रेलवे भर्ती घोटाला : गूगल की फोटो के सहारे ले ली सरकारी नौकरी, CBI ने बिहार के मुंगेर से दो जालसाजों को दबोचा

सीबीआई ने जबलपुर मंडल में रेलवे की नौकरी पाने के लिए फर्जीवाड़ा करने वाले दो बिहार के युवकों को गिरफ्तार किया है। दोनों ने मिलकर 6 लाख रुपए में नौकरी हासिल करने का सौदा किया था।

author-image
Sanjay Dhiman
New Update
CBI arrested two fraudsters from Munger Bihar

Photograph: (the sootr)

News in Short

  • बिहार के मुंगेर से दो जालसाजों को जबलपुर CBI ने गिरफ्तार कर जेल भेजा।
  • रंजीत ने 6 लाख रुपए लेकर मुकेश की जगह रेलवे भर्ती परीक्षा दी थी।
  • पकड़े जाने से बचने के लिए गूगल से मिक्स फोटो बनाकर फॉर्म भरा था।
  • जॉइनिंग के बाद बायोमैट्रिक टेस्ट में चेहरा और अंगूठा मैच न होने से पोल खुली।
  • रेलवे की शिकायत पर जांच के बाद दोनों आरोपियों को मुंगेर से पकड़ा गया। 

News in Detail

JABALPUR. आज के समय में सरकारी नौकरी पाना हर युवा का सपना होता है, लेकिन कुछ लोग इस सपने को पूरा करने गलत कदम उठा सहारा लेते हैं। बिहार के मुंगेर जिले से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां दो दोस्तों ने मिलकर रेलवे को चूना लगाने की कोशिश की। इसमें एक था मुकेश कुमार, जिसे नौकरी चाहिए थी और दूसरा था रंजीत कुमार, जो कोचिंग पढ़ाता था।

मुकेश ने रंजीत के साथ मिलकर 6 लाख रुपए में एक डील की। डील यह थी कि परीक्षा से लेकर मेडिकल तक हर जगह मुकेश की जगह रंजीत जाएगा। रंजीत लालच में आ गया और उसने मुकेश के लिए 'मुन्ना भाई' बनने की ठान ली। इस कारगुजारी के लिए इन लोगों ने फोटो एडिटिंग सहारा लिया। लेकिन बायोमैट्रिक जांच ने पूरी पोल खोल दी। 

यह खबरें भी पढ़ें..

भोपाल मेट्रो GM को झूठा हलफनामा पड़ा भारी, जबलपुर हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

जबलपुर हाईकोर्ट ने IG रिपोर्ट पर जताई नाराजगी, एक साल तक सीलबंद रहेगी रिपोर्ट

गूगल की फोटो और एडिटिंग का खेल

इस पूरी जालसाजी की सबसे हैरान कर देने वाली बात थी उनकी एप्लीकेशन फोटो। रंजीत ने गूगल की मदद से मुकेश और अपनी फोटो को इस तरह मिक्स (Edit) किया कि वह दोनों एक जैसे दिखे। उनका प्लान यह था कि अगर कभी पकड़े गए तो कह देंगे कि 'पुरानी फोटो है, हम पहले ऐसे ही दिखते थे'। इसी फोटो के दम पर रंजीत ने दिसंबर 2024 में पटना में CBT परीक्षा दी और उसे पास भी कर लिया।

इतना ही नहीं, रंजीत इतना शातिर था कि वह मुकेश बनकर भोपाल में दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) और मेडिकल टेस्ट के लिए भी पहुंच गया। वहां भी किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई और जुलाई 2025 में मुकेश का चयन रेलवे टेक्नीशियन के पद पर हो गया।

जॉइनिंग भी हुई और काम भी किया, बायोमैट्रिक ने फंसा दिया

सितंबर 2025 में मुकेश ने रेलवे में जॉइनिंग ले ली। उसने दमोह, सागर और जबलपुर जैसे स्टेशनों पर काम भी किया। उसे लगा कि अब तो वह 'सेट' हो गया है। अक्टूबर में उसे ट्रेनिंग के लिए प्रयागराज भेजा गया। लेकिन कहते हैं न कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं।

रेलवे के नए नियमों के मुताबिक, भर्ती के एक साल के अंदर बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होता है। 14 नवंबर 2025 को जब मुकेश का बायोमेट्रिक टेस्ट हुआ तो उसके अंगूठे के निशान और चेहरे का मिलान सिस्टम से नहीं हो पाया। पोल खुलते ही मुकेश वहां से भाग खड़ा हुआ और वापस बिहार पहुंच गया।

CBI की एंट्री और मुंगेर में छापेमारी

जबलपुर रेल मंडल ने इस फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत CBI को दी। 2 दिसंबर 2025 को एफआईआर दर्ज हुई और जांच शुरू हुई। CBI के एसपी एस.के. राठी और डीएसपी ए.के. मिश्रा की टीम ने मुकेश की लोकेशन ट्रैक की।

CBI की टीम मुंगेर पहुंची और मुकेश को धर दबोचा। कड़ाई से पूछताछ करने पर मुकेश ने सारा सच उगल दिया और अपने साथी रंजीत का नाम भी बता दिया। 2 मार्च 2026 को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। CBI अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या रंजीत ने किसी और की जगह बैठकर भी परीक्षा पास करवाई है।

यह खबरें भी पढ़ें..

एमपी में बिजली उपभोक्ताओं को झटका, स्मार्ट मीटर का खर्च आपकी जेब से वसूलेगी कंपनी

एमपी कृषि कैबिनेट : किसानों को मिली बड़ी सौगात, 27 हजार करोड़ की योजनाओं को मिली मंजूरी

दस्तावेज सत्यापन प्रयागराज बायोमेट्रिक जबलपुर रेल मंडल सरकारी नौकरी CBI जबलपुर
Advertisment