जबलपुर पश्चिम में राकेश सिंह के सामने तरुण भनोत बने चुनौती, BJP को अपने वोटर्स पर पूरा भरोसा, हैट्रिक की जुगत में कांग्रेस
Vikram Jain | Oct 19, 2023, 24:00 IST
जबलपुर पश्चिम में राकेश सिंह के सामने तरुण भनोत बने चुनौती, BJP को अपने वोटर्स पर पूरा भरोसा, हैट्रिक की जुगत में कांग्रेस
विधानसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है। जबलपुर पश्चिम सीट से बीजेपी ने सांसद राकेश सिंह को उतारा है वहीं कांग्रेस ने तरुण भनोत पर फिर भरोसा जताया है।
JABALPUR. विधानसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी ने इस चुनाव में कई सांसदों को टिकट देकर मैदान में उतारा है। चुनाव के मद्देनजर जबलपुर पश्चिम विधानसभा सीट की बात करें तो यहां बीजेपी ने 4 बार से जबलपुर से सांसद राकेश सिंह को प्रत्याशी बनाया हैं तो कांग्रेस ने कमलनाथ सरकार में वित्त मंत्री रहे तरुण भनोत को फिर से मौका दिया है। सांसद और लोकसभा के मुख्य सचेतक से विधायक के प्रत्याशी बने राकेश सिंह ने जनता के बीच जाकर समर्थन जुटाना शुरू कर दिया है। जबलपुर में 8 विधानसभा सीटें हैं 4 सीटों पर बीजेपी और 4 पर कांग्रेस का कब्जा है। चलिए आज हम जबलपुर पश्चिम विधानसभा सीट स्थिति को समझते हैं।
राकेश सिंह की एंट्री से मुकाबला हुआ रोचक
महाकौशल की जबलपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां के वोटर्स एक दशक से कांग्रेस का साथ देते रहे, लेकिन इस बार राकेश सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। राकेश सिंह जहां सांसद के अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की बदौलत जनता से समर्थन मांग रहे हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी तरुण भनोत को भरोसा है कि जिस तरह से क्षेत्र के मतदाता पिछले 10 सालों से उन पर विश्वास जता रहे हैं वह आगे भी कायम रहेगा। यहां से कांग्रेस के तरूण भनोट मौजूदा विधायक हैं। उन्होंने 2013 और 2018 में लगातार जीत हासिल की है।
2019 में मिली 85 हजार वोटों की बढ़त से राकेश सिंह को आस
2019 के लोकसभा चुनाव में जबलपुर लोकसभा सीट से बीजेपी के प्रत्याशी राकेश सिंह को बड़ी जीत मिली थी। राकेश सिंह को 8 लाख 26 हजार 454 वोट मिले थे जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के विवेक तन्खा को 3 लाख 71 हजार 710 वोट हासिल हो पाए थे। इस लिहाज से राकेश सिंह ने 2019 का लोकसभा का चुनाव 4 लाख 54 हजार 744 वोटों से जीता था। सबसे खास बात यह है कि आठ विधानसभा क्षेत्रों में से पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से राकेश सिंह को लोकसभा के चुनाव में 85 हजार से ज्यादा वोटो से लीड मिली थी, अब इस सीट से विधायक बनने के लिए राकेश सिंह घर-घर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
दोनों को अपने-अपने कार्यों से जीत का भरोसा
बीजेपी प्रत्याशी राकेश सिंह का कहना है कि सांसद रहते हुए उन्होंने विकास के जहां अनेक सौगातें जबलपुर को दिलाई वहीं केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का फायदा भी जनता को मिल रहा है जिसके सहारे उन्हें अपनी जीत का पूरा भरोसा है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी तरुण भनोट सांसद के तौर पर राकेश सिंह की भूमिका पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। वे अपने 15 महीने की कमलनाथ सरकार की जहां उपलब्धियां गिना रहे हैं तो वहीं जनता के लिए उनके द्वारा किए गए सेवा के कार्यों को भी अपनी जीत के लिए बड़ा आधार मान रहे हैं।
पश्चिम में जीत के फैक्टर
पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण, पंजाबी और यादव समाज की बहुलता है लिहाजा यहां के जीत हार में इन समुदायों की भूमिका काफी अहम होती है। व्यापारी और संभ्रांत वर्ग के मतदाताओं के साथ-साथ कुछ ऐसी बस्तियां भी हैं जहां के मतदाताओं को डिसाइडिंग फैक्टर माना जाता है। पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से 3 बार विधायक रहे हरेंद्र जीत सिंह बब्बू को पंजाबी समुदाय के साथ-साथ बस्तियों के मतदाताओं का खास समर्थन हासिल हुआ करता था जिसके चलते वे एक के बाद एक तीन विधानसभा चुनाव में लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं। बता दें कि उन्हें पिछले दो चुनावों 2013 और 2018 में तरूण भनोट से हार का सामना करना पड़ा था।
जानें कहां कौन और कैसे मुश्किल में...
