राघौगढ़ में राम महायज्ञ या सियासी रीब्रांडिंग? दिग्विजय-जयवर्धन की नई रणनीति पर चर्चा तेज

Ramanand Tiwari | May 18, 2026, 23:41 IST
raghougarh mahayagya
मध्य प्रदेश में राघौगढ़ में 151 कुंडीय राम महायज्ञ हुआ। दिग्विजय और जयवर्धन सिंह धार्मिक आयोजनों में सक्रिय हैं। राजनीतिक हलकों में इसे सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि कांग्रेस की नई चुनावी रणनीति माना जा रहा है।

मध्यप्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों से घिरे रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अब खुले तौर पर सनातनी छवि दिखा रहे हैं। राघौगढ़ में 151 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ, अयोध्या दौरा, बागेश्वर धाम यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रियता बढ़ रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे केवल आस्था नहीं, बल्कि 2023 चुनाव के बाद शुरू हुआ बड़ा डैमेज कंट्रोल माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह बदलाव आस्था का विस्तार है या घटते राजनीतिक मार्जिन के बाद बदली हुई रणनीति?



राघौगढ़ में महायज्ञ, लेकिन चर्चा राजनीति की

दिग्विजय सिंह ने राघौगढ़ के भैंसाना गांव में 151 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ का आयोजन कराया है। आयोजन 28 मई तक चलेगा। आधिकारिक तौर पर इसका उद्देश्य विश्व कल्याण, आध्यात्मिक शांति और पर्यावरण शुद्धि बताया गया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे जयवर्धन सिंह के जनाधार को मजबूत करने की कवायद माना जा रहा है। राघौगढ़ कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में जीत का अंतर तेजी से घटा। इसके बाद कांग्रेस खेमे ने धार्मिक-सांस्कृतिक जुड़ाव को नया राजनीतिक हथियार बनाया है।



चुनावी आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

जयवर्धन सिंह लगातार तीन बार विधायक बने। हर चुनाव में जीत का अंतर घटता गया। 2013 में उन्होंने 58 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। 2018 में अंतर करीब 46 हजार वोट रहा। 2023 में जीत का अंतर केवल 4505 वोट रह गया। यही आंकड़े कांग्रेस खेमे की सबसे बड़ी चिंता बन गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा ने दिग्विजय सिंह की पुरानी छवि और तुष्टिकरण वाले आरोप गांव-गांव तक पहुंचाए। इसका असर हिंदू वोट बैंक पर पड़ा।



अब धर्म-संस्कृति के जरिए नया नैरेटिव

2023 के बाद से दिग्विजय और जयवर्धन सिंह लगातार धार्मिक आयोजनों में सक्रिय हैं। नई रणनीति के संकेत बड़े हैं। 151 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ में मौजूदगी रही। बागेश्वर धाम की हिंदू एकता यात्रा में भाग लिया। अयोध्या जाकर रामलला दर्शन किया। सनातन पर सार्वजनिक बयान दिए। धार्मिक आयोजनों में लगातार भागीदारी हो रही है। राजनीतिक संदेश साफ है—राघौगढ़ परिवार अब अपनी सनातनी पहचान आक्रामक तरीके से दिखा रहा है।



आशुतोष राणा और कुमार विश्वास की एंट्री क्यों खास?

महायज्ञ को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया। अभिनेता आशुतोष राणा को धर्ममय संबोधन और शिवतांडव स्तोत्र के हिंदी भावानुवाद के लिए बुलाया गया। कुमार विश्वास को भी आमंत्रित किया गया है। राजनीतिक जानकार इसे सांस्कृतिक ब्रांडिंग मान रहे हैं। उद्देश्य केवल भीड़ जुटाना नहीं, बल्कि भावनात्मक कनेक्ट बनाना है। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में शामिल होना नई बात नहीं है।



दिग्विजय सिंह हमेशा नर्मदा परिक्रमा और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। सनातन और संस्कृति पर सार्वजनिक संवाद गलत नहीं है। जनता से सांस्कृतिक जुड़ाव लोकतंत्र का हिस्सा है। राघौगढ़ में सामाजिक एकता और धार्मिक माहौल मजबूत होगा। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने वर्षों तक एकतरफा नैरेटिव बनाया। अब उसका जवाब दिया जा रहा है। भाजपा और विपक्ष इसे चुनावी मजबूरी बता रहे हैं।



उनका आरोप है कि चुनावी मार्जिन घटने के बाद सनातन प्रेम में अचानक वृद्धि हुई। पहले दिए गए विवादित बयान अब कांग्रेस पर भारी पड़ रहे हैं। हिंदू वोट बैंक खिसकने के डर से धार्मिक राजनीति शुरू हुई। यह आस्था नहीं, बल्कि राजनीतिक रीब्रांडिंग है। विपक्ष का कहना है कि जनता अब आयोजनों और पुराने बयानों से नेताओं को याद रखती है।



दिग्विजय की बदली भाषा भी चर्चा में

हाल के महीनों में दिग्विजय सिंह कई मंचों से खुद को सनातन परंपरा का समर्थक बता चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा से सनातन धर्म को मानते रहे हैं। नर्मदा परिक्रमा और एकादशी व्रत का भी जिक्र करते रहे हैं। यही कारण है कि अब राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस मध्य प्रदेश में “सॉफ्ट हिंदुत्व” की नई लाइन पर आगे बढ़ रही है?



आगे क्या?

राघौगढ़ का यह महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की बदलती राजनीतिक रणनीतियों का संकेत भी माना जा रहा है। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो कांग्रेस भविष्य में भी धर्म-संस्कृति आधारित जनसंपर्क मॉडल को और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा सकती है। लेकिन अगर जनता इसे सिर्फ चुनावी रणनीति मानती है, तो भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का नया मुद्दा मिल जाएगा।



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