कूनो में चीतों के शिकार का टोटा, हिरण की जगह खा रहे बकरी और मवेशी

Sanjay Sharma | Jun 30, 2026, 22:44 IST
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कूनों में चीतों को शिकार का टोटा
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL कूनो नेशनल पार्क में चीतों का 50% शिकार बकरी-मवेशी है। रिपोर्ट में चीतल 42% है। रिपोर्ट में शिकार बढ़ोतरी और सामुदायिक भागीदारी जरूरी बताई गई।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • कूनो में शिकार के रूप में 50% मवेशी और 42% चीतल।
  • चीता ज्वाला और अग्नि को बकरी का शिकार पसंद।
  • अभयारण्य के 3,198 वर्ग किमी में विचरण कर रहे हैं चीते।
  • कोर क्षेत्र में प्रति वर्ग किमी 23 चीतल, बफर जोन में और भी कम।
  • बढ़ते कुनबे और शिकार की कमी से टकराव बढ़ने का अंदेशा।
एमपी में प्रोजेक्ट चीता की नई रिपोर्ट ने कूनो अभयारण्य प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में कूनो नेशनल पार्क में चीतों के आहार और शिकार जैसी गतिविधियों का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में बफर जोन में शिकार की कमी के कारण चीतों द्वारा बकरी जैसे मवेशियों के शिकार की स्थिति भी बताई गई है। साथ ही इस वजह से ग्रामीणों और चीतों के बीच टकराव की आशंका भी जताई गई है। कूनों अभयारण्य के 19 चीतों का 50 फीसदी शिकार आसपास के गांवों से आने वाली बकरी और मवेशी बने हैं। जबकि चीतों ने वन्यजीवों के रूप में 42 फीसदी चीतल का शिकार किया गया है। चीता ज्वाला के शावक बकरी जैसे छोटे मवेशियों का शिकार कर रहे हैं। वहीं अग्नि चीता को चीतल जैसे वन्य जीवों का शिकार पसंद है।

तेजी से बढ़ रहा चीतों का कुनबा

कूनो नेशनल पार्क को प्रोजेक्ट चीता के तहत मिले चीतों की संख्या 20 से बढ़कर 53 हो गई है। सितम्बर 2024 से दिसम्बर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक नेशनल पार्क में 53 चीते हैं। इनमें 13 शावक, 17 किशोर और 23 वयस्क हैं। इनमें से 19 चीते बाड़ों से मुक्त किए जाने के बाद खुलकर विचरण कर रहे हैं। स्वतंत्रत रूप से विचरण करने वाले चीतों को अब शिकार के लिए ज्यादा जानवरों की जरूरत पड़ रही है। कोर एरिया में शिकार पर्याप्त हैं लेकिन बफर जोन में चीतल जैसे छोटे वन्य जीवों की उपलब्धता कम है। इस वजह से चीते शिकार की तलाश में भटककर बफर जोन से दूर जा रहे हैं।

मवेशियों का शिकार बढ़ा रहा टकराव

कूनो में कुनबा बढ़ने के साथ ही वयस्क चीते अब बफर और कोर एरिया के बाहर का रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि करीबी गांवों से आने वाले बकरी, गाय जैसे मवेशी उनका शिकार बनने लगे हैं। मवेशियों के शिकार की वजह से ग्रामीणों को नुकसान हो रहा है और इससे टकराव की स्थिति बन रही है। चीते लंबी दूरी तय करते हैं। चीता अग्नि केवल 30 दिन में ही 3,198 वर्ग किमी में विचरण कर चुका है। व वहीं केपी-2 भी कुलांचे मारते हुए रणथंभौर तक विचरण कर चुका है। उसे वापस लाने में नेशनल पार्क प्रबंधन को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। कूनो नेशनल पार्क 748.76 वर्ग किमी में है। बफर जोन सहित इसका क्षेत्रफल 1,800 वर्ग किमी है।

वन्यजीव कम इसलिए मवेशियों का शिकार

हाल ही में जारी मॉनीटरिंग रिपोर्ट के अनुसार नेशनल पार्क के बफर जोन में चीतल जैसे शाकाहारी जीवों की कमी है। चीते आमतौर पर शाकाहारी या घास चरने वाले जीवों का शिकार करते हैं। वन्यजीव पर्याप्त न होने की स्थिति के चलते वे बकरी और गाय जैसे मवेशियों के शिकार पर निर्भर हो रहे हैं। ऐसे ही शिकार की तलाश में वे बफर जोन छोड़कर आसपास के इलाकों का रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार चीतों के कुल शिकार का 50 फीसदी बकरी और मवेशी हैं। इसमें भी 40 फीसदी शिकार बकरियां बनी हैं। कुल शिकार में चीतल 40 फीसदी और नीलगाय 2 फीसदी हैं। मादा चीतों को ज्यादा शिकार करना पड़ता है क्योंकि शावकों को पालने के लिए उन्हें इसकी जरूरत होती है।
  • शिकार: 50% बकरी-मवेशी, 42% चीतल।
  • आहार: ज्वाला बकरी खाती, अग्नि चीतल।
  • मूवमेंट: चीते 3,198 वर्ग किमी, 12 जिलों में गए।
  • शिकार घनत्व: कोर में चीतल भरपूर, बफर में कमी।
  • संख्या: भारत में कुल 53 चीते हो गए।

FAQ

  1. कूनो में चीता का मुख्य शिकार क्या है?
    कूनो नेशनल पार्क में चीतों का मुख्य शिकार बकरी और मवेशी है। यह कुल शिकार का 50% है। चीतल 42% है। नीलगाय 2% है। रिपोर्ट के अनुसार शावकों वाली मादा ज्यादा शिकार करती हैं। कोर क्षेत्र में चीतल भरपूर हैं। बफर में मवेशी आसान शिकार बनते हैं।
  2. ज्वाला और अग्नि चीता क्या खाते हैं?
    ज्वाला और शावक 40% घरेलू बकरी खाते हैं। इसके बाद मवेशी और चीतल खाते हैं। नर चीता अग्नि 39% चीतल खाता है। वह 26% मवेशी खाता है। बकरी 19% है। भेड़ 10% है। नीलगाय और जंगली सुअर 3% हैं।
  3. प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में कितने चीते हैं?
    प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में अब 53 चीते हैं। 2022 में 20 चीते लाए गए थे। आठ नामीबिया से आए थे। बारह दक्षिण अफ्रीका से आए थे। अब 13 वयस्क हैं। 17 उप-वयस्क हैं। 23 शावक हैं। तीन चीते गांधी सागर में हैं।

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