नर्मदा नदी प्रदूषण पर NGT सख्त, हजारों लीटर दूध बहाने पर प्रदूषण बोर्ड से मांगी रिपोर्ट
Anjali Dwivedi | May 19, 2026, 16:15 IST
ngt report narmada river
नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियां बहाने के मामले में एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वैज्ञानिक रिपोर्ट मांगी गई है। धार्मिक आयोजन के नाम पर हुए इस विसर्जन से जलीय जीवों को खतरा है।
समझें क्या है पूरा मामला
- सीहोर जिले में एक धार्मिक आयोजन के दौरान नर्मदा नदी में भारी विसर्जन हुआ।
- यहां नदी में 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियां बहाई गई थीं।
- इस गतिविधि को पर्यावरण के लिए नुकसानदेह बताते हुए याचिका दायर की गई।
- एनजीटी ने इस मामले पर केंद्रीय और राज्य प्रदूषण बोर्ड से रिपोर्ट मांगी है।
- कोर्ट जानना चाहता है कि क्या नदी में दूध बहाने से प्रदूषण फैलता है।
कहां हुआ था यह आयोजन
5e4a4763-623
कोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका
जस्टिस ने प्रदूषण बोर्ड से जवाब मांगा
NGT ने अपने आदेश में वैज्ञानिक कारणों का भी जिक्र किया। दूध जैसे जैविक पदार्थ पानी में मिलने से गंभीर समस्या खड़ी करते हैं। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर बहुत तेजी से कम होने लगता है। विज्ञान की भाषा में इसे बीओडी यानी बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड बढ़ना कहते हैं। इसके कारण पानी में रहने वाली मछलियां और अन्य जीव मर सकते हैं।
ngt report narmada river
एक्सपर्ट्स टीम करेगी वैज्ञानिक अध्ययन
कब होगी मामले की अगली सुनवाई
FAQ
- नर्मदा नदी में दूध अर्पण करने के मामले पर एनजीटी ने क्या कार्रवाई की है?
NGT ने मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नर्मदा नदी के भीतर 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियां बहाने पर कड़ा संज्ञान लिया है। एनजीटी की भोपाल बेंच ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को आदेश जारी कर विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट मांगी है। इसे जुलाई में होने वाली अगली सुनवाई तक पेश करना होगा। - नदी के पानी में बड़ी मात्रा में दूध बहाने से पर्यावरण को क्या नुकसान होता है?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नदी के पानी में इतनी भारी मात्रा में दूध बहाना बेहद नुकसानदेह है। दूध एक ऑर्गेनिक यानी कार्बनिक पदार्थ है। जब यह पानी में मिलता है, तो इसके अपघटन के लिए बैक्टीरिया पानी की ऑक्सीजन का इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे पानी में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड बढ़ जाती है और घुलित ऑक्सीजन कम हो जाती है। ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण मछलियां और अन्य जलीय जीव दम घुटने से मर जाते हैं।
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