27% OBC आरक्षण पर दायर SLP में स्टे या अंतरिम राहत की मांग नहीं होने का दावा, OBC वर्ग के अधिवक्ताओं ने ही उठाए सवाल

Neel Tiwari | Oct 17, 2026, 24:08 IST
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मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण को लेकर कानूनी विवाद फिर तेज हो गया है।
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण को लेकर कानूनी विवाद फिर तेज हो गया है।

मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल होने के बाद विवाद बढ़ गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने सरकार पर OBC युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि याचिका में अंतरिम राहत की मांग नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस अधिवक्ता को नियुक्त किया गया है, उसने कभी OBC वर्ग का पक्ष नहीं रखा।

सरकार की SLP पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को लेकर नया विवाद सामने आया है। OBC एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 16 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के जरिए OBC वर्ग के युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने की घोषणा के बावजूद होल्ड अभ्यर्थियों को तत्काल राहत दिलाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

27% OBC आरक्षण मामला: मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की स्पेशल लीव पिटिशन | 27% OBC Reservation Case: Madhya Pradesh Government Files Special Leave Petition in Supreme Court
27 फीसदी OBC आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची मध्य प्रदेश सरकार, स्पेशल लीव पिटिशन दायर
16 Oct 2026 ,
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मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को OBC महासभा के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद यह कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार मामले को टालने के बजाय उसका समाधान निकालने के लिए काम कर रही है।
मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को OBC महासभा के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद यह कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार मामले को टालने के बजाय उसका समाधान निकालने के लिए काम कर रही है।

27% आरक्षण लागू करने की मांग नहीं होने का दावा

अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के अनुसार, राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल SLP के साथ हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के लिए कोई इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) दाखिल नहीं की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि याचिका में मामले का अंतिम फैसला आने तक OBC वर्ग को 27% आरक्षण का लाभ देने की मांग नहीं की गई है। ठाकुर ने सवाल उठाया कि यदि सरकार OBC अभ्यर्थियों को राहत दिलाने के लिए गंभीर है, तो अंतरिम राहत के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? हालांकि, ये दावे उनके द्वारा जारी प्रेस नोट पर आधारित हैं। याचिका और उसके साथ दाखिल दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन्हें अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

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भाजपा विधायक संजय पाठक की पार्टनरशिप फर्म पैसिफिक मिनरल्स एक्सपोर्ट से जुड़े खनन मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है। करीब 81.73 करोड़ रुपए की वसूली से जुड़ी कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी गई है। हालांकि, अंतिम देनदारी अभी तय नहीं हुई है।

OBC की न्यायिक लड़ाई लड़ने वाले संगठन शामिल नहीं थे?

वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ हुई बैठक पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बैठक में ऐसे लोगों को OBC वर्ग का प्रतिनिधि बताकर शामिल किया गया, जिन्होंने आरक्षण से जुड़े मामलों में हाई कोर्ट में पैरवी नहीं की। उन्होंने दावा किया कि पिछले सात वर्षों से न्यायिक लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ताओं और संगठनों के प्रतिनिधियों को बैठक में जगह नहीं दी गई। ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक में शामिल कथित प्रतिनिधि महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के समर्थक हैं, न कि पूरे OBC वर्ग के प्रतिनिधि। ये आरोप प्रेस नोट में लगाए गए हैं। संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।

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इन संगठनों ने हाई कोर्ट में लड़ी आरक्षण की लड़ाई

प्रेस नोट में OBC एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन और अपाक्स समेत कई संगठनों का उल्लेख है। इनमें अखिल भारतीय लोधी महासभा भी शामिल है। एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस और OBC/SC/ST एकता मंच का भी नाम है। ठाकुर के मुताबिक इन संगठनों ने 27% OBC आरक्षण के समर्थन में कानूनी लड़ाई लड़ी है। एक हजार से अधिक प्रभावित अभ्यर्थी भी इस लड़ाई में शामिल रहे हैं। मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। ठाकुर ने कहा कि ये संगठन सुप्रीम कोर्ट में आगे भी अपना पक्ष रखेंगे।

7% OBC आरक्षण पर दायर
7% OBC आरक्षण पर दायर

सरकार और महाधिवक्ता पर सवाल

OBC वर्ग की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ताओं ने अपने प्रेस नोट में कहा है कि हाई कोर्ट में राज्य सरकार और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से OBC वर्ग को 14% आरक्षण देने के संबंध में शपथपत्र पेश किया गया था। उनके अनुसार, हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में इस शपथपत्र पर विचार किया था। इसके बाद मामले में अंतिम फैसला आया।

अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर का आरोप है कि इसी स्थिति के कारण सरकार की मौजूदा कार्रवाई से OBC अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिलने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इस पूरे मुद्दे पर सरकार और महाधिवक्ता कार्यालय का विस्तृत पक्ष सामने आना जरूरी है।

50% आरक्षण और नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

OBC वर्ग के कानूनी जानकारों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से यह भी सवाल किया है कि यदि सरकार वास्तव में OBC हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, तो वह 50% आरक्षण लागू करने और इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में कदम क्यों नहीं उठाती। यह उनकी ओर से सरकार के सामने रखी गई मांग है। इस पर संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत क्या कदम संभव हैं, यह अलग विषय है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले बढ़ा विवाद

27% OBC आरक्षण पर राज्य सरकार की SLP का डायरी नंबर 65767/2026 है। 16 अक्टूबर की शाम 5:45 बजे याचिका सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज हुई थी।फिलहाल मामले की सुनवाई की तारीख और बेंच की जानकारी सामने नहीं आई है। अब एक ओर सरकार की कानूनी रणनीति पर नजर रहेगी, वहीं दूसरी ओर OBC संगठनों की ओर से उठाए गए सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे।

सरकार, महाधिवक्ता कार्यालय और बैठक में शामिल प्रतिनिधियों का पक्ष सामने आने के बाद विवाद के सभी पहलुओं की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी। बता दें कि ओबीसी वेलफेयर एसोसिएशन के द्वारा यह आरोप लगाए गए हैं और ओबीसी वर्ग की ओर से कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर हैं।
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