एमपी मेडिकल बिल घोटाला: 2.87 करोड़ के गबन में फंसे पुलिसकर्मी फिर प्रमोशन की दौड़ में

Aman Vaishnav | Oct 18, 2026, 10:42 IST
मेडिकल बिल घोटाला: 13 जुलाई से 13 अक्टूबर तक प्रमोशन विवाद की पूरी टाइमलाइन
मध्य प्रदेश में मेडिकल बिल घोटाले में जिन पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए थे, वे अब फिर प्रमोशन की सूची में बताए जा रहे हैं। बता दें कि पीएचक्यू मेडिकल बिल घोटाला 2.87 करोड़ रुपए का है। 13 अक्टूबर को जारी प्रस्तावित सूची में ऐसे कई पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं, जिनसे घोटाले की रकम की रिकवरी की जा रही है।

वहीं शिकायतकर्ता नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। एआईजी कार्मिक अमित सक्सेना के मुताबिक आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए सब नियमानुसार है।



पीएचक्यू का मेडिकल बिल घोटाला

इस पूरे मामले (PHQ medical bill scam) में कुल 48 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए थे। वहीं इनमें से केवल 3 पुलिसकर्मियों के खिलाफ ही FIR दर्ज करवाई गई। इन पर केस चल रहा है। बाकी 45 पुलिसकर्मियों से सिर्फ गबन की गई राशि वसूल ली गई। साथ ही उन्हें मामले में क्लीन चिट दे दी गई। कोर्ट में भी विभाग की तरफ से यह स्वीकार किया गया है कि 48 पुलिसकर्मियों से रिकवरी की कार्रवाई की गई थी।



नई लिस्ट में इन पुलिसकर्मियों के नाम

विभाग में 13 अक्टूबर को लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए नई लिस्ट जारी की गई है। इस सूची में ऐसे कई पुलिसकर्मी शामिल हैं, जिनसे फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में वसूली की गई थी। इनमें से एक पुलिसकर्मी तो ऐसा भी है जो वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात है।



  • दुर्गेश रायकवार
  • के मिंज
  • किरण चौधरी
  • आशीष अग्निहोत्री
  • लीलाधर तिवारी
  • नरेश शर्मा
  • पूनम बघेल
  • सरिता तलवाने
  • तृषा ठाकुर
  • प्रताप सिंह बामनिया
  • अंतिमा जैन
  • अर्पणा द्विवेदी
  • विपिन कुमार रौतेल
  • गौरव आरोनकर
  • संदीप सूर्यवंशी
  • भारती तिवारी
  • राकेश त्रिपाठी

पहले रद्द हुआ था प्रमोशन, फिर भी अवॉर्ड से नवाजे गए

यह खेल काफी समय से चल रहा है। 13 जुलाई को पीएचक्यू ने घोटाले में फंसे 16 पुलिसकर्मियों को एएसआई से एसआई पद पर पदोन्नत करने का आदेश दिया था। जब इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई, तब जाकर 2 सितंबर को 13 पुलिसकर्मियों का प्रमोशन रद्द किया गया था।



हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद 30 सितंबर को एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया। उत्कृष्ट पुलिस सेवा के लिए दिए जाने वाले डीजीपी प्रशस्ति पत्र एवं डिस्क सम्मान की सूची में घोटाले में शामिल गौरव आरोनकर और आरती चतुर्वेदी के नाम भी शामिल थे। प्रशासन शाखा में पदस्थ गौरव से 10.99 लाख रुपए और आरती से 85 हजार रुपए की वसूली की गई थी।



जिस शाखा से सूची बनती है, वहीं पदस्थ

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिन पुलिसकर्मियों पर गबन के आरोप लगे, उन्हें ही प्रशासन और लेखा शाखा जैसी अहम जिम्मेदारियां दे दी गईं। पीएचक्यू की प्रशासन शाखा से ही डीपीसी (DPC) और पुरस्कारों से जुड़ी फाइलें तैयार होती हैं।



जिम्मेदार अधिकारी का पक्ष

पीएचक्यू की कार्मिक शाखा के एआईजी अमित सक्सेना ने बताया कि डीपीसी की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक की गई है। पुलिसकर्मियों से पैसे की वसूली हुए एक साल हो चुका है। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इसी वजह से उन्हें डीपीसी में शामिल किया गया है।



FAQ



1. पीएचक्यू मेडिकल बिल घोटाला कितने रुपए का है?



जानकारी के अनुसार यह घोटाला 2.87 करोड़ रुपए का है। इसमें 48 पुलिसकर्मियों से वसूली की कार्रवाई की गई। सिर्फ 3 के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।

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