24 साल में 45 परीक्षा घोटाले, सजा सिर्फ एक को, गिरफ्तारी हुई, पदोन्नति भी मिली
Aman Vaishnav | Jun 05, 2026, 13:58 IST
paper leak officials action india
देशभर में 24 साल में 45 बड़े पेपर लीक मामले सामने आए, लेकिन जिम्मेदार अफसरों में से सिर्फ एक को ही कोर्ट से सजा मिली। बाकी या तो बहाल हुए, या ट्रांसफर, कर दिया गया।
गिरफ्तारी हुई। निलंबन हुआ। अखबारों में खबर छपी। और फिर प्रमोशन भी मिल गया।
यह किसी एक अफसर की कहानी नहीं है। पिछले 24 साल में 45 बड़े पेपर लीक मामलों में यही पैटर्न बार-बार दिखा है। आइए जानें कैसे बार- बार एक ही पैटर्न के बाद भी एक्शन का पता नहीं…
होनहार छात्रा आकांक्षा बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। नीट पेपर लीक मामले ने आकांक्षा की जिंदगी और उसके परिवार की उम्मीदों को हमेशा के लिए तबाह कर दिया।
आकांक्षा नागपुर में रहकर नीट यूजी की तैयारी कर रही थी। आकांक्षा को इस बार परीक्षा में 650 से अधिक अंक आने की उम्मीद थी।
आकांक्षा की पढ़ाई के लिए उसके किसान पिता ने लोन लिया और खुद कुक की नौकरी कर पाई-पाई जोड़ी थी। इस धांधली की खबर से गहरे सदमे में आकर आकांक्षा ने आत्मघाती कदम उठा लिया।
आपके घर में कोई UPSC, SSC, NEET, पुलिस भर्ती या टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट की तैयारी कर रहा है तो यह खबर सीधे उसके भविष्य से जुड़ी है।
जब एक पेपर लीक होता है, तो साल भर की मेहनत कूड़ेदान में चली जाती है। वहीं जब जिम्मेदार अफसर वापस अपनी कुर्सी पर बैठ जाते हैं तो अगला पेपर लीक तय हो जाता है।
भारत में कंपटीटिव एग्जाम की मांग पिछले दो दशकों में कई गुना बढ़ी है। सरकारी नौकरी का मतलब है सुरक्षा, सम्मान और एक स्थिर जिंदगी। यही कारण है कि UPSC के लिए 10 लाख से ज्यादा candidates बैठते हैं। वहीं NEET के लिए 24 लाख से ऊपर।
इस भीड़ में परीक्षा माफिया के लिए मौका है। पेपर लीक सिर्फ नकल नहीं है यह एक संगठित कारोबार है। इसमें प्रिंटिंग प्रेस से लेकर एग्जामिनेशन बोर्ड तक के लोग शामिल होते हैं।
इस चैन को तोड़ने के लिए जरूरी है कि जो अफसर जिम्मेदार हों, उन्हें असल सजा मिले।
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2010 की बात करें तो रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड मुंबई के तत्कालीन अध्यक्ष सत्येंद्र मोहन शर्मा का एकमात्र मामला है, जहां किसी शीर्ष अधिकारी को असल सजा मिली।
CBI कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई, लेकिन यह सजा भी 14 साल बाद 2024 में आई थी।
2021 में UPTET पेपर लीक हुआ। UP के एग्जाम रेगुलेटरी अथॉरिटी के सचिव संजय कुमार उपाध्याय को बुक किया गया।
संजय कुमार को निलंबित किया गया और गिरफ्तार भी किया गया। विभागीय जांच में आरोप साबित नहीं हुए। नतीजा? उनका निलंबन वापस लिया गया और वे ज्वाइंट डायरेक्टर बन गए।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार 2002 से 2025 के बीच देश में 45 बड़े पेपर लीक के मामले सामने आए। इन मामलों में परीक्षा संस्थाओं में बड़े पदों पर बैठे अफसर सीधे आरोपी बने। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से बहुत कम को असल में सजा मिली। ज्यादातर या तो जमानत पर हैं या मुकदमे सालों से कोर्ट में घिसट रहे हैं।
2024 में यूजीसी नेट का मामला सामने आया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के डीजी सुबोध कुमार सिंह को हटाकर चार महीने के लिए स्टील मंत्रालय में भेज दिया गया था।
इसके बाद उन्हें उनके गृह राज्य छत्तीसगढ़ वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई। सिंह ने इस खबर पर कोई टिप्पणी नहीं की।
