News Strike:37 दिन से धरने पर जनपद अध्यक्ष राधा अहिरवार, दो मंत्रियों के जिले में क्यों नहीं हुई सुनवाई?
Harish Divekar | Aug 20, 2026, 07:00 IST
news strike 19-08
चीचली जनपद पंचायत अध्यक्ष राधा अहिरवार अपनी शिकायतों पर कार्रवाई की मांग को लेकर 37 दिनों से धरने पर बैठी हैं। उन्होंने जनपद पंचायत सीईओ पर अभद्रता और भेदभाव के आरोप लगाए हैं, जबकि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
News Strike
नमस्कार,
मैं जिस जनपद अध्यक्ष की बात कर रहा हूं उनका नाम है राधा अहिरवार। राधा अहिरवार चिचिली जनपद पंचायत की अध्यक्ष हैं। ये पंचायत गाडरवारा विधानसभा में आती है। यहां से विधायक हैं उदय प्रताप सिंह। इस नाम को सुनकर आप समझ ही गए होंगे कि ये आम विधायक नहीं हैं, बल्कि मप्र सरकार के भारीभरकम मंत्री हैं, जिनके पास स्कूल शिक्षा जैसा अहम विभाग है।
अब बात करते हैं पूरे जिले की, ये मामला नरसिंहपुर जिले का है। नरसिंहपुर जिले में गाडरवारा के अलावा एक विधानसभा सीट है गोटेगांव। जहां से विधायक हैं महेंद्र नागेश, ये भी बीजेपी के ही हैं। एक विधानसभा सीट है तेंदूखेड़ा, जहां से विश्वनाथ सिंह पटेल विधायक हैं, वो भी बीजेपी से ही हैं। और अब बात करते हैं सीधे नरसिंहपुर की, नरसिंहपुर से विधायक हैं प्रहलाद पटेल जो बीजेपी के सीनियरमोस्ट विधायकों में से एक हैं।
फिलहाल मोहन सरकार में मंत्री हैं इससे पहले सांसद रहे हैं और केंद्र में भी मंत्री रह चुके हैं। ये नाम ही काफी हैं ये बताने के लिए विधानसभा में नरसिंहपुर का कितना दबदबा होगा. पर अफसोस एक महिला नेत्री की आवाज सुनने का टाइम यहां किसी के पास नहीं है।
🔴News Strike | 37 दिन से धरने पर जनपद अध्यक्ष , दो मंत्रियों के जिले में क्यों नहीं हुई सुनवाई?
डबल इंजन सरकार में महिला नेत्री को देना पड़ रहा धरना
ये उस सरकार के राज में हो रहा है जो लोकसभा में महिला शक्ति वंदन बिल लेकर आई है। उसी डबल इंजन सरकार के राज में एक महिला नेत्री को धरना देना पड़ रहा है। सिर्फ इसलिए कि उसकी बात सुनी जाए। दिनों की गिनती पर भी फोकस कीजिए, इस धरने को 37 दिन का समय हो चुका है, इसके बावजूद उसकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
क्या जब तक इस प्रदर्शन में जेन जी का नाम नहीं जुड़ेगा तब एक महिला नेत्री की आवाज कोई नहीं सुनेगा. या, जब तक कोई ऐसी महिला नहीं होगी जिसका रौब प्रदेशस्तर का हो या फिर वो किसी बड़े नेता को सीधे फोन मिलाकर बात करने की हैसियत रखती हो. क्या तब तक उसकी डिमांड नहीं सुनी जाएगी. मैं बिलकुल ये नहीं कहता कि महिला है या पंचायत की नेता है तो उसकी किसी भी मांग को तुरंत पूरा कर दिया जाना चाहिए. लेकिन क्या उसकी शिकायत सुनने का वक्त नहीं निकाला जाना चाहिए।
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राधा अहिरवार सीईओ गुप्ता के तबादले की मांग पर अड़ी
जिस सीईओ पर जनपद पंचायत अध्यक्ष राधा अहिरवार पर अभद्रता का आरोप है उनका नाम है अभिषेक गुप्ता। राधा अहिरवार गुप्ता के तबादले की मांग पर अड़ी हैं।
आरोप की गहराई तक जाएं तो उसमें जातिगत भेदभाव और छुआछूत भी शामिल दिखाई देगी। अहिरवार का आरोप है कि इस वजह से उन्हें उनके संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारों से दूर किया जा रहा है। उन्हें जनपद पंचायत की बैठक, योजना और कार्यक्रमों की जानकारी तक नहीं दी जा रही है, और गलती से किसी कर्मचारी ने उन्हें बता दिया तो उस कर्मचारी को ही फटकारा जाता है। उनका आरोप ये भी है कि खुद सीईओ उनके लिए तय कुर्सी पर बैठते हैं। ये दावा भी किया गया कि वो इस संबंध में एक वीडियो भी बना चुकी हैं।
इस शिकायत के साथ वो कई संबंधित अधिकारियों तक गईं, लेकिन जब कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तब उन्होंने धरने पर बैठना ही बेहतर समझा। पर अफसोस उनकी सुनवाई अब भी नहीं हुई है। एक तरफ राधा अहिरवार हैं जो अपनी शिकायत पर मुखर हैं, लेकिन सीईओ अभिषेक गुप्ता इस मुद्दे पर पूरी तरह खामोश हैं। इसलिए हम उनका पक्ष नहीं जान पाए। फिलहाल हम इस मामले पर सही गलत के सवाल में नहीं उलझते हैं। हमारा सवाल वही है जो मैं पहले भी कह चुका हूं और फिर दोहरा देता हूं,
अगर एक महिला 37 दिन से लगाातार धरने पर बैठी है तो क्या उसकी शिकायत नहीं सुनी जानी चाहिए, वो कितनी सही है कितनी गलत है. इसकी बात बाद में होगी।
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क्यों कोई प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में ये बताने को तैयार है कि राधा अहिरवार की शिकायत पर क्या कार्रवाई हो रही है। अगर वो सही हैं तो क्या फैसला लिया जा रहा है और अगर गलत हैं तो उन्हें क्या समझाईश दी जा रही है। बात सिर्फ एक महिला या पंचायत स्तर की नेता की नहीं है, मामले की गंभीरता समझना जरूरी है।
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पार्टी कर रही महिला नेत्री को नजरअंदाज
कुछ ही दिन हुए जब कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने श्री राम सेना पर अपनी रैली के बाद राम लीला मैदान की शुद्धि और गंगा जल छिड़कवाने के आरोप लगाए थे, उसके बाद ये मामला दिनरात मेनस्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा।
शिकायत उसी तरह की है, बस नाम एक राष्ट्रीय स्तर के नेता की जगह जनपद की नेता राधा अहिरवार का है। क्या इसलिए ये खामोशी जायज हो जाएगी, सरकार में बैठे नेता एक जनपद पंचायत अध्यक्ष को नजरअंदाज कर सकते हैं। लेकिन क्या उस जगह की जनता इसे नजरअंदाज करेगी, वो भी तब जब पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं। सरकारों को ये भी याद रखना चाहिए कि अक्सर आग एक छोटी सी चिंगारी से ही लगती है। इसलिए समय पर उठाया गया कदम बड़े नुकसान को रोक सकता है।
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