मिलीं

चुनावी नतीजे 4 जून को घोषित होंगे। इसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि किस दल को कितनी सीटें मिलीं। नतीजे ये भी साफ कर देंगे कि किस विधायक ने वोटिंग परसेंटेज बढ़ाने के लिए कितनी मेहनत की। किस नेता के क्षेत्र में मत प्रतिशत कितना रहा, ये तो मैं आपको पहले ही बता चुका हूं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, दिग्विजय सिंह की सीट का हाल क्या रहा। सीएम डॉ. मोहन यादव के क्षेत्र में कितना मतदान रहा। ये सारे आंकड़े आ चुके हैं। अगर आप नहीं जान पाए हैं तो पुराने वीडियो का लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दिया हुआ है। आप मप्र के दिग्गज नेताओं की सीट पर हुए मतप्रतिशत के बारे में जान सकते हैं। खैर अभी हम बात करते हैं कि क्या कुछ बदलाव बीजेपी में देखने को मिल सकते हैं। वैसे तो अभी एमपी में अगले पांच साल कोई चुनाव नहीं है। इसके बावजूद बीजेपी कुछ ठोस बदलाव करने के मूड में है। ताकि पांच साल बाद की जंग आसान हो सके।

पांच महीने पुरानी सरकार में बड़े बदलाव संभव

मोहन कैबिनेट में बदलाव बहुत संभव है कि विधानसभा के मानसून सत्र के पहले से ही नजर ने लग जाएं। ये सत्र जुलाई माह में हो सकता है। बीजेपी के अंदरखानों से खबर है कि लोकसभा चुनाव और अब तक के कार्यकाल के आधार पर मंत्रियों, विधायकों और पदाधिकारियों की परफॉर्मेंस का आकलन शुरू हो गया है। संभावना जताई जा रही है कि डॉ. मोहन यादव अपनी पांच महीने पुरानी सरकार में बड़े बदलाव करे। 

  • मौजूदा मंत्रिमंडल में कुछ वरिष्ठ विधायकों को भी जगह दी जा सकती है। वहीं जिन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान बेहतर प्रदर्शन किया है उन्हें भी जगह दी जाएगी। साथ ही खराब प्रदर्शन वाले मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। 
  • इस समय मोहन कैबिनेट का स्वरूप कुछ यूं है कि डॉ. मोहन यादव खुद मुख्यमंत्री हैं और दो उप मुख्यमंत्री हैं। इनके अलावा 28 मंत्री मौजूद हैं। इनमें 18 कैबिनेट मंत्री, छह स्वतंत्र प्रभार वाले और चार राज्यमंत्री का ओहदा रखने वाले मंत्री शामिल हैं। 
  • प्रदेश मंत्रिमंडल के आकार के लिहाज से फिलहाल इसमें कुछ और मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। इसकी कवायद शुरू भी हो चुकी है। जिन विधायकों ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने क्षेत्र में अच्छा परफॉर्म किया है। उन्हें उनकी मेहनत का फल जल्द मिल सकता है।
  • मेहनती विधायकों को कैबिनेट में जगह देने के साथ ही बीजेपी उन विधायकों पर गौर करेगी जो चुनाव के समय कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए हैं। इसमें राम निवास रावत और कमलेश शाह का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। हालांकि, राम निवास रावत का इस्तीफा अब तक कंफर्म नहीं हुआ है। इनको लेकर चर्चाएं ये हैं कि वो खुद इस्तीफा न देकर कांग्रेस की ओर से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस अगर उन्हें हटाती है तो वो बिना चुनाव लड़े ही विधायक बने रहेंगे। 