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यूपीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक अजय कुमार तिवारी पर रिव्यू ऑफिसर और असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर भर्ती में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। जुलाई 2024 में पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
12 आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जून से सितंबर 2024 के बीच जमानत मिल गई। मामला अभी प्रयागराज कोर्ट में चल रहा है।
यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्डकी चेयरपर्सन रेनुका मिश्रा, जो 1990 बैच की आईपीएस अफसर हैं। इन्हें डीजीपी रैंक से हटाया गया था। अभी वे डीजीपी कार्यालय से जुड़ी हैं। मिश्रा ने इस मामले पर बात करने से इनकार किया है।
2023 में बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती में संजय सिंहल के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश हुई। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने सेंट्रल सेलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल्स का नेतृत्व किया था। उन पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। सिंहल ने कहा कि वे सही समय पर बात करेंगे।
2022 में आरपीएससी के सदस्य बाबूलाल कटारा को सीनियर टीचर भर्ती मामले में गिरफ्तार किया गया था। साथ ही जनवरी 2024 में निलंबित कर दिया गया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत भी दर्ज है। वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं और मुकदमा चल रहा है।
2021 में एक और आरपीएससी मामला सामने आया था। तब सीएम अशोक गहलोत ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जरोली को हटाया था।
आरबीएसई के सचिव अरविंद कुमार सेंगवा को निलंबित किया था। फिर बाद में बहाल करके नवंबर 2022 में दोबारा तैनात कर दिया। ईडी जांच में जरोली का नाम आया। उन्होंने कहा कि यह उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश है।
2021 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी यूकेएसएससी के चेयरमैन एस राजू ने पेपर लीक मामले में 5 अगस्त 2022 को इस्तीफा दिया था। मामला कोर्ट में चल रहा है।
यूपीटेट UPTET मामले में 2021 में यूपी परीक्षा नियामक प्राधिकरण के सचिव संजय कुमार उपाध्याय को गिरफ्तार किया गया था।
बाद में निलंबन हटाकर उन्हें ज्वाइंट डायरेक्टर बना दिया गया। 23 लोगों पर चार्जशीट दाखिल की गई थी।
उपाध्याय ने कहा कि विभागीय कार्रवाई में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।
2018 में यूपी शिक्षक भर्ती घोटाले में यूपीपीएससी परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को बर्खास्त किया गया और गिरफ्तार किया गया। वे जमानत पर बाहर हैं।
2019 से सुनवाई चल रही है। उन्होंने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि जल्द सच सामने आएगा।
2015 यूपीपीएससी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेयरमैन अनिल यादव की नियुक्ति रद्द की थी। यादव ने सभी आरोपों को प्रोपेगेंडा बताया था। साथ ही कहा था कि किसी कोर्ट ने उनके खिलाफ कुछ साबित नहीं किया।
2013 में आरपीएससी चेयरमैन हबीब खान गौरन ने इस्तीफा दिया, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरेंडर किया और जमानत पर बाहर आए। मामला अभी भी पेंडिंग है।
2010 में रेलवे भर्ती बोर्ड मुंबई के पूर्व चेयरमैन सतेंद्र शर्मा और नौ अन्य को सीबीआई कोर्ट ने 30 जनवरी 2024 को दोषी ठहराया था।
पांच साल की कठोर सजा सुनाई गई। इसके बाद शर्मा को तेलंगाना हाईकोर्ट से 2 फरवरी 2024 को जमानत मिल गई।
2024 में UGC NET पेपर लीक के बाद सुबोध कुमार सिंह को National Testing Agency के डायरेक्टर जनरल के पद से हटा दिया गया।
इसके बाद उन्हें चार महीने तक किसी भी पोस्ट पर नहीं रखा गया। फिर उन्हें Ministry of Steel में एडिशनल सेक्रेटरी बना दिया गया और उनका छत्तीसगढ़ कैडर में वापस ट्रांसफर कर दिया गया।
यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा लीक में तत्कालीन बोर्ड चेयरमैन रेनुका मिश्रा- 1990 batch की IPS अधिकारी को हटाया गया। वे अभी भी DGP Office, UP में अटैच हैं।
इस पूरे खेल में तीन तरह के प्लेयर्स हैं।
राजस्थान इस रिपोर्ट में सबसे ज्यादा बार आता है। RPSC के दो अलग-अलग मामलों जैसे 2013 में तत्कालीन RPSC Chairman हबीब खान गौराण और 2021 में member रामू राम राईका - दोनों cases में trial अभी जारी है।
2022 में RPSC member बाबूलाल कटारा का मामला सबसे गंभीर है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की prosecution complaint file की। कटारा अभी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। यह मामला राजस्थान के भर्ती तंत्र में गहरी सड़न को दर्शाता है।
2021 का REET Level-2 लीक। तत्कालीन सीएम आशोक गहलोत ने RBSE Chairman D P Jaroli को हटाया। लेकिन RBSE Secretary अरविंद कुमार सेंगवा को नवंबर 2022 में दोबारा post कर दिया गया।
Jaroli ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया। यह वो मोमेंट था जब राजनीति और अकाउंटेबिलिटी के बीच की लकीर धुंधली हो गई।
भारत का संविधान समान अवसर की गारंटी देता है। जब परीक्षाओं में धांधली होती है और जिम्मेदार अफसरों को वापस system में ले लिया जाता है, तो यह constitutional promise टूटती है।
लाखों युवाओं की मेहनत और उनके परिवारों का भरोसा दांव पर होता है। जब अकाउंटेबिलिटी नहीं होती, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, यह एक नैतिक और कानूनी संकट है।
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यह किसी एक अफसर की कहानी नहीं है। पिछले 24 साल में 45 बड़े पेपर लीक मामलों में यही पैटर्न बार-बार दिखा है। आइए जानें कैसे बार- बार एक ही पैटर्न के बाद भी एक्शन का पता नहीं…
होनहार छात्रा आकांक्षा बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। नीट पेपर लीक मामले ने आकांक्षा की जिंदगी और उसके परिवार की उम्मीदों को हमेशा के लिए तबाह कर दिया।
आकांक्षा नागपुर में रहकर नीट यूजी की तैयारी कर रही थी। आकांक्षा को इस बार परीक्षा में 650 से अधिक अंक आने की उम्मीद थी।
आकांक्षा की पढ़ाई के लिए उसके किसान पिता ने लोन लिया और खुद कुक की नौकरी कर पाई-पाई जोड़ी थी। इस धांधली की खबर से गहरे सदमे में आकर आकांक्षा ने आत्मघाती कदम उठा लिया।
यह मामला आपसे क्यों जुड़ा है?
जब एक पेपर लीक होता है, तो साल भर की मेहनत कूड़ेदान में चली जाती है। वहीं जब जिम्मेदार अफसर वापस अपनी कुर्सी पर बैठ जाते हैं तो अगला पेपर लीक तय हो जाता है।
भारत में कंपटीटिव एग्जाम की मांग पिछले दो दशकों में कई गुना बढ़ी है। सरकारी नौकरी का मतलब है सुरक्षा, सम्मान और एक स्थिर जिंदगी। यही कारण है कि UPSC के लिए 10 लाख से ज्यादा candidates बैठते हैं। वहीं NEET के लिए 24 लाख से ऊपर।
इस भीड़ में परीक्षा माफिया के लिए मौका है। पेपर लीक सिर्फ नकल नहीं है यह एक संगठित कारोबार है। इसमें प्रिंटिंग प्रेस से लेकर एग्जामिनेशन बोर्ड तक के लोग शामिल होते हैं।
इस चैन को तोड़ने के लिए जरूरी है कि जो अफसर जिम्मेदार हों, उन्हें असल सजा मिले।
paper leak
अब तक सिर्फ एक को सजा
CBI कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई, लेकिन यह सजा भी 14 साल बाद 2024 में आई थी।
बाकी 44 मामलों में क्या हुआ?
संजय कुमार को निलंबित किया गया और गिरफ्तार भी किया गया। विभागीय जांच में आरोप साबित नहीं हुए। नतीजा? उनका निलंबन वापस लिया गया और वे ज्वाइंट डायरेक्टर बन गए।
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24 साल, 45 लीक
यूजीसी नेट 2024 में क्या हुआ?
