तहसील में बिना रिश्वत नहीं होता काम, Lokayukta ने दो बाबुओं को पकड़ा
Jitendra Shrivastava | Apr 08, 2024, 20:05 IST
लोकायुक्त ने दो बाबुओं को रंगेहाथ पकड़ा।
मध्यप्रदेश के जबलपुर में तहसील कार्यालय के कर्मचारियों से जनता खासी परेशान है, जहां एक फाइल भी इधर से उधर करने पर बाबुओं को हजारों रुपए की रिश्वत देनी पड़ती है। पैसों की चमक में अंधे रिश्वतखोर अपनी नौकरी को भी दांव पर लगाने से बाज नहीं आ रहे...
JABALPUR. लोकायुक्त ( Lokayukta) पुलिस ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए गोरखपुर तहसील कार्यालय के दो बाबुओं को पकड़ा है, जो नामांतरण के लिए एक वकील से 10 हजार की रिश्वत ले रहे थे। जबलपुर में तहसील कार्यालय के कर्मचारियों से जनता खासी परेशान है, जहां एक फाइल भी इधर से उधर करने पर बाबुओं को हजारों रुपए की रिश्वत देनी पड़ती है। लोकायुक्त लगातार इस तरह के भ्रष्ट कर्मचारियों पर कार्यवाही कर रही है पर पैसों की चमक में अंधे रिश्वतखोर अपनी नौकरी को भी दांव पर लगाने से बाज नहीं आते।
गोरखपुर शक्ति भवन के पास स्थित तहसील कार्यालय में छापामार तरीके से जब लोकायुक्त की टीम पहुंची तो कार्यालय में हड़कंप मच गया। लोकायुक्त डीएसपी के नेतृत्व में टीम ने तहसीलदार के लिपिक सहित एक अन्य बाबू को 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। दोनों आरोपियों ने 25 हजार की रिश्वत एडवोकेट सच्चिदानंद गिरी गोस्वामी से एक प्लाट नामांतरण के एवज में मांगी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि यह दोनों बाबू पहले भी अन्य बहानों से रुपए ऐंठ चुके हैं।
पेशे से अधिवक्ता सच्चिदानंद गोस्वामी की सास श्याम पुरी गोस्वामी का जबलपुर के गंगानगर में एक प्लाट है। जिसका नामांतरण करने के लिए उन्होंने तहसीलदार कार्यालय में आवेदन दिया था और काफी दिन तक आवेदन पर कोई कार्रवाई न होने पर आवेदक सच्चिदानन्द ने तहसील कार्यालय में फिर से संपर्क किया, तो उन्हें पता चला कि उनकी फाइल ही गुम हो गई है। अब इस गुम हुई फाइल को वापस प्राप्त करने के लिए तहसील कार्यालय के ही सहायक ग्रेड 3 के लिपिक अशोक रजक ने उनसे 500 रुपए मांगे जो आवेदक ने उसे दे दिए। इसके बाद भी कुछ दिनों तक आनाकानी करने के बाद उनसे दोबारा 2 हजार रुपए मांगे गए। बाबू अशोक रजक ने उनसे कहा कि तहसील कार्यालय में फाइल आगे बढ़ाने के लिए खर्च लगता है जिस पर आवेदक गोस्वामी ने उसे 2 हजार रुपए भी दे दिए। इसके बाद एडवोकेट गोस्वामी को बताया गया कि उन्हें तहसीलदार के बाबू ऋषि पांडे से मिलना होगा। पीड़ित एडवोकेट गोस्वामी के अनुसार ऋषि रजक ने उन्हें गोरखपुर तहसीलदार से मिलवाया और तहसीलदार ने यह कहा कि आप बाबू से बात कर ले वह देख लेंगे। इसके बाद तहसीलदार के बाबू ऋषि रजक ने उनके सामने 25 हजार की रिश्वत की डिमांड रख दी और बताया कि आपके प्लॉट के साइज के हिसाब से यह फिक्स रेट है।