शाह की बात पर अमल हो तो आधा दर्जन मंत्रियों की कुर्सी जाएगी

अब आपको बताते हैं कि कौन-कौन से मंत्री ऐसे हैं जिनकी कुर्सी खतरे में जा सकती है। फिर से याद दिला दूं कि अमित शाह ने लोकसभा चुनाव के दौरान मंत्रियों को हिदायत दी थी कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए काम करें। उन्होंने साफ कहा था कि जिन मंत्रियों के क्षेत्र में वोटिंग कम रहेगी, उनके बारे में संगठन फैसला लेगा। अब अगर शाह की बात अमल किया जाता है तो एक दो नहीं कम से कम आधा दर्जन मंत्रियों की कुर्सी पर संकट मंडरा सकता है। खबर तो ये भी है कि एक एजेंसी के जरिए हर मंत्री के अब तक के काम की रिपोर्ट ली गई है। छह महीने में कौन कितना सक्रिय रहा उसका पूरा रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया है। सिर्फ लोकसभा में किए गए प्रयासों की ही बात करें तो करीब नौ मंत्री ऐसे हैं जो मतदान कराने में चूक गए। 

पुराने चेहरों को लेकर भी पार्टी सख्त कदम उठा सकती है

मध्यप्रदेश की 9 सीटों पर कम वोटिंग हुई है। ये वो सीट हैं जहां के विधायक मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने हुए हैं। इनके नाम हैं दिलीप अहिरवार, एंदल सिंह कंषाना, नरेंद्र शिवाजी पटेल, प्रद्युम्न सिंह तोमर, विजय शाह, राकेश सिंह, नागर सिंह चौहान, चैतन्य कश्यप, विश्वास सारंग। इनकी अपनी विधानसभा क्षेत्रों में 1 से 6 फीसदी तक कम मतदान हुआ है। माना जा रहा है कि इन्हें लेकर बीजेपी नेतृत्व कुछ सख्त कदम उठा सकते हैं। इन चेहरों के अलावा कुछ पुराने चेहरों को लेकर भी पार्टी विचार कर रही है। ऐसे चेहरे जो पार्टी के सीनियर विधायक हैं, लेकिन इस बार तवज्जो न मिलने से वो मायूस दिख रहे हैं। इनमें सबसे पहला नाम नौ बार के विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का है। भार्गव भाजपा की हर सरकार में मंत्री रहे हैं पर इस बार उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। इसके अलावा जिन नेताओं के नाम पर विचार हो रहा है, उनमें भूपेन्द्र सिंह, प्रदीप लारिया भी शामिल हैं। 

संगठन में भी हो सकते हैं कुछ बदलाव 

इस रिपोर्ट को लेकर आलाकमान कितने सक्रिय हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि प्रदेश लोकसभा चुनाव प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह एवं सह-प्रभारी सतीश उपाध्याय मध्यप्रदेश में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली रवाना हो गए है। जहां वे पार्टी आला कमान को विधायकों की रिपोर्ट देंगे। इस रिपोर्ट को दोनों पदाधिकारियों ने खुद दौरा करने के बाद तैयार किया है। जो इस आधार पर तैयार की गई है कि विधायकों ने अपने क्षेत्र में प्रत्याशी के समर्थन में कितनी एक्टिविटी की या जनता से सीधे संवाद किया। सत्ता में बदलाव का खाका तो तैयार है। संगठन में भी कुछ बदलाव हो सकते हैं। प्रदेश में बीजेपी की कसावट को देखते हुए आलाकमान वीडी शर्मा से काफी खुश माने जा रहे हैं। हो सकता है कि उन्हें इस बार केंद्र की सरकार में भी बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा जाए। लोकसभा चुनाव की बात अलग है उन्हें विधानसभा चुनाव की बड़ी जीत का इनाम भी मिल सकता है। नई जिम्मेदारी के साथ वो प्रदेश के अध्यक्ष रहेंगे या नहीं, फिलहाल ये कहा नहीं जा सकता। हो सकता है उनकी जगह ये पद किसी अन्य को सौंप दिया जाए। जिसके बाद ये अंदाजा लगाना कतई मुश्किल नहीं है कि जब संगठन का मुख्य चेहरा बदलेगा तो संगठन के दूसरे चेहरों में भी बदलाव होगा ही। तो इंतजार कीजिए। चुनाव से फारिग होते ही प्रदेश में बीजेपी के नए एक्शन दिखाई दे सकते हैं।

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