एमपी में नहीं बनेगा कोई नया जिला, जनगणना होने तक लगा ब्रेक
Ramanand Tiwari | Jan 01, 2026, 23:57 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक पुनर्गठन पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। केंद्र सरकार के आदेश से जनगणना पूरी होने तक नए जिले और तहसील नहीं बनेंगे। सीमा परिवर्तन संभव नहीं होगा।
मध्यप्रदेश में नए जिले और तहसील बनाने की लंबे समय से चल रही मांगों पर फिलहाल विराम लग गया है। केंद्र सरकार के आधी रात में जारी आदेश के बाद राज्य में अब जनगणना पूरी होने तक कोई नया जिला (new district), तहसील या प्रशासनिक इकाई अस्तित्व में नहीं आ सकेगी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर 31 दिसंबर 2025 की मध्यरात्रि से मध्य प्रदेश के सभी जिलों, तहसीलों, थानों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं फ्रीज कर दी गई हैं। इसका साफ अर्थ है कि अब जनगणना खत्म होने तक किसी भी तरह का सीमा परिवर्तन संभव नहीं होगा।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक ढांचे में स्थिरता जरूरी है। इसी कारण न तो नए जिले बनाए जाएंगे और न ही पुरानी सीमाओं में कोई बदलाव किया जाएगा।
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वर्षों से उठ रही आवाजें फिलहाल ठंडी मध्य प्रदेश में कई क्षेत्रों से जिले और तहसील बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। सांसद, विधायक और मंत्री स्तर पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन अब इन सभी मांगों पर अस्थायी तौर पर पानी फिर गया है।
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राजधानी भोपाल में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत 8 नई तहसीलों के गठन की तैयारी अंतिम चरण में थी। लेकिन सीमा फ्रीज होने के बाद यह पूरा प्लान फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है।
जिन जिलों और तहसीलों के गठन की प्रक्रिया 31 दिसंबर से पहले पूरी नहीं हो सकी, वे अब जनगणना समाप्त होने तक अस्तित्व में नहीं आ पाएंगे। इससे प्रशासनिक विस्तार की उम्मीद लगाए बैठे क्षेत्रों को बड़ा झटका लगा है।
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राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग जिलों में बैठकें कर सर्वे रिपोर्ट की समीक्षा कर रहा था। लेकिन केंद्र के आदेश के बाद आयोग की पूरी प्रक्रिया पर अस्थायी विराम लग गया है।
जनगणना टाइमलाइन बनी वजह अगर नए जिले या संभाग बनाए जाने हैं, तो उनकी संभावना अब मार्च 2027 के बाद ही बन सकेगी। इसकी वजह यह है कि देशभर में जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी।
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पहला चरण: अप्रैल से सितंबर 2026
दूसरा चरण: फरवरी 2027 तक पूरा होगा जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रशासनिक ढांचे में किसी भी तरह का बदलाव संभव नहीं है।
राज्य गृह विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को जिला जनगणना अधिकारी नियुक्त किया है। वहीं, संभाग स्तर पर यह जिम्मेदारी संभागायुक्तों को दी गई है, ताकि जनगणना प्रक्रिया बिना बाधा पूरी हो सके।
भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि केंद्र के निर्देश मिलते ही सीमाएं फ्रीज करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सभी जिलों में आदेश का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत जनगणना कार्य में बाधा डालने या लापरवाही बरतने पर तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
मध्य प्रदेश में नए जिले और तहसील की राजनीति फिलहाल ठहर गई है। सरकार का फोकस अब सिर्फ जनगणना को निष्पक्ष, सटीक और पारदर्शी तरीके से पूरा करने पर है। प्रशासनिक पुनर्गठन की फाइलें अब जनगणना पूरी होने के बाद ही दोबारा खुलेंगी।
आधी रात से लागू हुआ केंद्र का आदेश
अब यहीं रहेंगे जिले और तहसील
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नेताओं की मांगों पर फिरा पानी
इन इलाकों में जिला-तहसील की थी जोरदार मांग
- पिपरिया, सिहोरा, बुंदेलखंड और भोपाल शामिल नर्मदापुरम संभाग में पिपरिया को जिला बनाए जाने की मांग
- बुंदेलखंड क्षेत्र में सागर संभाग के विस्तार को लेकर बिना को जिला बनाए जाने के मांग
- जबलपुर संभाग में डिंडोरी के सिहोरा को तहसील का दर्जा देने की मांग
- भोपाल में 8 नई तहसीलों के गठन का प्रस्ताव लगभग तैयार
- रीवा में सीमा पुनर्गठन की प्रक्रिया पर भी काम चल रहा था
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8 नई तहसीलों का प्रस्ताव फाइलों में कैद
31 दिसंबर से पहले अस्तित्व में नहीं आ सके जिले
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पुनर्गठन आयोग की प्रक्रिया पर ब्रेक
अब मार्च 2027 के बाद ही उम्मीद
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दो चरणों में होगी जनगणना
दूसरा चरण: फरवरी 2027 तक पूरा होगा जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रशासनिक ढांचे में किसी भी तरह का बदलाव संभव नहीं है।
कलेक्टर और संभागायुक्त को सौंपी जिम्मेदारी
भोपाल कलेक्टर ने की पुष्टि
लापरवाही पर सख्त सजा का प्रावधान
जनगणना पहले, जिले बाद में
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