एडवोकेट सच्चिदानंद गोस्वामी ने लोकायुक्त के एसपी से इस मामले की शिकायत की। पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त ने डीएसपी नीतू त्रिपाठी के नेतृत्व में एक टीम गठित की और शिकायत का सत्यापन करवाया। सोमवार की दोपहर करीब तीन बजे जैसे ही सच्चिदानंद गोस्वामी रिश्वत के पैसे लेकर गोरखपुर तहसील पहुंचा तो अशोक और ऋषि साथ में बैठे हुए थे। दोनों आरोपियों ने जैसे ही रुपए लिए तो लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में ऋषि पांडे सहायक ग्रेड 3 को मुख्य आरोपी और अशोक रजक सहायक ग्रेड-2 को सह आरोपी बनाया गया है।
ये है मामला
गोरखपुर शक्ति भवन के पास स्थित तहसील कार्यालय में छापामार तरीके से जब लोकायुक्त की टीम पहुंची तो कार्यालय में हड़कंप मच गया। लोकायुक्त डीएसपी के नेतृत्व में टीम ने तहसीलदार के लिपिक सहित एक अन्य बाबू को 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। दोनों आरोपियों ने 25 हजार की रिश्वत एडवोकेट सच्चिदानंद गिरी गोस्वामी से एक प्लाट नामांतरण के एवज में मांगी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि यह दोनों बाबू पहले भी अन्य बहानों से रुपए ऐंठ चुके हैं।
नामांतरण का फिक्स रेट 25 हजार
पेशे से अधिवक्ता सच्चिदानंद गोस्वामी की सास श्याम पुरी गोस्वामी का जबलपुर के गंगानगर में एक प्लाट है। जिसका नामांतरण करने के लिए उन्होंने तहसीलदार कार्यालय में आवेदन दिया था और काफी दिन तक आवेदन पर कोई कार्रवाई न होने पर आवेदक सच्चिदानन्द ने तहसील कार्यालय में फिर से संपर्क किया, तो उन्हें पता चला कि उनकी फाइल ही गुम हो गई है। अब इस गुम हुई फाइल को वापस प्राप्त करने के लिए तहसील कार्यालय के ही सहायक ग्रेड 3 के लिपिक अशोक रजक ने उनसे 500 रुपए मांगे जो आवेदक ने उसे दे दिए। इसके बाद भी कुछ दिनों तक आनाकानी करने के बाद उनसे दोबारा 2 हजार रुपए मांगे गए। बाबू अशोक रजक ने उनसे कहा कि तहसील कार्यालय में फाइल आगे बढ़ाने के लिए खर्च लगता है जिस पर आवेदक गोस्वामी ने उसे 2 हजार रुपए भी दे दिए। इसके बाद एडवोकेट गोस्वामी को बताया गया कि उन्हें तहसीलदार के बाबू ऋषि पांडे से मिलना होगा। पीड़ित एडवोकेट गोस्वामी के अनुसार ऋषि रजक ने उन्हें गोरखपुर तहसीलदार से मिलवाया और तहसीलदार ने यह कहा कि आप बाबू से बात कर ले वह देख लेंगे। इसके बाद तहसीलदार के बाबू ऋषि रजक ने उनके सामने 25 हजार की रिश्वत की डिमांड रख दी और बताया कि आपके प्लॉट के साइज के हिसाब से यह फिक्स रेट है।
तहसीली कार्यालय में ही पकड़े गए रंगे हाथ
एडवोकेट सच्चिदानंद गोस्वामी ने लोकायुक्त के एसपी से इस मामले की शिकायत की। पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त ने डीएसपी नीतू त्रिपाठी के नेतृत्व में एक टीम गठित की और शिकायत का सत्यापन करवाया। सोमवार की दोपहर करीब तीन बजे जैसे ही सच्चिदानंद गोस्वामी रिश्वत के पैसे लेकर गोरखपुर तहसील पहुंचा तो अशोक और ऋषि साथ में बैठे हुए थे। दोनों आरोपियों ने जैसे ही रुपए लिए तो लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में ऋषि पांडे सहायक ग्रेड 3 को मुख्य आरोपी और अशोक रजक सहायक ग्रेड-2 को सह आरोपी बनाया गया है।
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