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Photograph: (the sootr)
News In Short
- नियाज खान ने बांग्लादेश में दो हिंदू मंत्रियों की नियुक्ति पर टिप्पणी की।
- भारत में 20 करोड़ मुस्लिम हैं, लेकिन केंद्र सरकार में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं।
- उन्होंने बीजेपी और RSS से मुस्लिम मंत्रियों की नियुक्ति पर विचार करने की अपील की।
- बीजेपी ने कहा, पद काबिलियत, जरूरत और समय के हिसाब से मिलते हैं।
- धर्म के आधार पर पद देने का विरोध करते हुए बीजेपी ने पूर्व मुस्लिम मंत्रियों का उल्लेख किया।
BHOPAL.मध्यप्रदेश कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी नियाज खान अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। इस बार उन्होंने बांग्लादेश में एक करोड़ हिंदू आबादी के बावजूद वहां दो हिंदू मंत्रियों की नियुक्ति पर बात की है। इसके साथ ही उन्होंने भारत में 20 करोड़ मुस्लिमों की बढ़ती संख्या के बावजूद केंद्र सरकार में एक भी मुस्लिम मंत्री न होने पर सवाल उठाया है।
बांग्लादेश में दो हिंदू मंत्री बने। बड़ी ख़ुशी हुई। बांग्लादेश में एक करोड़ हिंदू हैं और दो मंत्री,भारत में 20 करोड़ मुस्लिम हैं पर केंद्र सरकार में एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं।बड़ा आश्चर्य हुआ।बीजेपी और RSS से विनम्र निवेदन है कि कृपया 2-3 मुस्लिम मंत्री बनाने पर गंभीर चिंतन करें pic.twitter.com/5HKzLN1W9z
— NIYAZ KHAN (@saifasa) February 19, 2026
नियाज खान की अपील
नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बांग्लादेश में हिंदू मंत्रियों की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा की बांग्लादेश में एक करोड़ हिंदू हैं और वहां दो मंत्री हैं। वहीं, भारत में 20 करोड़ मुस्लिम हैं, लेकिन केंद्र सरकार में एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं है, ये सचमुच हैरान करने वाली बात है। उन्होंने बीजेपी और RSS से अपील की कि वे 2-3 मुस्लिम मंत्रियों की नियुक्ति पर गंभीरता से विचार करें।
बीजेपी का पलटवार
इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसका कड़ा विरोध किया। बीजेपी विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि भारत में धर्म आधारित राजनीति नहीं होती। काबिलियत, समय और जरूरत के हिसाब से ही किसी को पद मिलता है। उन्होंने आगे कहा कि एनडीए सरकार में भी मुस्लिम मंत्रियों की नियुक्ति हुई थी। बीजेपी विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने भी यही तर्क दिया। उन्होंने कहा कि पद केवल जाति के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और जरूरत के हिसाब से दिए जाते हैं।
भारत में धर्म आधारित राजनीति की स्थिति
भारत में धर्म आधारित राजनीति को लेकर हमेशा से ही चर्चा होती रही है, लेकिन बीजेपी का यह स्पष्ट कहना है कि कोई भी पद धर्म या जाति के आधार पर नहीं मिलता, बल्कि यह काबिलियत और जरूरत के अनुसार तय होता है। हालांकि, नियाज खान का यह बयान इस विषय पर नई बहस शुरू कर चुका है, और यह स्पष्ट करता है कि धर्म और राजनीति के बीच की सीमाएं कई बार धुंधली हो जाती हैं।
निष्कर्ष:
नियाज खान का यह बयान समाज के एक बड़े हिस्से की भावनाओं को उकसाता है, जबकि बीजेपी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक नियुक्तियों में धर्म का कोई स्थान नहीं है। यह मुद्दा भविष्य में और भी चर्चा का कारण बन सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो धार्मिक प्रतिनिधित्व को लेकर अधिक संवेदनशील हैं।
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