रिटायर्ड IAS नियाज खान की एक और पोस्ट- अंग्रेजी राष्ट्रभाषा होती तो वैज्ञानिक सोच और प्रेम होता

Sandeep Kumar | May 07, 2026, 17:38 IST
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रिटायर्ड आईएएस अधिकारी नियाज खान ने ट्वीट कर अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इससे अंधविश्वास और नफरत के बजाय वैज्ञानिक सोच बढ़ेगी।

News in Short

  • रिटायर्ड आईएएस नियाज खान ने अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन किया।
  • नियाज ने हिंदी पर सवाल उठाए और वैज्ञानिक सोच की आवश्यकता जताई।
  • मुस्लिम नेताओं पर हमला करते हुए ओवैसी और हुमायूं कबीर की आलोचना की।
  • चीन का उदाहरण देते हुए भारतीय समाज में अंधविश्वास को लेकर चिंता जताई।
  • उनकी किताब "ब्राह्मण द ग्रेट नॉवेल" पर विवाद उठ चुका है।

News in Detail

अपने बयानों से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले रिटायर्ड आईएएस नियाज खान ने अब अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन किया है। एक पोस्ट में उन्होंने अंधविश्वास और नफरत के बजाय वैज्ञानिक सोच और प्रेम को बढ़ावा देने की बात की। उनके बयान से भारतीय समाज में नई बहस शुरू हो गई है। आपको बता दें कि नियाज खान ने अबू सलेम की प्रेम कहानी और ब्राह्मणों पर किताब लिखी थी।



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हिंदी के खिलाफ विवाद!

नियाज खान ने ट्वीट में हिंदी का नाम लिए बिना अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की बात की। उनका कहना था कि अगर हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाया गया है, तो देश में वैज्ञानिक सोच और प्रेम की बजाय अंधविश्वास और नफरत की भावना को बढ़ावा मिला है। इस बयान के बाद उन्होंने हिंदी भाषा को लेकर भी सवाल उठाए और अंग्रेजी के पक्ष में अपनी विचारधारा स्पष्ट की।



मुस्लिम नेताओं पर नियाज

नियाज खान ने एक और ट्वीट में मुस्लिम नेताओं पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि ओवैसी और विधायक हुमायूं कबीर जैसे मुस्लिम नेता मुस्लिमों की कब्र खोदने के बाद ही मानेंगे। उनका मानना था कि मुस्लिम समुदाय की स्थिति में सुधार करने के बजाय ये नेता उन्हें और ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनका यह ट्वीट मुस्लिम राजनीति और नेतृत्व को लेकर आलोचना करता है।



रिटायर्ड IAS नियाज खान की एक और पोस्ट- अंग्रेजी राष्ट्रभाषा होती तो वैज्ञानिक सोच और प्रेम होता


वैज्ञानिक सोच की आवश्यकता

नियाज खान ने अपने ट्वीट में यह भी कहा कि दुनिया आज वैज्ञानिक सोच की ओर बढ़ रही है, जबकि भारत धर्म और अंधविश्वास के दलदल में फंसा हुआ है। उन्होंने उदाहरण के रूप में चीन का उल्लेख किया, जो वैज्ञानिक सोच को अपनाकर एक सुपर पावर बन गया है। उनका कहना था कि यदि भारत भी वैज्ञानिक सोच को अपनाता तो वह भी विकास के नए आयामों को छू सकता था।



नियाज खान की किताब

नियाज खान ने अपने सेवाकाल में "ब्राह्मण द ग्रेट नॉवेल" नामक किताब लिखी थी। इस किताब में उन्होंने ब्राह्मण समाज और उनके प्रभाव पर विचार प्रस्तुत किए थे। किताब में संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई थी, जिससे विवाद पैदा हुए थे। अब, उनके ट्वीट और विचारों ने उन्हें फिर से चर्चा का विषय बना दिया है।



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