यूं तो 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और बीजेपी प्रत्याशी अपनी जीत के लिए पूरी तरह से आश्वस्त हैं लेकिन दोनों ही प्रत्याशियों के साथ कुछ ऐसे पहलू भी हैं जो उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। सांसद राकेश सिंह के लिए आमतौर पर कहा जाता है कि उनका जनता से जुड़ाव कम रहता है क्योंकि संसद सत्र और अन्य कामों के चलते उन्हें अक्सर दिल्ली में ही रहना पड़ता है इसलिए उनका जनता से सीधा जुड़ाव नहीं है और मतदाता भी उनके पास बेहिचक नहीं जा सकते लेकिन पद, ओहदे और जिम्मेदारी के लिहाज से राकेश सिंह का अच्छा खासा प्रभाव है जिससे मतदाता प्रभावित हो सकते हैं, वहीं कमलनाथ सरकार में पूर्व वित्त मंत्री रहे तरुण भनोत क्षेत्र के मतदाताओं के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं और उनके लिए सेवा के कई प्रकल्प भी चलाते हैं लेकिन पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में पढ़े-लिखे मतदाता हैं और इनमें अधिकांश तादाद संघ और बीजेपी की पृष्ठभूमि से भी आते हैं लिहाजा संघ का अपना वोट बैंक है जो सीधे तौर पर राकेश सिंह को फायदा पहुंचाने के साथ ही तरुण भनोत के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं।
राकेश सिंह की एंट्री से मुकाबला हुआ रोचक
महाकौशल की जबलपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां के वोटर्स एक दशक से कांग्रेस का साथ देते रहे, लेकिन इस बार राकेश सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। राकेश सिंह जहां सांसद के अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की बदौलत जनता से समर्थन मांग रहे हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी तरुण भनोत को भरोसा है कि जिस तरह से क्षेत्र के मतदाता पिछले 10 सालों से उन पर विश्वास जता रहे हैं वह आगे भी कायम रहेगा। यहां से कांग्रेस के तरूण भनोट मौजूदा विधायक हैं। उन्होंने 2013 और 2018 में लगातार जीत हासिल की है।
2019 में मिली 85 हजार वोटों की बढ़त से राकेश सिंह को आस
2019 के लोकसभा चुनाव में जबलपुर लोकसभा सीट से बीजेपी के प्रत्याशी राकेश सिंह को बड़ी जीत मिली थी। राकेश सिंह को 8 लाख 26 हजार 454 वोट मिले थे जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के विवेक तन्खा को 3 लाख 71 हजार 710 वोट हासिल हो पाए थे। इस लिहाज से राकेश सिंह ने 2019 का लोकसभा का चुनाव 4 लाख 54 हजार 744 वोटों से जीता था। सबसे खास बात यह है कि आठ विधानसभा क्षेत्रों में से पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से राकेश सिंह को लोकसभा के चुनाव में 85 हजार से ज्यादा वोटो से लीड मिली थी, अब इस सीट से विधायक बनने के लिए राकेश सिंह घर-घर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
दोनों को अपने-अपने कार्यों से जीत का भरोसा
बीजेपी प्रत्याशी राकेश सिंह का कहना है कि सांसद रहते हुए उन्होंने विकास के जहां अनेक सौगातें जबलपुर को दिलाई वहीं केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का फायदा भी जनता को मिल रहा है जिसके सहारे उन्हें अपनी जीत का पूरा भरोसा है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी तरुण भनोट सांसद के तौर पर राकेश सिंह की भूमिका पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। वे अपने 15 महीने की कमलनाथ सरकार की जहां उपलब्धियां गिना रहे हैं तो वहीं जनता के लिए उनके द्वारा किए गए सेवा के कार्यों को भी अपनी जीत के लिए बड़ा आधार मान रहे हैं।
पश्चिम में जीत के फैक्टर
पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण, पंजाबी और यादव समाज की बहुलता है लिहाजा यहां के जीत हार में इन समुदायों की भूमिका काफी अहम होती है। व्यापारी और संभ्रांत वर्ग के मतदाताओं के साथ-साथ कुछ ऐसी बस्तियां भी हैं जहां के मतदाताओं को डिसाइडिंग फैक्टर माना जाता है। पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से 3 बार विधायक रहे हरेंद्र जीत सिंह बब्बू को पंजाबी समुदाय के साथ-साथ बस्तियों के मतदाताओं का खास समर्थन हासिल हुआ करता था जिसके चलते वे एक के बाद एक तीन विधानसभा चुनाव में लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं। बता दें कि उन्हें पिछले दो चुनावों 2013 और 2018 में तरूण भनोट से हार का सामना करना पड़ा था।
जानें कहां कौन और कैसे मुश्किल में...
यूं तो 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और बीजेपी प्रत्याशी अपनी जीत के लिए पूरी तरह से आश्वस्त हैं लेकिन दोनों ही प्रत्याशियों के साथ कुछ ऐसे पहलू भी हैं जो उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। सांसद राकेश सिंह के लिए आमतौर पर कहा जाता है कि उनका जनता से जुड़ाव कम रहता है क्योंकि संसद सत्र और अन्य कामों के चलते उन्हें अक्सर दिल्ली में ही रहना पड़ता है इसलिए उनका जनता से सीधा जुड़ाव नहीं है और मतदाता भी उनके पास बेहिचक नहीं जा सकते लेकिन पद, ओहदे और जिम्मेदारी के लिहाज से राकेश सिंह का अच्छा खासा प्रभाव है जिससे मतदाता प्रभावित हो सकते हैं, वहीं कमलनाथ सरकार में पूर्व वित्त मंत्री रहे तरुण भनोत क्षेत्र के मतदाताओं के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं और उनके लिए सेवा के कई प्रकल्प भी चलाते हैं लेकिन पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में पढ़े-लिखे मतदाता हैं और इनमें अधिकांश तादाद संघ और बीजेपी की पृष्ठभूमि से भी आते हैं लिहाजा संघ का अपना वोट बैंक है जो सीधे तौर पर राकेश सिंह को फायदा पहुंचाने के साथ ही तरुण भनोत के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं।
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari