पिनैकल डिजायर में 1000 करोड़ का प्लान, फ्रंट में अहमदाबाद की कंपनी, पर्दे के पीछे इंदौर की

Sanjay Gupta | Jun 30, 2026, 14:00 IST
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पिनैकल डिजायर में 1000 करोड़ का प्लान, फ्रंट में अहमदाबाद की कंपनी
पिनैकल डिजायर में 1000 करोड़ का प्लान, फ्रंट में अहमदाबाद की कंपनी

इंदौर के सबसे चर्चित पिनैकल प्रोजेक्ट में एक बड़ी बिसात बिछ गई है। मामला कंपनी के सुपर कॉरिडोर पालाखेड़ी स्थित प्रोजेक्ट पिनैकल डिजायर का है। इस दिवालिया प्रोजेक्ट को लेने के लिए फ्रंट में अहमदाबाद की कंपनी आई है।

इंदौर में साल 2009-10 के दौरान आशीष दास और पुष्पेंद्र बढ़ेरा की कंपनी जेएसएम देवकांस इंडिया प्रा. लि. ने एक के बाद एक तीन प्रोजेक्ट शुरू किए थे। लेकिन साल 2016 तक कंपनी दिवालिया हो गई और तीनों प्रोजेक्ट बंद हो गए। इसके बाद ये मामले एनसीएलटी में पहुंच गए।

इनमें पहला प्रोजेक्ट निपानिया का पिनैकल ड्रीम्स था, जहां बहुमंजिला इमारतें और लग्जरी फ्लैट बनाए जाने थे। दूसरा प्रोजेक्ट पिनैकल ग्रांड था। तीसरा और सबसे बड़ा प्रोजेक्ट पिनैकल डिजायर था, जो सुपर कॉरिडोर के पालाखेड़ी इलाके में करीब 50 एकड़ जमीन पर लाया गया था।

अब इसी पिनैकल डिजायर प्रोजेक्ट को टेकओवर करने की तैयारी अंतिम चरण में है।

क्या है प्रोजेक्ट पिनैकल डिजायर

पिनैकल डिजायर प्रोजेक्ट सुपर कॉरिडोर के पालाखेड़ी इलाके में करीब 50 एकड़ की कीमती जमीन पर लाया गया था। इस प्रोजेक्ट को आशीष दास और पुष्पेंद्र बढ़ेरा ने अपनी कंपनी जेएसएम देवकांस इंडिया प्रा. लि. के जरिए शुरू किया था।

प्रोजेक्ट में 600 से ज्यादा छोटे-बड़े प्लॉट काटे गए थे। कई लोगों ने यहां प्लॉट खरीदे और उनकी रजिस्ट्री भी कराई। खरीदारों ने करीब 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम आधिकारिक रूप से जमा की थी।

कंपनी ने जमीन करीब 550 रुपए प्रति वर्गफीट के हिसाब से बेचने की बात कही थी। बाद में कंपनी दिवालिया हो गई और पूरा प्रोजेक्ट एनसीएलटी में चला गया।

प्रोजेक्ट में 89 करोड़ रुपए लौटाने की बात

इस प्रोजेक्ट में सिक्योर्ड, अनसिक्योर्ड क्रेडिटर यानी कर्ज देने वालों के साथ ही प्लॉट की खरीदी करने वालों की डिमांड राशि रखी गई है। हाल ही में कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स की बैठक हुई है। इसमें सभी की कुल 89 करोड़ की डिमांड राशि की बात रखी गई, जिसे मोटे तौर पर मान्य किया गया है। इसमें-

श्रेणीराशि
सिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर15.17 करोड़ रुपए
अन्य फाइनेंशियल क्रेडिटर19.23 करोड़ रुपए
प्लॉट बायर्स50.41 करोड़ रुपए
कर्मचारियों का वेतन7 लाख रुपए
अन्य देनदारी3.68 करोड़ रुपए
(इस तरह कुल 89.59 करोड़ की देनदारी राशि को प्रारंभिक तौर पर मंजूर किया गया है।)

इस प्रोजेक्ट को लेने के लिए इस कंपनी ने दिया प्रस्ताव

जब यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, तब इसकी अनुमानित कीमत करीब 100 करोड़ रुपए थी। अब केवल जमीन की कीमत ही एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी जा रही है।

इस प्रोजेक्ट को पूरा करने और इससे जुड़ी सभी देनदारियां संभालने के लिए अहमदाबाद की जानी-मानी कंपनी मेसर्स क्यूब कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग लिमिटेड ने कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स यानी सीओसी के सामने प्रस्ताव रखा है। कमेटी इस प्रस्ताव पर चर्चा कर चुकी है।

अब रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पूरे प्रस्ताव और दस्तावेजों का अध्ययन कर रहे हैं। सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद मामला मंजूरी के लिए एनसीएलटी भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया में करीब तीन से चार महीने लग सकते हैं।

अब इस तरह 1000 करोड़ का होगा प्रोजेक्ट

प्रस्ताव के मुताबिक, सबसे पहले प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी देनदारियों और भुगतान की जांच होगी। केवल वही रकम मान्य होगी, जो बैंकिंग चैनल के जरिए दी गई है। नकद, ब्लैक मनी या नंबर दो में किए गए भुगतान को मान्यता नहीं मिलेगी।

प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली कंपनी प्लॉट की कीमतें भी नए सिरे से तय करेगी। इस इलाके में अभी जमीन का भाव करीब 4,000 से 5,000 रुपए प्रति वर्गफीट बताया जा रहा है। इसी वजह से जो प्रोजेक्ट पहले करीब 100 करोड़ रुपए का था, उसकी मौजूदा कीमत अब एक हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।

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प्रोजेक्ट का काम पर्दे के पीछे इंदौर की कंपनी संभालेगी

इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में इंदौर के एक बड़े रियल एस्टेट बिल्डर की अहम भूमिका रहने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, अहमदाबाद की कंपनी क्यूब कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग को सामने रखा गया है। लेकिन असल जिम्मेदारी इंदौर की एक ऐसी कंपनी संभाल सकती है, जिसे 50 से 100 एकड़ तक के बड़े प्रोजेक्ट संभालने का अनुभव है।

बताया जा रहा है कि इस कंपनी से पूरी बातचीत हो चुकी है और आगे वही पूरे प्रोजेक्ट को संभालेगी। जिन प्लॉटधारकों या कर्ज देने वालों के भुगतान का बैंकिंग रिकॉर्ड नहीं होगा, उनके दावे स्वीकार नहीं किए जाएंगे। बदले में कंपनी को प्रोजेक्ट के प्लॉट बाजार भाव के हिसाब से बेचने की छूट मिल सकती है।

पिनैकल के ये हैं तीनों प्रोजेक्ट

पिनैकल ड्रीम्स प्रोजेक्ट इंदौर

पिनैकल ड्रीम्स निपानिया में एक मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट है। यह करीब 4.6 हेक्टेयर जमीन पर फैला हुआ है। जमीन अशोका ग्रुप की थी, जबकि प्रोजेक्ट को डेवलप करने की जिम्मेदारी आशीष दास और पुष्पेंद्र बढ़ेरा की कंपनी जेएसएम के पास थी।

बाद में जेएसएम कंपनी दिवालिया हो गई और मामला एनसीएलटी पहुंच गया। अप्रैल 2024 में एनसीएलटी ने यह प्रोजेक्ट मुंबई की देवव्रत कंपनी को सौंप दिया।

इस प्रोजेक्ट में लोगों ने कुल करीब 308 करोड़ रुपए का दावा किया था। लेकिन कंपनी ने केवल 402 लोगों के लगभग 200 करोड़ रुपए के दावे ही मंजूर किए।

पिनैकल ग्रांड

पिनैकल ग्रांड प्रोजेक्ट निपानिया में करीब नौ हेक्टेयर जमीन पर फैला हुआ है। इस प्रोजेक्ट में मध्य प्रदेश के कई प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों के प्लॉट बताए जाते हैं।

दिल्ली आयकर विभाग ने जब कुछ रसूखदारों के ठिकानों पर छापे मारे, तब इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कई जानकारियां सामने आईं। जांच में पता चला कि कागजों में प्लॉट की बुकिंग 940 रुपए प्रति वर्गफीट के हिसाब से दिखाई गई थी। जबकि पर्दे के पीछे इनका सौदा करीब 2,200 रुपए प्रति वर्गफीट के भाव पर हुआ था।

बताया गया कि इन सौदों में बड़े पैमाने पर ब्लैक मनी का इस्तेमाल हुआ। फिलहाल यह पूरा प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है।

पिनैकल डिजायर

पिनैकल डिजायर प्रोजेक्ट सुपर कॉरिडोर के पालाखेड़ी इलाके में करीब 50 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है। यहां कई लोगों ने प्लॉट खरीदे और उनकी रजिस्ट्री भी कराई।

बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने आशीष दास और पुष्पेंद्र बढ़ेरा पर दबाव बनाकर जमीन अपने नाम करा ली, लेकिन उसका भुगतान नहीं किया। उस समय उनके दो दूसरे प्रोजेक्ट ठंडे पड़ चुके थे और उन पर भारी देनदारी थी। इसी दबाव को कम करने के लिए यहां जमीन दी गई।

अब ऐसे लोगों के दावे मान्य नहीं होंगे, क्योंकि उनके भुगतान का कोई बैंकिंग रिकॉर्ड नहीं है। यानी जिन सौदों में रकम बैंक के जरिए नहीं दी गई, उन्हें क्लेम से बाहर रखा जाएगा।

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