इसके बाद उन्हें उनके गृह राज्य छत्तीसगढ़ वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई। सिंह ने इस खबर पर कोई टिप्पणी नहीं की।
807b1bfd-0e4
यूपीपीएससी 2024 और यूपी पुलिस के मामले
12 आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जून से सितंबर 2024 के बीच जमानत मिल गई। मामला अभी प्रयागराज कोर्ट में चल रहा है।
यूपी पुलिस भर्ती
2023 में बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती
आरपीएससी में दो बड़े मामले
2021 में एक और आरपीएससी मामला सामने आया था। तब सीएम अशोक गहलोत ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जरोली को हटाया था।
आरबीएसई के सचिव अरविंद कुमार सेंगवा को निलंबित किया था। फिर बाद में बहाल करके नवंबर 2022 में दोबारा तैनात कर दिया। ईडी जांच में जरोली का नाम आया। उन्होंने कहा कि यह उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश है।
यूकेएसएससी और यूपीटेट का मामला
यूपीटेट UPTET मामले में 2021 में यूपी परीक्षा नियामक प्राधिकरण के सचिव संजय कुमार उपाध्याय को गिरफ्तार किया गया था।
बाद में निलंबन हटाकर उन्हें ज्वाइंट डायरेक्टर बना दिया गया। 23 लोगों पर चार्जशीट दाखिल की गई थी।
उपाध्याय ने कहा कि विभागीय कार्रवाई में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।
यूपी शिक्षक भर्ती 2018
2019 से सुनवाई चल रही है। उन्होंने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि जल्द सच सामने आएगा।
यूपीपीएससी 2015
2013 आरपीएससी और 2010 रेलवे बोर्ड
2010 में रेलवे भर्ती बोर्ड मुंबई के पूर्व चेयरमैन सतेंद्र शर्मा और नौ अन्य को सीबीआई कोर्ट ने 30 जनवरी 2024 को दोषी ठहराया था।
पांच साल की कठोर सजा सुनाई गई। इसके बाद शर्मा को तेलंगाना हाईकोर्ट से 2 फरवरी 2024 को जमानत मिल गई।
UGC NET पेपर लीक 2025
इसके बाद उन्हें चार महीने तक किसी भी पोस्ट पर नहीं रखा गया। फिर उन्हें Ministry of Steel में एडिशनल सेक्रेटरी बना दिया गया और उनका छत्तीसगढ़ कैडर में वापस ट्रांसफर कर दिया गया।
यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा लीक में तत्कालीन बोर्ड चेयरमैन रेनुका मिश्रा- 1990 batch की IPS अधिकारी को हटाया गया। वे अभी भी DGP Office, UP में अटैच हैं।
इस खेल में कौन- कौन हैं शामिल
- पहले, माफिया नेटवर्क- जो पेपर print होने से पहले ही उसकी copy खरीद लेते हैं।
- दूसरे, exam board के अंदर के लोग- जिनकी मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं।
- तीसरे, सिस्टम- जो अकाउंटेबिलिटी के नाम पर ट्रांसफर और रिइंस्टेटमेंटका खेल खेलता है।
क्या ऐसे मामलों का MP, RJ, CG कनेक्शन है?
2022 में RPSC member बाबूलाल कटारा का मामला सबसे गंभीर है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की prosecution complaint file की। कटारा अभी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। यह मामला राजस्थान के भर्ती तंत्र में गहरी सड़न को दर्शाता है।
2021 का REET Level-2 लीक। तत्कालीन सीएम आशोक गहलोत ने RBSE Chairman D P Jaroli को हटाया। लेकिन RBSE Secretary अरविंद कुमार सेंगवा को नवंबर 2022 में दोबारा post कर दिया गया।
Jaroli ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया। यह वो मोमेंट था जब राजनीति और अकाउंटेबिलिटी के बीच की लकीर धुंधली हो गई।
यह खबर क्यों जरूरी है?
लाखों युवाओं की मेहनत और उनके परिवारों का भरोसा दांव पर होता है। जब अकाउंटेबिलिटी नहीं होती, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, यह एक नैतिक और कानूनी संकट है।
FAQ
- पेपर लीक में जिम्मेदार अफसरों को सजा क्यों नहीं मिलती?
भारत में ट्रायल की प्रक्रिया बेहद लंबी है। RRB Mumbai का मामला 14 साल बाद निपटा। इस दौरान अधिकारी जमानत पर रहते हैं और विभागीय जांच में अक्सर "आरोप साबित नहीं" का नतीजा आता है। नतीजतन असली सजा कम ही होती है। - Public Examinations Prevention Act 2024 क्या है?
यह 2024 में पास हुआ केंद्रीय कानून है जो पेपर लीक के दोषियों को 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान करता है। यह पहला केंद्रीय कानून है जो भर्ती परीक्षाओं में धांधली पर सख्ती से लागू होता है। - 24 साल में 45 पेपर लीक मामलों में कितनों को सजा मिली?
The Indian Express की जांच के मुताबिक सिर्फ एक मामले में कोर्ट से दोषसिद्धि हुई — 2010 का RRB Mumbai मामला, जिसमें सजा 2024 में आई। बाकी मामलों में अधिकारी या तो बहाल हुए, ट्रांसफर हुए, या ट्रायल अभी जारी है।
हैकर्स के पास पहुंचा सीबीएसई का डेटा, 999 रुपए में बिक रही छात्रों की पर्सनल जानकारी
भ्रष्टाचार की जांच में सुस्त लोकायुक्त और EOW, खात्मा रिपोर्ट पेश करने में दिखाई फुर्ती
जल जीवन मिशन झाबुआ में फेल, 430 करोड़ खर्च फिर भी जनता प्यासी, जिम्मेदार कौन?
दिल्ली होटल हादसे से एमपी को सबक लेने की जरूरत, जंग खा रहे इमारतों के फायर सिस्टम
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